पश्चिम एशिया में चल रहे ईरान युद्ध को अब आतंकी संगठन अपने प्रचार के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने लगे हैं। खुफिया एजेंसियों के मुताबिक अलकायदा इन द सबकॉन्टिनेंट (AQIS) इस युद्ध को आधार बनाकर जम्मू-कश्मीर के युवाओं को भड़काने और आतंकवादी संगठनों में भर्ती बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि AQIS अपने प्रचार तंत्र के जरिए यह नैरेटिव गढ़ रहा है कि इस्लाम के खिलाफ एक वैश्विक साजिश चल रही है। इसी प्रचार के माध्यम से कश्मीर को जिहाद का मुख्य केंद्र बनाने की बात कही जा रही है।
कई देशों को बताया ‘इस्लाम का दुश्मन’
खुफिया सूत्रों के अनुसार AQIS ने अपने प्रचार में भारत, अमेरिका, इजरायल, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और स्पेन जैसे देशों को इस्लाम का साझा विरोधी बताया है। संगठन ने जम्मू-कश्मीर के युवाओं से एकजुट होकर इन देशों के खिलाफ संघर्ष छेड़ने का आह्वान किया है।
उर्दू पत्रिका के जरिए फैलाया जा रहा प्रचार
आतंकी संगठन अपनी उर्दू प्रचार पत्रिका के मार्च अंक के माध्यम से यह संदेश फैला रहा है कि कश्मीर के युवाओं को विकास या आर्थिक प्रगति के बजाय धर्म को प्राथमिकता देनी चाहिए। पत्रिका में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद कश्मीर में बड़े पैमाने पर विरोध न होने पर भी नाराजगी जताई गई है।
2014 में बना था AQIS
इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी के अनुसार AQIS की स्थापना 2014 में हुई थी। इसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ाना और भारत में जिहाद का नेटवर्क फैलाना था। हालांकि स्थापना के बाद से संगठन को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला।
‘गजवा-ए-हिंद’ का जिक्र
प्रचार सामग्री में ‘गजवा-ए-हिंद’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि भारत के खिलाफ लड़ाई की शुरुआत कश्मीर से होनी चाहिए। इसमें तालिबान का उदाहरण भी दिया गया है, जिसने वैश्विक शक्तियों से लंबे समय तक संघर्ष किया। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि AQIS अब हताश होकर नए प्रचार तरीकों का सहारा ले रहा है। ईरान युद्ध को इस्लाम विरोधी अभियान के रूप में पेश कर वह कश्मीर में माहौल बदलने और युवाओं को हथियार उठाने के लिए प्रेरित करना चाहता है।
अनुच्छेद 370 का मुद्दा फिर उभारने की कोशिश
एक अन्य अधिकारी के अनुसार संगठन की रणनीति सिर्फ जम्मू-कश्मीर तक सीमित नहीं है। वह कश्मीर को आधार बनाकर पूरे भारत में कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने की योजना पर काम कर रहा है। खुफिया एजेंसियों के मुताबिक AQIS अनुच्छेद 370 के मुद्दे को दोबारा उछालकर अलगाववादी भावनाओं को हवा देने की कोशिश कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि 370 हटने के बाद घाटी में हिंसा रोकने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास किए गए थे।
पुराने आतंकी संगठनों को सक्रिय करने की कोशिश
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार कश्मीर में हमले करना पहले जितना आसान नहीं रहा है। ऐसे में हिजबुल मुजाहिदीन, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों को फिर से सक्रिय करने की कोशिशें की जा रही हैं। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि इतनी बड़ी योजना को जमीन पर उतारना आसान नहीं होगा, लेकिन आतंकी संगठनों की ओर से लगातार प्रचार के जरिए माहौल प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। इसी वजह से सुरक्षा एजेंसियां इन गतिविधियों पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं।
