प्रचार के आखिरी दिन ममता बनर्जी ने बताया अपना गोत्र, गिरिराज सिंह ने इस तरह कसा तंज

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Mar 30, 2021, 10:56 PM IST

Mamata Banerjee gotra: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि मैं मंदिर गई तो पुजारी ने मेरा गोत्र पूछा, मैंने कहा मां, माटी, मानुष। वास्तव में मैं शांडिल्य हूं।

प्रचार के आखिरी दिन ममता बनर्जी ने बताया अपना गोत्र, गिरिराज सिंह ने इस तरह कसा तंज

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के मतदान के लिए आज शाम 5 बजे प्रचार थम गया। 1 अप्रैल को यहां 30 सीटों पर चुनाव होना है। इस चरण में नंदीग्राम में भी वोटिंग होनी है, जहां से ममता बनर्जी का मुकाबला बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी से है। बीजेपी हमेशा से ममता बनर्जी पर तुष्टिकरण का आरोप लगाती है। इन चुनावों में ममता ने अपने ऊपर लगे इस आरोप का जवाब देने की खूब कोशिश की। पहले उन्होंने मंच से चंडी पाठ किया और फिर मंदिरों में भी दर्शन करने पहुंचीं। लेकिन अब उन्होंने अपना गोत्र भी बता दिया है। 

उन्होंने कहा, 'मेरे दूसरे अभियान के दौरान मैंने एक मंदिर का दौरा किया जहां पुजारी ने मुझसे मेरा 'गोत्र' पूछा। मैंने उनसे कहा - मां माटी मानुष। इसने मुझे त्रिपुरा के त्रिपुरेश्वरी मंदिर की मेरी यात्रा की याद दिलाई, जहां पुजारी ने मुझसे मेरा 'गोत्र' पूछा था और मैंने उन्हें मां माटी मानुष ही कहा था, वास्तव में मैं शांडिल्य हूं।' 

गिरिराज ने कसा तंज

अपना गोत्र बताने पर केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता गिरिराज सिंह ने ममता बनर्जी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'चुनाव हारने के डर से ममता दीदी ने अपना गोत्र बता दिया। दीदी जरा मुझे बताइए कि क्या शांडिल्य रोहिंग्याओं और घुसपैठियों का भी गोत्र है। वह अब डर गई हैं, इसीलिए कभी वो शुवेन्दु जैसे भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला करती हैं और कभी गोत्र का उपयोग करती हैं। मुझे तो कभी गोत्र बताने की ज़रूरत नहीं पड़ी, मैं तो लिखता हूं। लेकिन ममता बनर्जी चुनाव हारने के डर से गोत्र बताती हैं। उनका हारना तय है।' 

गिरिराज ने ट्वीट कर कहा, 'रोहिंग्या को वोट के लिए बसाने वाले, दुर्गा/काली पूजा रोकने वाले, हिंदुओ को अपमानित करने वाले, अब हार के खौफ से गोत्र पर उतर गए। “शांडिल्य गोत्र” सनातन और राष्ट्र के लिए समर्पित है, वोट के लिए नहीं। ममता दीदी, अब तो पता करना होगा कि रोहिंग्या और घुसपैठियों का भी गोत्र शांडिल्य है क्या?' 

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