राष्ट्रपति चुनाव: दिल्ली में विपक्ष की बड़ी बैठक, कांग्रेस समेत 17 दलों के नेताओं ने लिया हिस्सा

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jun 15, 2022, 05:50 PM IST

Presidential Election 2022: राष्ट्रपति चुनाव को लेकर दिल्ली में विपक्ष की बड़ी बैठक हुई। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस बैठक को बुलाया। 17 दलों के नेता इस बैठक में शामिल हुए।

राष्ट्रपति चुनाव: दिल्ली में विपक्ष की बड़ी बैठक, कांग्रेस समेत 17 दलों के नेताओं ने लिया हिस्सा
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राष्ट्रपति चुनाव के मद्देनजर तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में विपक्षी नेताओं की बैठक बुलाई। कई नेता बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे। कांग्रेस से रणदीप सुरजेवाला, मल्लिकार्जुन खड़गे और जयराम रमेश पहुंचे। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी बैठक में मौजूद रहे। पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती भी बैठक में शामिल हुईं। 17 दलों के नेता बैठक में पहुंचे।

16 दलों के नेता (कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआई (एम), सीपीआईएमएल, आरएसपी, शिवसेना, एनसीपी, आरजेडी, समाजवादी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, जेडीएस, डीएमके, आरएलडी, आईयूएमएल और झामुमो) बैठक में पहुंचे।

इससे पहले दिल्ली में शरद पवार के घर पर भी कई दौर की बैठक हुई। कल ममता बनर्जी ने शरद पवार से मुलाकात की थी और उसके बाद आज सुबह प्रफुल्ल पटेल ने मुलाकात की और फिर पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा भी शरद पवार से मिले। हालांकि कल ही शरद पवार राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बनने से इनकार कर चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक शरद पवार ने कहा कि विपक्ष के पास राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए नंबर नहीं है ऐसे में वो चुनाव लड़ना नहीं चाहते हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस ने दावा किया है कि बिना कांग्रेस की मदद के विपक्ष राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बारे में सोच भी नहीं सकता।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि बिना कांग्रेस के विपक्ष मजबूत नहीं हो सकता है और कांग्रेस विपक्ष को एकजुट करने के लिए ही इस बैठक में शामिल हो रही है। 

बैठक में तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस), बीजू जनता दल (बीजद), आम आदमी पार्टी (आप) और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के नेता शामिल नहीं हुए हैं। बनर्जी ने 18 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए पिछले हफ्ते विपक्षी को एक करने के मकसद से राष्ट्रीय राजधानी में एक बैठक के लिए सात मुख्यमंत्रियों सहित 19 राजनीतिक दलों के नेताओं को आमंत्रित किया था।

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