Rajasthan Assembly Elections 2023: राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) अपने लिए सियासी जमीन तलाश रही है। इस बात के संकेत शनिवार (11 मार्च, 2023) को एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने खुद दिए। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को सिर्फ सेक्युलरिज्म (धर्मनिरपेक्षता) का कुली बनाकर रख दिया गया है, मगर उनकी पार्टी सूबे में सियासी विकल्प देना चाहती है।
अपने एक दिन के जोधपुर दौरे पर ओवैसी ने मुस्लिमों से न्याय हासिल करने के लिए सियासत में हिस्सा लेने की अपील भी की। मीडिया के सामने वह दो टूक बोले- मुस्लिम महज वोट देते हैं। कई बाकी समुदायों जैसे जाट, राजपूत और गुर्जर आदि की तरह वे वोट नहीं लेते। इन समुदायों ने न सिर्फ वोट दिए हैं बल्कि वोट लिए भी हैं। मुस्लिमों के विपरीत अपनी कई समस्याओं को हल किया है।
उन्होंने जोर देते हुए आगे कहा कि मुस्लिमों को ऐसे समुदायों से सीखने और अपना खुद का नेतृत्व बनाने की जरूरत है। ओवैसी के अनुसार, ‘‘लोकतंत्र केवल अपना वोट डालने के बारे में नहीं है। आपको इसमें भाग लेने की भी जरूरत होती है, तभी आप अपने लिए कुछ कर पाएंगे।’’ एआईएमआईएम प्रमुख ने बताया, हम राजस्थान को राजनीतिक विकल्प देना चाहते हैं। यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस बारी-बारी सत्ता में आती रही हैं। सुनें, ओवैसी ने और क्या कहा?:
ओवैसी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने सूबे के मुसलमानों को निराश किया है। वह बोले, ‘‘गहलोत और राजस्थान के बाकी मुस्लिम विधायक पीड़ितों के परिवारों से क्यों नहीं मिले?...वे ऐसा फौरन कर सकते थे। सीएम को उनसे मिलने में काफी समय लग गया और वह भी तब किया जब हमने उनकी निंदा की थी।’’
उन्होंने इसके साथ ही हरियाणा में गोरक्षकों की ओर से जुनैद और नसीर नाम के युवकों की हत्या का जिक्र भी छेड़ा। आरोप लगाते हुए कहा- मोनू और बाकी सभी आरोपी आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) समर्थित हैं। मोनू आरएसएस का प्रिय है, इसलिए उसके खिलाफ कार्रवाई का कोई सवाल ही नहीं है। हरियाणा की भाजपा सरकार उसके खिलाफ कैसे कार्रवाई कर सकती है।
