'AI मानव इतिहास का ट्रांसफॉर्मेशन है', एआई समिट में बोले PM मोदी; दिया 'डिजाइन एंड डेवलप इन इंडिया' का नारा
- Edited by: Piyush Kumar
- Updated Feb 19, 2026, 11:27 AM IST
India AI Impact Summit: इंडिया एआई इंपैक्ट समिट को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा है कि भारत हमेशा नई टेक्नोलॉजी को अपनाता है। एआई समिट से पूरी दुनिया में लोग आए हैं। इस समिट में यंग टैलेंट बड़ी संख्या में आए। हमारे युवा AI का स्वीकार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब पत्थरों से पहली बार स्पार्क लगा था तो किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही आगे चलकर सभ्यता बनेगी। पीएम मोदी ने कहा कि एआई को लेकर जो हम प्रिडिक्ट कर रहे हैं वो बस शुरुआत है।
पीएम मोदी ने इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 का उद्घाटन किया।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव इतिहास का एक ऐसा ही रूपांतरण है: प्रधानमंत्री
अगर हम सब मिलकर आगे बढ़ें, तो कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानवता की क्षमता को बढ़ाएगी: पीएम
India AI Impact Summit: नई दिल्ली में इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 का आज उद्घाटन हुआ। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य संबोधन दिया। पीएम मोदी ने कहा है कि भारत हमेशा नई टेक्नोलॉजी को अपनाता है। एआई समिट से पूरी दुनिया में लोग आए हैं। इस समिट में यंग टैलेंट बड़ी संख्या में आए। हमारे युवा AI का स्वीकार कर रहे हैं।
वहीं, इस समिट में पीएम मोदी ने 'डिजाइन एंड डेवलप इन इंडिया' का नारा भी दिया। पीएम मोदी का उद्देश्य है कि देश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को विकसित किया जाए और फिर जनकल्याण के लिए उसका इस्तेमाल हो सके।
प्रधानमंत्री मोदी ने एआई के भविष्य का जिक्र करते हुए कहा कि कहा कि जब पत्थरों से पहली बार स्पार्क लगा था तो किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही आगे चलकर सभ्यता बनेगी। पीएम मोदी ने कहा कि एआई को लेकर जो हम प्रिडिक्ट कर रहे हैं वो बस शुरुआत है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "जब पहली बार वायरलेस तरीके से सिग्नल भेजे गए थे, तब किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि एक दिन पूरी दुनिया वास्तविक समय में एक-दूसरे से जुड़ जाएगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव इतिहास का एक ऐसा ही रूपांतरण है। आज हम जो देख रहे हैं, जो हम भविष्यवाणी कर रहे हैं, वह तो इसके प्रभाव की बस शुरुआत है।"
मानवीय क्षमताओं को कई गुना बढ़ा रहा एआई: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "एआई मशीनों को बुद्धिमान बना रहा है, लेकिन उससे भी बढ़कर, यह मानवीय क्षमताओं को कई गुना बढ़ा रहा है। केवल एक ही अंतर है: इस बार गति अभूतपूर्व है और इसका पैमाना भी अप्रत्याशित है। पहले, प्रौद्योगिकी का प्रभाव दिखने में दशकों लग जाते थे। आज, मशीन लर्निंग से लेकर लर्निंग मशीनों तक का सफर पहले से कहीं अधिक तेज, गहरा और व्यापक है।"
पीएम मोदी ने एआई की ताकत का जिक्र करते हुए कहा कि एआई भी एक ट्रांसफॉर्मेटिव पावर है, दिशाहीन हुई तो डिसरप्शन सही दिशा मिली तो सोल्यूशन।
एआई को मशीन सेंट्रिक से ह्यूमन सेंट्रिक कैसे बनाए? संवेदनशील और उत्तरदायी कैसे बनाए? यही इस ग्लोबल एआई इम्पैक्ट समिट का मूल उद्देश्य है।
PM मोदी का ‘MANAV’ फ्रेमवर्क
पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए अप्रोच इस बात पर फ़ोकस होना चाहिए कि AI को AI-सेंट्रिक के बजाय ह्यूमन-सेंट्रिक कैसे बनाया जाए क्योंकि उन्होंने AI गवर्नेंस के लिए ‘MANAV’ फ्रेमवर्क पेश किया।
MANAV का क्या मतलब?
- M का मतलब है नैतिक और एथिकल सिस्टम।
- A का मतलब है जवाबदेह शासन।
- N का मतलब है राष्ट्रीय संप्रभुता।
- A का मतलब है सुलभ और समावेशी।
- V का मतलब है वैध और जायज।
एआई का मतलब सभी का कल्याण, सभी की खुशी: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "एआई एक परिवर्तनकारी शक्ति है। दिशाहीन होने पर यह व्यवधान उत्पन्न करती है; सही दिशा मिलने पर यह समाधान बन जाती है। एआई को मशीन-केंद्रित से मानव-केंद्रित कैसे बनाया जाए, इसे संवेदनशील और उत्तरदायी कैसे बनाया जाए, यही इस वैश्विक एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन का मूल उद्देश्य है। इस शिखर सम्मेलन का विषय स्पष्ट रूप से उस दृष्टिकोण को दर्शाता है जिससे भारत एआई को देखता है। सभी का कल्याण, सभी की खुशी। यही हमारा आदर्श है।"
कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानवता की क्षमता को बढ़ाएगी: पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा, "हमें कौशल विकास, पुनर्कौशल विकास और आजीवन सीखने को एक जन आंदोलन बनाना होगा। काम का भविष्य समावेशी, भरोसेमंद और मानव-केंद्रित होगा। अगर हम सब मिलकर आगे बढ़ें, तो कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानवता की क्षमता को बढ़ाएगी।"
हमें एआई को खुली छूट देनी चाहिए: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के लिए मनुष्य मात्र डेटा बिंदु हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि मनुष्य केवल कच्चा माल बनकर न रह जाएं, एआई का लोकतंत्रीकरण किया जाना चाहिए। इसे समावेशन और सशक्तिकरण का माध्यम बनाया जाना चाहिए, विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण में। हमें एआई को खुली छूट देनी चाहिए और साथ ही जीपीएस की तरह कमान अपने हाथों में रखनी चाहिए। जीपीएस हमें रास्ता दिखाता है, लेकिन हमें किस दिशा में जाना है, इसका अंतिम निर्णय हमारा होता है। आज हम एआई को जिस दिशा में ले जाएंगे, वही हमारा भविष्य निर्धारित करेगा।"
उन्होंने आगे कहा कि एआई एक परिवर्तनकारी शक्ति है। दिशाहीन होने पर यह व्यवधान उत्पन्न करती है; सही दिशा मिलने पर यह समाधान बन जाती है। एआई को मशीन-केंद्रित से मानव-केंद्रित कैसे बनाया जाए, इसे संवेदनशील और उत्तरदायी कैसे बनाया जाए, यही इस वैश्विक एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन का मूल उद्देश्य है। इस शिखर सम्मेलन का विषय स्पष्ट रूप से उस दृष्टिकोण को दर्शाता है जिससे भारत एआई को देखता है। सभी का कल्याण, सभी की खुशी। यही हमारा आदर्श है।
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