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अमित शाह ने पूर्वोत्तर राज्यों में तीन नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन पर की समीक्षा बैठक; जानिए खास बातें

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज असम के गुवाहाटी में पूर्वोत्तर राज्यों में तीन नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन पर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। गृह मंत्री ने कहा कि नॉर्थईस्ट के राज्यों में पुलिस का ज्यादा ध्यान जनता के अधिकारों को सुनिश्चित करने पर हो। उन्होंने ये भी कहा कि पूर्वोत्तर के सभी राज्य नए आपराधिक कानूनों पर शत-प्रतिशत पुलिसकर्मियों का प्रशिक्षण सुनिश्चित करें।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज असम के गुवाहाटी में पूर्वोत्तर राज्यों में तीन नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन पर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज असम के गुवाहाटी में पूर्वोत्तर राज्यों में तीन नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन पर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। गृह मंत्री ने असम के आपराधिक जांच विभाग (CID) द्वारा तैयार की गई पुस्तक ‘New Criminal Laws: Standard Operating Procedures and Rules’ का विमोचन भी किया।

पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्री इस बैठक में हुए शामिल

बैठक में पुलिस, जेल, कोर्ट, अभियोजन और फॉरेन्सिक से संबंधित विभिन्न नए प्रावधानों के पूर्वोत्तर राज्यों में कार्यान्वयन और वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक में असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिज़ोरम, नगालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम के मुख्यमंत्री तथा मणिपुर के राज्यपाल शामिल हुए।

केन्द्रीय गृह सचिव, पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक, पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPRD) के महानिदेशक, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के निदेशक और केन्द्रीय गृह मंत्रालय और राज्य सरकारों के अनेक वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।

'अपराधों के खिलाफ बिना देरी के रिपोर्ट दर्ज कराना ज़रूरी'

बैठक के दौरान अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार, नॉर्थईस्ट की जनता को त्वरित न्याय और पारदर्शी न्याय प्रणाली प्रदान करने के प्रति कटिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कानून और व्यवस्था को मज़बूत करने के लिए अपराधों के खिलाफ बिना देरी के रिपोर्ट दर्ज कराना ज़रूरी है।

अमित शाह ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों पर अमल की दिशा में पूर्वोत्तर राज्यों को और अधिक काम करने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों पर पूरी तरह अमल होने के बाद इस क्षेत्र में कानून और व्यवस्था की स्थिति में आमूलचूल परिवर्तन आएगा और किसी बी मामले में एफआईआर दर्ज होने के 3 साल के अंदर सुप्रीम कोर्ट तक न्याय मिल सकेगा।

आतंकवाद, मॉब लिंचिंग और संगठित अपराध पर क्या बोले शाह?

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आतंकवाद, मॉब लिंचिंग और संगठित अपराध के मामले दर्ज करने में किसी भी प्रकार का राजनीतिक दखल नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के सभी राज्य नए आपराधिक कानूनों पर शत-प्रतिशत पुलिसकर्मियों का प्रशिक्षण सुनिश्चित करें।

अमित शाह ने पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों से हर माह कानूनों के अमल पर समीक्षा बैठक करने का अनुरोध किया। उन्होंने राज्यों के पुलिस महानिदेशकों और मुख्य सचिवों से भी हर 15 दिन में इस पर समीक्षा बैठक करने को कहा।

ई-साक्ष्य को जल्द से जल्द लागू करने की ज़रूरत पर दिया जोर

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रशासन को ज़मीनी स्तर तक पहुंचना चाहिए और पुलिस स्टेशन को लोगों को न्याय दिलाने का स्थान बनना चाहिए और यह तभी संभव है जब तीनों कानूनों पर शत-प्रतिशत अमल हो। उन्होंने असम सरकार को 60-90 दिनों की निर्धारित समयसीमा के अंदर 66 प्रतिशत मामलों में आरोपपत्र दाखिल करने को सुनिश्चित करने पर बधाई दी और कहा कि बाकी सभी राज्यों को भी इसका अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस दिशा में प्रगति की निरंतर मॉनिटरिंग होनी चाहिए। गृह मंत्री ने ई-साक्ष्य को जल्द से जल्द लागू करने की ज़रूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जब तक हमारे पास पर्याप्त साइंटिफिक ऑफिसर्स नहीं होंगे तब तक एफएसएल की दृष्टि से पूरी तरह संतोषजनक आरोपपत्र दाखिल नहीं कर सकेंगे। उन्होंने ट्रायल इन एब्सेंशिया के प्रावधान का उपयोग करने को कहा जिससे भगोड़े अपराधियों को देश वापिस लाने में मदद मिलेगी।

अमित शाह ने कहा कि डायरेक्टर ऑफ प्रॉसीक्यूशन को जितना ताकतवर बनाएंगे उतना ही लोगों को न्याय दिलाने में हमें आसानी होगी। उन्होंने कहा कि नॉर्थईस्ट में लंबे समय तक उग्रवाद के कारण पुलिस का पूरा ध्यान इसके खिलाफ लड़ने में था, लेकिन अब इस क्षेत्र में उग्रवाद लगभग समाप्ति की ओर है। उन्होंने कहा कि अब पुलिस का ध्यान लोगों के शरीर, संपत्ति और सम्मान की रक्षा की ओर होना चाहिए। शाह ने कहा कि मोदी सरकार लगभग पौने 4 साल लंबे और विस्तृत विचार विमर्श के बाद ये तीनों कानून लाई है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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