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Pasmanda Muslim: 'आपके टोपी पहनने से ही खुश रहें?'...पसमांदा मुस्लिमों को लेकर ओवैसी ने पीएम मोदी-कांग्रेस पर साधा निशाना

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 1, 2023, 10:32 AM IST

Pasmanda Muslims: AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने लिखा, पीएम मोदी ने कहा है कि मुसलमानों का एक वर्ग पसमांदा मुसलमानों को आगे नहीं बढ़ने दे रहा है। जबकि, सच्चाई यह है कि सभी मुस्लिम गरीब हैं। ऊंची जाति के मुसलमान तो ओबीसी हिंदुओं से भी गरीब हैं।

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असदुद्दीन ओवैसी

Photo : BCCL

Pasmanda Muslims: भोपाल में पसमांदा मुसलमानों को लेकर पीएम मोदी के बयान के बाद राजनीति शुरू हो गई है। पीएम मोदी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए बयान दिया था कि उनके ही धर्म के एक वर्ग ने पसमांदा मुसलमानों का शोषण किया है। यह बयान पीएम मोदी ने समान नागरिक संहिता (UCC) के समर्थन में दिया था।

इसके बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने पसमांदा मुसलमानों को लेकर पीएम मोदी और कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधा है। ट्विटर पर प्रतिक्रिया देते हुए ओवैसी ने कहा, नरेंद्र मोदी पूरे देश के प्रधानमंत्री हैं, फिर उन्होंने अल्पसंख्यक कल्याण का बजट 40 फीसदी क्यों कम कर दिया। दरअसल, पीएम मोदी ने कहा था कि वोट बैंक की राजनीति करने वालों ने पसमांदा मुसलमानों का जीना मुहाल कर दिया है। वे तबाह हो गए हैं, उनको कोई लाभ नहीं मिला है। पसमांदा को आज भी बराबरी का हक नहीं मिलता है।

भाजपा ने दलित मुस्लिम के आरक्षण का विरोध किया

ट्विटर पर प्रतिक्रिया देते हुए ओवैसी ने लिखा, पीएम मोदी ने कहा है कि मुसलमानों का एक वर्ग पसमांदा मुसलमानों को आगे नहीं बढ़ने दे रहा है। जबकि, सच्चाई यह है कि सभी मुस्लिम गरीब हैं। ऊंची जाति के मुसलमान तो ओबीसी हिंदुओं से भी गरीब हैं। उन्होंने आगे कहा, उनकी ही सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दलित मुस्लिम के आरक्षण का विरोध किया। क्यों भाजपा ने पिछले मुस्लिमों के आरक्षण का विरोध किया, क्या वे इस सामाजिक अन्याय का दोष भी यूसीसी पर डोलेंगे?

कांग्रेस पर भी साधा निशाना

इस दौरान ओवैसी ने कांग्रेस व अन्य दलों पर भी निशाना साधा। ओवैसी ने ट्वीटों श्रृंखला में आगे लिखा, कांग्रेस और दूसरी सामाजिक न्याय वाली पार्टियां हमें बताएं कि क्या हमें हमारा उचित हिस्सा मिलेगा। या फिर हम इस बात पर ही खुश रहें कि आपके नेता ने इफ्तार में सिर पर टोपी पहनी थी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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