देश

'zero food children' पर JAMA नेटवर्क पर प्रकाशित लेख फर्जी खबरों को सनसनीखेज बनाने का दुर्भावनापूर्ण प्रयास- सरकार

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Mar 13, 2024, 01:16 AM IST

JAMA लेख छह महीने से अधिक उम्र के शिशुओं के लिए स्तन के दूध के महत्व को स्वीकार नहीं करता है और इसके बजाय केवल ऐसे शिशुओं को पशु का दूध/फार्मूला, ठोस या अर्ध-ठोस आदि खिलाने पर ध्यान देता है।

Image

प्रतीकात्मक तस्वीर (Pixabay)

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कहा है कि भारत में तथाकथित शून्य भोजन वाले बच्चों (zero food children) पर 12 फरवरी, 2024 को JAMA नेटवर्क पर प्रकाशित लेख फर्जी खबरों को सनसनीखेज बनाने के लिए इच्छुक लॉबी द्वारा एक जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण प्रयास है। लेख का खंडन करते हुए, मंत्रालय ने कहा है कि यह आश्चर्यजनक है कि भारत में बच्चों की पोषण स्थिति पर इतने व्यापक और गलत सामान्यीकरण तक पहुंचने के लिए श्री एस.वी. सुब्रमण्यम और अध्ययन के सह-लेखकों द्वारा कोई प्राथमिक शोध नहीं किया गया है।

लेखकों ने स्वयं डेटा पर गहरी शंकाओं को स्वीकार किया है और कम से कम 9 सीमाओं का उल्लेख किया है जो उनके अध्ययन को बिल्कुल अविश्वसनीय बनाती हैं। "शून्य भोजन वाले बच्चों" की कोई वैज्ञानिक परिभाषा नहीं है। अपनाई गई पद्धति अपारदर्शी है। भारत में किसी भी राज्य सरकार या किसी निजी संगठन ने कभी भी भूख से मर रहे बच्चों के बारे में रिपोर्ट नहीं की है।

JAMA लेख छह महीने से अधिक उम्र के शिशुओं के लिए स्तन के दूध के महत्व को स्वीकार नहीं करता है और इसके बजाय केवल ऐसे शिशुओं को पशु का दूध/फार्मूला, ठोस या अर्ध-ठोस आदि खिलाने पर ध्यान देता है। यह आश्चर्यजनक है कि लेख छह से तेईस महीने के शिशुओं के लिए भोजन की परिभाषा से स्तन के दूध को बाहर रखा गया है। अध्ययन में संदर्भित तथाकथित 19.3% जीरो फूड बच्चों में से 17.8% को मां का दूध मिला था और केवल 1.5% बच्चों को गैर-स्तनपान कराने का दावा किया गया है।

यह भी आश्चर्य की बात है कि अध्ययन में देश भर के 13.9 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों (एडब्ल्यूसी) के माध्यम से पोषण ट्रैकर पर पोषण संकेतकों पर महीने दर महीने मापे गए 8 करोड़ से अधिक बच्चों के सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डेटा का उल्लेख नहीं किया गया है। न ही लेखकों द्वारा सार्वजनिक प्राधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगने का कोई प्रयास किया गया है। इसलिए यह स्पष्ट है कि यह लेख दुर्भावनापूर्ण ढंग से राजनीतिक रूप से उत्तेजक बनाया गया है।

टाइम्स नाउ नवभारत
टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटलauthor

अक्टूबर 2017 में डिजिटल न्यूज़ की दुनिया में कदम रखने वाला टाइम्स नाउ नवभारत अपनी एक अलग पहचान बना चुका है। अपने न्यूज चैनल टाइम्स नाउ नवभारत की सोच एवं नजरिए के साथ आगे बढ़ते हुए यह न्यूज़ प्लेटफॉर्म आम लोगों से जुड़े मुद्दों का गहराई से विश्लेषण एवं उसे आसान भाषा में पेश करता आया है। राजनीति से लेकर खेल, मनोरंजन, कारोबार और आम लोगों के जीवन पर असर डालने वालीं खबरों का मायने समझाते हुए यह डिजिटल प्लेटफॉर्म लोगों के भरोसे पर खरा उतरा है। \n\nसाथ ही यह अपने न्यूज़ चैनल पर दिखाए जाने वाली खबरों, शोज, स्पशेल कार्यक्रमों एवं रिपोर्टों को पेश करता है। चैनल के ये कार्यक्रम एवं शोज देश-दुनिया के घटनाक्रमों पर एक नया एवं विश्वसनीय नजरिया देते हैं। अपनी खबरों एवं विश्लेषण के चलते पसंदीदा न्यूज़ प्लेटफॉर्म बन चुका टाइम्स नाउ नवभारत, डिजिटल लोगों के भरोसे को लगातार मजबूत कर रहा है।

और पढ़ें
End of Article