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अजित पवार अपने विभाग से खुश हैं या नहीं? मंत्रियों के विभाग आवंटन पर आखिर क्यों कह दी ऐसी बात; जिससे उठेंगे सवाल

Maharashtra Politics: क्या देवेंद्र फडणवीस की सरकार में बने मंत्रियों अपने विभागों को लेकर नाराज हैं? ये सवाल इसलिए खड़े हो रहे हैं, क्योंकि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने विभागों के बंटवारे पर बड़ा दावा किया है। पवार ने मंत्रियों को विभाग आवंटन पर कहा कि जाहिर है, कुछ लोग नाखुश हैं।

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अजित पवार ने कहा- कुछ मंत्री नाखुश हैं।

Ajit Pawar's Big Claim: महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार में कौन-कौन से मंत्री नाराज है? क्या इस लिस्ट में एकनाथ शिंदे का नाम भी शामिल है? आखिर अजित पवार ने ऐसा दावा क्यों कर दिया कि देवेंद्र फडणवीस सरकार में बने कुछ मंत्री अपने विभागों को लेकर नाराज हैं। दरअसल, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने राज्य मंत्रिपरिषद में मंत्रियों की अधिक संख्या और उनमें से प्रत्येक को विभाग आवंटित करने की ‘‘सीमा’’ को स्वीकार करते हुए रविवार को कहा कि कुछ सदस्य स्वाभाविक रूप से खुश नहीं हैं।

अजित पवार का दावा- कुछ लोग खुश हैं और कुछ नहीं

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा विभागों का आवंटन किए जाने के एक दिन बाद अजित पवार ने कहा कि लंबित परियोजनाओं पर काम जल्द ही शुरू हो जाएगा। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख ने अपने निर्वाचन क्षेत्र बारामती में एक रोड शो का नेतृत्व किया और अभिनंदन कार्यक्रमों में भाग लिया। पवार ने एक कार्यक्रम में कहा, ‘‘चूंकि मंत्रियों की संख्या अधिक है, इसलिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को प्रत्येक मंत्री को एक विभाग देना ही था। जाहिर है, कुछ लोग खुश हैं और कुछ नहीं।’’

उन्होंने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल में केवल छह राज्य मंत्री शामिल हैं, जबकि बाकी 36 कैबिनेट मंत्री हैं। वित्त मंत्रालय को बरकरार रखने वाले पवार ने कहा कि वह सोमवार को कार्यभार संभालेंगे।

'हमें कुछ समय दीजिए, हर काम पूरा हो जाएगा'

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि 20 नवंबर को महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के लिए आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद कई परियोजनाओं पर काम अस्थायी रूप से रोकना पड़ा था। चुनाव के नतीजे 23 नवंबर को घोषित किए गए थे। अजित पवार ने कहा, ‘‘हमें लंबित परियोजनाओं के बारे में कई पत्र मिले हैं। हमें कुछ समय दीजिए, हर काम पूरा हो जाएगा।’’

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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