देश

'हर्ष फायरिंग के लिए नहीं कर सकते लाइसेंसी हथियार से फायरिंग'; इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि लाइसेंसी हथियार का उपयोग विवाह समारोहों या धार्मिक आयोजनों में हर्ष फायरिंग के लिए नहीं किया जा सकता।अदालत ने यह भी कहा कि प्रत्येक लाइसेंसधारक का दायित्व है कि वह खरीदे और इस्तेमाल किए गए गोला-बारूद का समुचित रिकॉर्ड रखे।

Image

इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि लाइसेंसी हथियार का इस्तेमाल शादी-विवाह, धार्मिक आयोजनों या किसी भी प्रकार की हर्ष फायरिंग के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि शस्त्र लाइसेंस कोई मौलिक अधिकार नहीं, बल्कि एक विशेषाधिकार है, जिसके साथ कानून और लाइसेंस की सभी शर्तों का पालन करना अनिवार्य होता है।न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका को खारिज करते हुए की, जिसमें एक व्यक्ति ने अपना शस्त्र लाइसेंस रद्द किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी।

767 कारतूसों का नहीं दे सके हिसाब

मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता अखिलेश कुमार को वर्ष 2000 में शस्त्र लाइसेंस जारी किया गया था। वर्ष 2019 में निरीक्षण के दौरान प्रशासन ने उनसे खरीदे और इस्तेमाल किए गए कारतूसों का रिकॉर्ड मांगा। जांच में सामने आया कि उन्होंने वर्षों के दौरान 857 कारतूस खरीदे थे, लेकिन अधिकारियों के सामने केवल 57 कारतूस और 33 खाली खोखे ही प्रस्तुत कर सके। जब शेष 767 कारतूसों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उनका उपयोग निशानेबाजी, शादी समारोहों और छठ पूजा तथा दुर्गा पूजा जैसे धार्मिक आयोजनों के दौरान किया गया।

अदालत ने खारिज की दलील

याचिकाकर्ता ने अदालत में तर्क दिया कि जब उन्हें वर्ष 2000 में लाइसेंस मिला था, उस समय इस्तेमाल किए गए कारतूसों का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य नहीं था। हालांकि हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि शस्त्र अधिनियम के तहत लाइसेंस की सभी नियामकीय शर्तें उसका अभिन्न हिस्सा हैं और प्रत्येक लाइसेंसधारक पर खरीदे तथा उपयोग किए गए गोला-बारूद का समुचित रिकॉर्ड रखने की जिम्मेदारी होती है।

'हर्ष फायरिंग कानून के अनुरूप नहीं'

अपने फैसले में अदालत ने स्पष्ट कहा कि किसी भी लाइसेंसधारक को विवाह समारोहों या धार्मिक आयोजनों में हर्ष फायरिंग के लिए हथियार इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस प्रकार का उपयोग कानून और लाइसेंस की शर्तों के विपरीत है। इसी आधार पर अदालत ने लाइसेंसिंग प्राधिकारी और अपीलीय प्राधिकारी द्वारा शस्त्र अधिनियम की धारा 17 के तहत लाइसेंस रद्द करने के आदेश को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।
Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

और पढ़ें
End of Article
Subscribe to our daily Newsletter!