Delhi Blast Update: दिल्ली में हुए लाल किला धमाके की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, सुरक्षा एजेंसियों को एक के बाद एक अहम सुराग मिल रहे हैं। इसी कड़ी में अब एक और डॉक्टर को हिरासत में लिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, हापुड़ के GS मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत डॉक्टर फारूक को जांच एजेंसियों ने हिरासत में लिया है। जानकारी के अनुसार, फारूक मूल रूप से जम्मू-कश्मीर का रहने वाला है और पिछले एक साल से हापुड़ के कॉलेज परिसर में रह रहा था।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी से की है पढ़ाई
डॉक्टर फारूक ने फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी से MBBS और एमडी MD की पढ़ाई पूरी की है। गौरतलब है कि दिल्ली ब्लास्ट के बाद हरियाणा की अल-फलाह यूनिवर्सिटी और मेडिकल कॉलेज चर्चा में है, क्योंकि जांच में जिन आरोपियों के नाम सामने आए हैं, वे फरीदाबाद स्थित अल-फलाह मेडिकल कॉलेज से जुड़े हुए थे और वहीं कार्यरत थे। जांच एजेंसियों को शक है कि डॉक्टर फारूक का संबंध किसी आतंकी मॉड्यूल से हो सकता है। फिलहाल एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसका लाल किला धमाके या किसी अन्य संदिग्ध नेटवर्क से कोई संबंध तो नहीं है।
सोमवार को हुआ था आतंकी हमला
अधिकारियों ने सोमवार को जम्मू कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में फैले आतंकवादी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े एक "व्हाइट कॉलर आतंकी मॉड्यूल" का भंडाफोड़ किया और 2,900 किलोग्राम विस्फोटक पदार्थ जब्त किया। अल फलाह विश्वविद्यालय से जुड़े तीन चिकित्सकों समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया। इसके कुछ घंटे बाद लाल किला मेट्रो स्टेशन के भीड़भाड़ वाले इलाके में एक धीमी गति से चल रही कार में एक जोरदार विस्फोट हुआ, जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। गुरुवार को हुए DNA टेस्ट से पुष्टि हुई कि विस्फोट वाली कार डॉ. उमर ही चला रहा था। पुलिस की टीम बुधवार को अल-फलाह विश्वविद्यालय और इस मामले में गिरफ्तार किए गए प्रमुख संदिग्धों में से एक डॉ. मुजम्मिल गनई के घर गईं। उन्होंने विश्वविद्यालय के कई चिकित्सकों और छात्रों से पूछताछ की।
कानपुर से भी एक डॉक्टर हिरासत में
बुधवार की देर रात इंटेलिजेंस टीमों ने छापेमारी कर कानपुर से एक संदिग्ध डॉक्टर को हिरासत में लिया है। यह गिरफ्तारी परवेज अंसारी की निशानदेही पर की गई है, जिसे पहले ही इस केस में गिरफ्तार है। ATS सूत्रों के मुताबिक, मोहम्मद आरिफ कानपुर से फरार होने की तैयारी में था लेकिन उससे पहले छापेमारी कर उसे पकड़ा गया। फिलहाल उसे लखनऊ लाकर पूछताछ की जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि धमाके के अगले दिन वह कुछ ऐसे लोगों के संपर्क में था, जो डॉ. शाहीन शाहिद और डॉ. परवेज अंसारी से लगातार जुड़े हुए थे। इन्हीं कॉल रिकॉर्ड्स और डिजिटल ट्रेल से ATS को आरिफ तक पहुंचने में मदद मिली।
