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मणिपुर के CM एन बीरेन सिंह के सुरक्षा काफिले पर हमला, कुकी उग्रवादियों ने दागी गोलियां

Manipur Violence: यह हमला उस वक्त हुआ जब सीएम का काफिला हिंसा प्रभावित जिरीबाम जिले की ओर जा रहा था। पुलिस ने बताया कि सुरक्षा बलों के वाहनों पर कई गोलियां चलाई गईं, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की। इसमें एक जवान घायल हो गया।

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मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह

Manipur Violence: मणिपुर में शुरू हुआ हिंसा का दौर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। यहां रह-रहकर हिंसक वारदातें लगातार जारी हैं। अब उग्रवादियों ने मणिपुर मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के सुरक्षा काफिले को ही निशाना बनाया है। जानकारी के मुताबिक, कुछ उग्रवादियों ने घात लगारक उनके काफिले पर ताबड़तोड़ गोलियां दागीं, जिसमें एक जवान घायल हो गया है।

कहा जा रहा है कि यह हमला कुकी उग्रवादियों की ओर से किया गया, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं की गई है। पुलिस ने बताया कि यह हमला उस वक्त हुआ जब सीएम का काफिला हिंसा प्रभावित जिरीबाम जिले की ओर जा रहा था। पुलिस ने बताया कि सुरक्षा बलों के वाहनों पर कई गोलियां चलाई गईं, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की।

मणिपुर में नहीं हैं सीएम

पुलिस ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग-53 के समीप कोटलेन गांव के पास गोलीबारी अब भी जारी है। हमले के दौरान कम से कम एक जवान गोली लगने से घायल हो गया। एक अधिकारी ने बताया कि सबसे महत्वपूर्ण बात है कि काफिले में सीएम बीरने सिंह मौजूद नहीं थे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री बीरेन सिंह अभी दिल्ली से इंफाल नहीं पहुंचे हैं। वह जिले में स्थिति का जायजा लेने के लिए जिरीबाम जाने की योजना बना रहे थे। बता दें, संदिग्ध उग्रवादियों ने शनिवार को जिरीबाम में दो पुलिस चौकियों, वन विभाग के कार्यालय और कम से कम 70 मकानों में आग लगा दी थी।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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