'मैं योगी के खिलाफ नहीं, लेकिन शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन'; अविमुक्तेश्वरानंद विवाद में उमा भारती की एंट्री
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Jan 27, 2026, 05:15 PM IST
पिछले 10 दिन से प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद का धरना जारी है। उन्होंने मंगलवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा कि यह विरोध लगातार जारी रहेगा। माघ मेला पूरा होने पर हम वापस जाएंगे और अगली बार फिर से प्रयागराज में धरने पर बैठेंगे। इस बीच इस मामले में मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता उमा भारती ने भी एंट्री ले ली है। उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से शंकराचार्य होने के सबूत मांगे जाने को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है।
उमा भारती
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर इन दिनों उत्तर प्रदेश की सियासत गर्म है। अखिलेश और योगी आदित्यनाथ के बीच इस मुद्दे पर ठनी हुई है। इतना ही नहीं कई भाजपा नेता भी इस मुद्दे पर योगी आदित्यनाथ और उनके प्रशासन के खिलाफ हो गए हैं। इस बीच इस मामले में मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता उमा भारती ने भी एंट्री ले ली है। उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से शंकराचार्य होने के सबूत मांगे जाने को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य होने का सबूत मांगकर प्रशासन ने अपनी मर्यादाओं और अधिकारों का उल्लंघन किया है।
उमा भारती ने क्या लिखा?
पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बैक टू बैक दो पोस्ट कर अपनी प्रतिक्रिया दी। उमा भारती ने लिखा कि मुझे विश्वास है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कोई सकारात्मक समाधान निकल आएगा। लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से शंकराचार्य होने का सबूत मांगना प्रशासन की अपनी मर्यादाओं और अधिकारों का उल्लंघन है। यह अधिकार सिर्फ शंकराचार्यों और विद्वत परिषद का है।
इस पोस्ट के करीब पांच घंटे बाद उन्होंने अपने आधिकारिक हैंडल से फिर एक पोस्ट किया। इसमें उन्होंने लिखा कि योगी विरोधी खुश फहमी ना पालें, मेरा कथन योगी जी के विरुद्ध नहीं है,मैं उनके प्रति सम्मान,स्नेह एवं शुभकामना का भाव रखती हूं किंतु मैं इस बात पर कायम हूं कि प्रशासन कानून-व्यवस्था पर सख्ती से नियंत्रण करे लेकिन किसी के शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन है,यह सिर्फ शंकराचार्य या विद्वत परिषद कर सकते हैं।
'सत्ता के अहंकार में सनातन धर्म का अपमान'
इसी बीच, कांग्रेस के सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी निशाना साधा है। उन्होंने मंगलवार को 'एक्स' पोस्ट में लिखा कि धर्म के नाम पर राजनैतिक रोटी सेंकने वाले अब सत्ता के अहंकार में सनातन धर्म का अपमान करने का अधर्म कर रहे हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी से शंकराचार्य होने का सबूत मांगना अस्वीकार्य है। पुरोहितों को शिखा पकड़कर घसीटना और संतों के पवित्र स्नान में विघ्न डालना बहुत शर्मनाक है। सत्ता का अहंकार छोड़कर भाजपा को शंकराचार्य जी से तुरंत माफी मांगकर उन्हें ससम्मान स्नान करवाना चाहिए।"
10 दिनों से धरने पर बैठे अविमुक्तेश्वरानंद
पिछले 10 दिन से प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद का धरना जारी है। उन्होंने मंगलवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा कि यह विरोध लगातार जारी रहेगा। माघ मेला पूरा होने पर हम वापस जाएंगे और अगली बार फिर से प्रयागराज में धरने पर बैठेंगे। उन्होंने कहा कि हमारा शिविर प्रवेश तभी होगा,जब हमारा ससम्मान संगम स्नान होगा।
क्यों शुरू हुआ विवाद
बता दें कि 17 जनवरी को मौनी अमावस्या के अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती प्रयागराज मेघा मेला में संगम घाट पर स्नान करने पहुंचे थे। पूरे लाव-लश्कर के साथ वह अपनी पालकी पर आए थे,लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन्हें बिना रथ के आगे बढ़ने को कहा। इसी बात पर अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला व्यवस्था में जुटे कर्मचारियों के बीच विवाद हुआ था। बाद में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि उनके साथ यह व्यवहार जानबूझकर किया गया है। विवाद उस समय और बढ़ा,जब अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेले में ही धरने पर बैठ गए।
देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (News in Hindi) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। देश (India News) अपडेट और चुनाव (Elections) की ताजा समाचार के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से ।