Akhilesh Yadav : समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महाकुंभ में भगदड़ के लिए केंद्र एवं राज्य दोनों सरकारों को जिम्मेदार ठहराया है। अखिलेश ने गुरुवार को कहा कि महाकुंभ में भगदड़ की जो घटना हुई वह दुखद है, उसे नहीं होना चाहिए था लेकिन एक बात साफ है कि सरकार ने जितना प्रचार किया था, उतना इंतजाम उसने नहीं किया। अगर इंतजाम हुआ होता तो शायद इतने लोगों की मौत नहीं हुई होती। सपा नेता ने कहा कि महाकुंभ के आयोजन में केंद्र सरकार ने कितना सहयोग दिया, इसका ब्योरा उसे देना चाहिए।
लोग आस्था के चलते कुंभ आते हैं-अखिलेश
अखिलेश ने महाकुंभ के लिए वीआईपी निमंत्रण पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह पहली बार हुआ है जब महाकुंभ के लिए सरकार ने वीआईपी लोगों को न्योता दिया। उन्हें कार्ड भेजकर बुलाया। अब तक ऐसा नहीं होता था। लोग आस्था की वजह से कुंभ में आते हैं, उन्हें बुलाया नहीं जाता। सपा अध्यक्ष ने कहा कि अभी भी बहुत लोग लापता हैं। सरकार को मृतकों एवं लापता लोगों की सूची जारी करनी चाहिए। उन्होंने 25 लाख रुपए के मुआवजे को अपर्याप्त बताया।
घटना का असर नहीं, श्रद्धालुओं का आना जारी
मेला क्षेत्र में भगदड़ की घटना के एक दिन बाद प्रदेश सरकार ने भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास और तेज कर दिए। इस बीच, बृहस्पतिवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का मेला क्षेत्र में आना जारी है। बुधवार तड़के हुई भगदड़ की घटना का यहां आ रहे श्रद्धालुओं पर कोई खास असर दिखाई नहीं दे रहा। इस बीच, पुलिस अधीक्षक (यातायात) अंशुमान मिश्रा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि मेले में भीड़ कम होने तक वाहनों की आवाजाही पर रोक रहेगी।
गाड़ियों को शहर में प्रवेश की अनुमति नहीं
उन्होंने बताया कि इसके साथ ही जब तक भीड़ मेला क्षेत्र से बाहर नहीं निकल जाती, बाहर की गाड़ियों को शहर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी, हालांकि उच्च स्तर पर अधिकारी स्थिति को देखकर वाहनों के प्रवेश की अनुमति दे सकते हैं। मिश्रा ने स्पष्ट किया कि पुलिस प्रशासन, एंबुलेंस, ‘सक्शन’ मशीन की गाड़ी आदि के प्रवेश को बनाए रखा जाएगा क्योंकि इनके बिना मेले का सुचारू संचालन नहीं हो सकेगा। घने कोहरे में कम दृश्यता के बीच महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग लगातार विभिन्न घाटों की तरफ जाते हुए दिखाई दिए। इनमें से कई श्रद्धालु कंबल ओढ़कर घाट की ओर जा रहे थे, जबकि कई लोग रास्ते में रुककर अलाव ताप कर ठंड से बचने का प्रयास कर रहे थे।
