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अखिलेश यादव ने किसे बताया दिल्ली के वाई-फाई का पासवर्ड? भड़के केशव प्रसाद मौर्य; जानें सारा माजरा

UP Politics: यूपी की सियासत में इन दिनों उठापटक का दौर सातवें आसमान पर है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भाजपा की चुटकी लेते हुए केशव प्रसाद को 'मोहरा' बताया है। जिसके बाद उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ने करारा जवाब दिया है। आपको बताते हैं कि किसने क्या कहा और आखिर माजरा क्या है।

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केशव प्रसाद मौर्य vs अखिलेश यादव

Akhilesh Yadav vs Keshav Prasad Maurya: क्या उत्तर प्रदेश की राजनीति में कोई बड़ा उलटफेर होने वाला है? भाजपा में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है, जिसे लेकर तमाम नेता अपने-अपने हिसाब से दावे कर रहे हैं। यूपी के पूर्व सीएम और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को “मोहरा” बताया है। उन्होंने कहा कि वह दिल्ली के वाई-फाई के पासवर्ड हैं। अखिलेश के इस तंज पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने पलटवार किया है।

केशव मौर्य ने अखिलेश यादव को दे दी ये सलाह

उन्होंने अखिलेश को नसीहत देते हुए कहा कि आप खुद कांग्रेस का मोहरा बन चुके हैं और भाजपा को लेकर किसी भी तरह की गलतफहमी न पालें। उन्होंने कहा कि अति पिछड़ों को निशाना बनाने, अपमान करने की जगह आप समाजवादी पार्टी को समाप्त होने से बचाने के लिए काम करें, उस पर ज्यादा ध्यान दें।

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 2027 में 2017 दोहारायेगी। कमल खिला है, खिलेगा और खिलता ही रहेगा।

'पिछड़ों और दलितों का कट्टर जन्मजात विरोधी'

सपा मुखिया अखिलेश यादव और इनका कुनबा पिछड़ों और दलितों का कट्टर जन्मजात विरोधी है। सपा का PDA बहुत बड़ा धोखा है। विदेशी शक्तियों के हाथों खेल रही कांग्रेस के मोहरा अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने से रोकने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में इन्होंने हर व्यवस्था हर विभाग को खराब करने का काम किया है। यह दावा करते थे कि मेडिकल कॉलेज बना रहे हैं। लेकिन, मेडिकल कॉलेज नहीं बना पाए। 13 मेडिकल कॉलेज को मान्यता नहीं मिली। अखिलेश यादव ने कहा कि जो मेडिकल कॉलेज हैं, उनकी स्थिति क्या है? गरीब को कहीं भी इलाज नहीं मिल रहा है। उत्तर प्रदेश में एक जिला अस्पताल नहीं बनाया गया। जहां पर दवाई, इलाज और इंतजाम मिल जाए गरीबों को।

'सबने पूछा कि यूपी को बजट में क्या मिला?'

अखिलेश ने आगे कहा कि यह तो अस्पताल की व्यवस्था है। साथ ही साथ कितना भ्रष्टाचार हुआ होगा, अब धीरे-धीरे इसकी पोल खुलने लगी है। यहां की सरकार ने यूपी को बर्बाद कर दिया है। जिस गांव में जितना काम करके हमने छोड़ दिया, उसके आगे काम हुआ ही नहीं। अभी लोकसभा में बजट पेश किया गया। हमसे सबने पूछा कि यूपी को बजट में क्या मिला। अखिलेश ने कहा कि बिहार को बजट में जो मिला है, क्या बिहार में इससे बाढ़ रूक जाएगी। अगर यूपी की बाढ़ नहीं रुकेगी तो बिहार की बाढ़ कैसे रुकेगी।

वहीं दूसरी ओर अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट “एक्स” से पोस्ट करते हुए लिखा कि 26 जुलाई को सपा के लखनऊ स्थित मुख्यालय में एक सादगीपूर्ण समारोह में ‘संविधान-मानस्तंभ’ की स्थापना की जाएगी, जिसमें भारत के संविधान की एक प्रति की स्थापना होगी, जिससे ‘पीडीए-प्रकाशस्तंभ’ के रूप में ‘भारत का संविधान’ हमारे सामाजिक न्याय का मार्ग सदैव प्रकाशित और प्रशस्त करता रहे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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