Air Pollution Debate In Parliament: दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की स्थिति भयावह बनी हुई है। देश की राजधानी के अलावा अन्य कई राज्यों में भी बढ़ते प्रदूषण की वजह से लोगों का हाल बेहाल है। इसी बीच संसद के दोनों सदनों में आज वायु प्रदूषण को लेकर चर्चा होगी। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव शाम 5 बजे लोकसभा में सवालों, आपत्तियों और सुझाव पर जवाब देंगे।
बता दें कि संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष प्रदूषण पर चर्चा की मांग कर रहा है। कई सांसदों ने अभी तक प्रदूषण से निपटनो को लेकर सरकार के प्लान को लेकर सवाल पूछे हैं।
सरकार ने चर्चा पर जताई सहमति
कुछ दिनों पहले लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रदूषण का मुद्दा उठाया था। उन्होंने वायु प्रदूषण को राष्ट्रीय आपदा बताते हुए इस पर विस्तार से चर्चा की मांग की थी। सत्ता पक्ष ने भी बिना किसी टकराव के गंभीरता से लेते हुए चर्चा पर सहमति जताई थी।
राहुल गांधी ने सदन में उठाया प्रदूषण का मुद्दा
राहुल ने शून्यकाल के दौरान कहा कि दिल्ली सहित देश के अधिकांश बड़े शहर जहरीली हवा की चपेट में हैं। लाखों बच्चे फेफड़ों की बीमारियों से जूझ रहे हैं। कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। बुजुर्गों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कोई वैचारिक या राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि देश के भविष्य और करोड़ों नागरिकों की सेहत से जुड़ा सवाल है।
इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी की बात को जवाब देते हुए कहा था कि सरकार शुरू से ही साफ थी वह इस मुद्दे पर चर्चा करने और समाधान खोजने के लिए तैयार है।
वायु प्रदूषण एक बड़ी समस्या है: पर्यावरण मंत्री
बता दें कि संसद में चर्चा के दौरान डीएमके सदस्य डॉ. कनिमोझी एनवीएम सोमू ने पूछा कि क्या सरकार गंभीर रूप से प्रदूषित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर एयर प्यूरिफायर के लिए धन आवंटित कर रही है। चर्चा का जवाब देते हुए पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने स्थिति की गंभीरता को स्वीकार किया और कहा कि वायु प्रदूषण एक बड़ी समस्या है। मैं इस बात से सहमत हूं।
दफ्तरों में हाइब्रिड मोड अनिवार्य
दिल्ली के श्रम मंत्री कपिल मिश्रा ने साफ किया है कि सरकारी और निजी, दोनों तरह के संस्थानों को वर्क फ्रॉम होम अपनाना होगा। आदेश के मुताबिक किसी भी निजी कार्यालय में 50 फीसदी से ज्यादा कर्मचारी फिजिकल मोड में काम नहीं करेंगे, बाकी कर्मचारियों को घर से काम करना अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
किन कर्मचारियों को नहीं मिलेगा वर्क फ्रॉम होम?
वर्क फ्रॉम होम के इस आदेश में आपातकालीन और फ्रंटलाइन वर्कर्स को शामिल नहीं किया गया है। इसमें अस्पतालों में काम करने वाले कर्मचारी, फायर डिपार्टमेंट, एयर पॉल्यूशन कंट्रोल से जुड़े विभाग और अन्य जरूरी सेवाएं शामिल हैं। इसके अलावा पब्लिक और प्राइवेट हेल्थ सर्विस, ट्रांसपोर्ट और सैनिटेशन से जुड़े विभाग सामान्य रूप से काम करते रहेंगे।
