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Atique Ahmed Shootout: शूटरों को'मिस्टर X और Y' से मिल रही थी अतीक की लोकेशन, सामने आया प्रयागराज कनेक्शन

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 22, 2023, 12:28 PM IST

Atique Ahmed Shootout: एसआईटी को पूछताछ के दौरान अतीक-अशरफ के शूटरों के दो मददगारों के बारे में पता चला है। सामने आया है कि दोनों मौके पर ही मौजूद थे और लगातार उनकी लोकेशन साझा कर रहे थे।

Atique Ahmed Shootout: प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ हत्याकांड मामले में बहुत बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस को पूछताछ के दौरान पता चला है कि हत्याकांड वाली जगह पर तीन शूटरों के अलावा दो अन्य लोग भी मौजूद थे, जो तीनों शूटर्स को लगातार इंस्ट्रक्शन दे रहे थे। इस खुलासे के बाद अब एसआईटी को 'मिस्टर X' और 'मिस्टर Y' की तलाश तेज कर दी है।

पुलिस सूत्रों ने दावा किया है कि शूटरों के दोनों मददगारों के घटना वाली रात मौके पर ही मौजूद होने के पुख्ता सबूत मिले हैं। ये लगातार शूटरों को गाइड कर रहे थे। यह भी बात सामने आई है कि दोनों मददगारों में से एक प्रयागराज का ही रहने वाला था, जिसे सभी रास्तों की पहले से जानकारी थी। वहीं एक अन्य मददगार प्रयागराज के बाहर का हो सकता है।

मिस्टर X ने ही किया था शूटरों के रहने-खाने का इंतजाम

पुलिस सूत्रों ने दावा किया है कि पूछताछ के दौरान सामने आया है कि दोनों मददगारों में से एक यानी मिस्टर X ने ही तीनों शूटरों के रहने-खाने का इंतजाम किया था और अतीक-अशरफ की रेकी तक कराई थी। उसी ने ही शूटरों का रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक की तरफ एक होटल में ठहरने-खाने का इंतजाम कराया था। यही अस्पताल के बाहर रहकर ही लगातार शूटरों को लोकेशन दे रहे थे।

होटल में ही फोन छोड़कर आए थे शूटर

पुलिस के मुताबिक, अतीक और अशरफ पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाने वाले शूटर अपना मोबाइल फोन होटल के कमरे में ही छोड़कर आए थे। पुलिस को उस होटल से शूटर्स के दो पुराने फोन भी मिले है।इन दोनों फोन में कोई सिम नही है। सूत्रों के मुताबिक अतीक अशरफ हत्याकांड के समय इनका एक साथी अस्पताल परिसर और दूसरा अस्पताल के बाहर ही खड़ा था। इसी के चलते इन तीनों को अतीक और अशरफ की सटीक लोकेशन मिल रही थी।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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