दिल्ली धमाका मामले में कानपुर से एक और डॉक्टर हिरासत में (तस्वीर साभार: PTI)
Delhi Blast Case Update: दिल्ली में 10 नवंबर को हुए लाल किले विस्फोट मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी मामले में एक और डॉक्टर अब जांच एजेंसियों के हिरासत में है। उत्तर प्रदेश ATS ने देर रात कानपुर से डॉक्टर आरिफ को हिरासत में लिया है। यह गिरफ्तारी डॉ. परवेज अंसारी की निशानदेही पर की गई है, जिसे पहले ही इस केस में गिरफ्तार किया जा चुका है।
ATS सूत्रों के मुताबिक, मोहम्मद आरिफ कानपुर से फरार होने की तैयारी में था लेकिन उससे पहले छापेमारी कर उसे पकड़ा गया। फिलहाल उसे लखनऊ लाकर पूछताछ की जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि धमाके के अगले दिन वह कुछ ऐसे लोगों के संपर्क में था, जो डॉ. शाहीन शाहिद और डॉ. परवेज अंसारी से लगातार जुड़े हुए थे। इन्हीं कॉल रिकॉर्ड्स और डिजिटल ट्रेल से ATS को आरिफ तक पहुंचने में मदद मिली।
यह लोग आपस में संपर्क रखने के लिए बेहद पुराना तरीका अपनाते थे। सूत्रों के मुताबिक जांच में कई और नाम सामने आ सकते हैं। दरअसल यह लोग आपस में संपर्क रखने के लिए एक मेल आईडी का प्रयोग करते थे। आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए यह बेहद पुराना और प्रचलित तरीका है। सूत्रों की मानें तो इन लोगों ने एक मेल आईडी बनाई थी जिसका पासवर्ड सभी के पास था। ऐसे में सभी उस मेल आईडी में आए संदेश को पढ़ लेते थे और फिर उसे डिलीट भी कर देते थे। ऐसे में न तो कोई मैसेज कहीं आता था और न जाता था। इसी आधार पर आतंक फैलाने वाला यह डाक्टर गैंग काम करता था।
बता दें कि गिरफ्तार आरोपी डॉ. परवेज अंसारी, लखनऊ का रहने वाला है और डॉ. शाहीन शाहिद का छोटा भाई है। दोनों पर लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 पर हुए धमाके की साजिश में अहम भूमिका निभाने का आरोप है। पूछताछ के दौरान परवेज ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां दीं, जिनके आधार पर मोहम्मद आरिफ तक पहुंचा गया। दिल्ली विस्फोट में कानपुर कनेक्शन खंगाल रही जांच एजेंसियों ने देर रात कानपुर से एक डाक्टर को उठा लिया। डाक्टर से पहले यहां पूछताछ की गई, उसके बाद अधिकारी उसे अपने साथ लखनऊ ले गए। डॉ. शाहीन से पूछताछ के बाद जांच एजेंसियों ने यह कार्रवाई की है। यह लोग आपस में संपर्क रखने के लिए बेहद पुराना तरीका अपनाते थे। जांच में कई और नाम सामने आने की बात सूत्र बता रहे हैं।
डॉ. शाहीन की डाक्टर गैंग का नेटवर्क धीरे-धीरे सामने आ रहा है। कानपुर से देर रात जांच एजेंसियों ने कार्डियोलॉजी से डॉ. आरिफ को उठा लिया। डॉ. शाहीन और डॉ. मुज्जमिल से मिली जानकारी के बाद यह कार्रवाई की गई है। दरअसल यह लोग आपस में संपर्क रखने के लिए एक मेल आईडी का प्रयोग करते थे। आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए यह बेहद पुराना और प्रचलित तरीका है। सूत्रों की माने तो इन लोगों ने एक मेल आईडी बनाई थी जिसका पासवर्ड सभी के पास था। ऐसे में सभी उस मेल आईडी में आए आंतक के संदेश को पढ़ लेते थे और फिर उसे डिलीट भी कर देते थे। ऐसे में न तो कोई मैसेज कहीं आता था और न जाता था। इसी आधार पर आतंक फैलाने वाला यह डाक्टर गैंग काम करता था। डाक्टर जैसे सम्मानित पेशे से जुड़े होने के चलते इन पर कोई जल्दी शक भी नहीं करता था और यह लोग आसानी से अपना काम अंजाम दे रहे थे।
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अधिकारियों ने बताया कि सोमवार शाम लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर-1 के पास ट्रैफिक सिग्नल पर धीमी गति से चल रही कार में धमाका हुआ था। इस धमाके में 12 लोगों की मौत हो गई जबकि 20 अन्य घायल हो गए। इस मामले में डॉक्टर उमर उन नबी का DNA सैंपल उसकी मां और भाई से मैच हो गया है। इससे साफ हो गया है कि धमाके के समय गाड़ी उमर ही चला रहा था।
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