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Mathura: श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद में हिंदू पक्ष की बड़ी जीत, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने खारिज की मुस्लिम पक्ष की याचिका

Mathura News: मथुरा के शाही ईदगाह मस्जिद और श्री कृष्ण जन्मभूमि विवाद मामले में आज (1 अगस्त, 2024 को) इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला आ गया है। अदालत 18 में से 15 याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया, जिसे दो महीने पहले सुरक्षित रख लिया था। आपको बताते हैं, ये पूरा विवाद क्या है।

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मथुरा मंदिर-मस्जिद विवाद पर हाईकोर्ट का फैसला।

Allahabad High Court On Mathura Vivad: इलाहाबाद हाईकोर्ट से हिंदू पक्ष को बड़ी जीत मिली है। अदालत ने मुस्लिम पक्ष की याचिका को खारिज कर दी। मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर बने मंदिर को तीन बार तोड़ा गया और चार बार बनवाया जा चुका है। गुजरात के सोमनाथ मंदिर की तरह आक्रमणकारी महमूद गजनवी ने इसे भी लूटकर तुड़वा दिया था। दो पक्षों के बीच इस स्थान के मालिकाना हक को लेकर सालों पुराना विवाद अदालत में चल रहा है। इस बीच शाही ईदगाह मस्जिद और कृष्ण जन्मभूमि के विवाद को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है।

मथुरा विवाद पर आ गया हाईकोर्ट का फैसला

श्री कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद मामले में हिंदू पक्ष की बड़ी जीत हुई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन की एकल पीठ ने शाही ईदगाह मस्जिद ट्रस्ट के आर्डर 7, R-11 का आवेदन खारिज किया। हिंदू पक्ष का सिविल सूट पोषणीय है। अदालत ने कहा है कि हिंदू पक्ष के सभी 18 वाद पोषणीय हैं, इस मामले में अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी।

मामले में अधिवक्ता विष्णु जैन ने क्या कहा?

कृष्ण जन्मभूमि मामले पर अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा है कि यह कानूनी प्रक्रिया है और कोर्ट ने यह कहा है। ऐसा 4 साल बाद हुआ है। जैन ने ये भी बताया कि 25 दिसंबर 2020 को मैंने इस मामले में मथुरा सिविल कोर्ट में पहला सिविल मुकदमा दायर किया था। आज इलाहाबाद कोर्ट ने इस मामले पर अपना आदेश सुना दिया है। शाही ईदगाह मस्जिद का दावा है कि कृष्ण जन्मभूमि के लिए हमने जो याचिका दायर की है, वह लागू नहीं होती... हमने अपनी बात रखी है कि पूजा स्थल अधिनियम यहां लागू नहीं होगा, क्योंकि यह एएसआई संरक्षित स्मारक है।"

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इससे पहले मथुरा विवाद को लेकर दाखिल 18 में से 15 याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने अपने फैसले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज की।

याचिकाओं में हिंदू पक्ष की और से की गई मांग

हिंदू और मुस्लिम पक्ष की दीवानी मुकदमों की पोषणीयता को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आज अपना फैसला सुना दिया है। इसी साल 31 मई को जस्टिस मयंक कुमार जैन की सिंगल बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। हिंदू पक्ष की ओर से जो 18 याचिकाएं दाखिल की गई, उनमें ये मांग की गई है कि मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद को श्री कृष्ण जन्म स्थान बताकर उसे हिंदुओं को सौंप दिया जाए।

याचिका में ये भी मांग की गई है कि हिंदुओं को विवादित परिसर में पूजा अर्चना की अनुमति दी जाए, साथ ही विवादित परिसर का अयोध्या के राम मंदिर और वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर सर्वेक्षण कराया जाए। आपको बताते हैं कि अदालत का फैसला कितना अहम है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला क्यों है अहम?

मथुरा के मंदिर मस्जिद विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले की अहमियत इस बात से समझी जा सकती है कि हाईकोर्ट से आए के फैसले से ही यह तय हो गया कि हिंदू पक्ष की याचिकाएं सुनवाई के योग्य हैं या नहीं। मुस्लिम पक्ष की आपत्ति खारिज को अदालत ने खारिज कर दिया है, मतलब साफ है कि हिंदू पक्ष की याचिकाओं पर आगे की सुनवाई हो सकेगी। कयास लगाए जा रहे हैं कि हाईकोर्ट से झटका लगने के बाद अब मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगा।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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