Mohammad Zubair : सुप्रीम कोर्ट से मोहम्मद जुबैर को मिली राहत, जमानत पर रिहा करने का आदेश, सभी केस दिल्ली ट्रांसफर

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jul 20, 2022, 03:47 PM IST

Mohammad Zubair : भड़काऊ पोस्ट शेयर करने के मामले में अल्ट न्यूज के संस्थापक मोहम्मद जुबैर को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने बुधवार को उत्तर प्रदेश में उनके खिलाफ दर्ज सभी छह मामलों में अंतरिम जमानत दे दी।  

Mohammad Zubair : सुप्रीम कोर्ट से मोहम्मद जुबैर को मिली राहत, जमानत पर रिहा करने का आदेश, सभी केस दिल्ली ट्रांसफर

Mohammad Zubair : भड़काऊ पोस्ट शेयर करने के मामले में अल्ट न्यूज के संस्थापक मोहम्मद जुबैर को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने बुधवार को उत्तर प्रदेश में उनके खिलाफ दर्ज सभी छह मामलों में अंतरिम जमानत दे दी। अदालत ने कहा है कि जुबैर को रिहा होने के लिए 20 हजार रुपए का मुचलका भरना हगा। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा है कि अपने खिलाफ दर्ज सभी अथवा किसी केस को रद्द कराने के लिए वह दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। 

सभी छह मामले एक में क्लब होंगे-कोर्ट
जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि जुबैर को लगातार हिरासत में रखने की जरूरत नहीं है क्योंकि उनके ट्वीट को लेकर लगे आरोपों की जांच अभी दिल्ली पुलिस कर रही है। कोर्ट ने उन पर दर्ज सभी मामलों को एक में क्लब करने और एक एजेंसी से जांच कराने का आदेश दिया। अदालत ने आगे कहा कि हमारा मानना है कि याचिकाकर्ता की अपील को सुना जाना चाहिए। कोर्ट ने यूपी सरकार की ओर से मामलों की जांच के लिए गठित एसआईटी को भी रद्द कर दिया है।    

कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें

  • जेल से बाहर आएंगे जुबैर लेकिन मामले खत्म नहीं होंगे
  • यूपी में दर्ज सभी छह मामलों में जमानत मिली
  • मौजूदा ट्वीटस को लेकर आगे गिरफ्तारी नहीं होगी
  • सभी मामले एक में क्लब होंगे और दिल्ली ट्रांसफर
  • मामलों की जांच के लिए यूपी की एटीएस रद्द
  • जुबैर केस खत्म कराने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट जा सकते हैं
  • जुबैर को जेल से रिहा होने के लिए 20 हजार रुपए का मुचलका भरना होगा 

इससे पहले उत्तर प्रदेश की लखीमपुर खीरी कोर्ट ने जुबैर के खिलाफ दर्ज एक मामले में उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। मोहम्मद जुबैर को सीतापुर जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया गया और उसके खिलाफ एफआईआर में धारा 153 बी, 505 (1) (बी) और 505 (2) जोड़ी गई।

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