अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर हिंदू युवक बनकर मैट्रिमोनियल वेबसाइटों पर महिलाओं, खासकर विधवाओं को निशाना बनाता था और शादी का झांसा देकर उनसे पैसे ऐंठता था। गिरफ्तार आरोपी की पहचान मेहसाणा जिले के कड़ी निवासी करीम रफीकभाई सिपाई के रूप में हुई है। जॉइंट सीपी (क्राइम) शरद सिंघल के मुताबिक, आरोपी ने “आदित्य पटेल” नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाई थी और खुद को हिंदू समुदाय की महिलाओं का विश्वास जीतता था। वह दावा करता था कि उसकी पत्नी की मौत हो चुकी है और वह जीवनसाथी की तलाश में है।
बना रखे थे फर्जी दस्तावेज
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपनी पहचान को विश्वसनीय बनाने के लिए फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य दस्तावेज भी “आदित्य पटेल” के नाम से तैयार कर रखे थे। महिलाओं से नजदीकियां बढ़ाने के बाद वह शादी, कारोबार और बेहतर भविष्य के नाम पर उनसे पैसे मांगता था।

100 से अधिक महिलाओं को ठक चुका है करीम रफीकभाई।
100 से अधिक महिलाओं के मिले दस्तावेज
जांच में आरोपी के मोबाइल फोन से 100 से अधिक महिलाओं का डेटा, फोटो और पहचान संबंधी दस्तावेज मिले हैं। पुलिस का मानना है कि पीड़ित महिलाओं की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। हालांकि कई महिलाएं अपनी पहचान सार्वजनिक होने के डर से सामने नहीं आ रही हैं। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि किसी भी पीड़िता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
महिलाओं को कैसे फंसाता था?
क्राइम ब्रांच के मुताबिक, आरोपी बेरोजगार था और छोटे स्तर पर शेयर ट्रेडिंग करता था। महिलाओं को प्रभावित करने के लिए वह आलीशान बंगले, जमीन-जायदाद और संपन्न जीवनशैली की तस्वीरें भेजता था। शुरुआत में छोटे-मोटे उपहार भी भेजता था, ताकि सामने वाली महिला को लगे कि वह रिश्ते को लेकर गंभीर है। बाद में वह पैसों की जरूरत बताकर उनसे आर्थिक मदद मांगता था।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी पहचान बनाकर छल करने सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। फिलहाल एक महिला की शिकायत के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है, लेकिन पुलिस को आशंका है कि कई अन्य महिलाएं भी इस ठगी का शिकार हुई हैं।
महिलाओं का लाभ उठाना था आरोपी का उद्देश्य
धर्म परिवर्तन से जुड़े सवाल पर जॉइंट सीपी शरद सिंघल ने कहा कि अब तक जांच में ऐसा कोई पहलू सामने नहीं आया है। शुरुआती जांच में आरोपी का उद्देश्य महिलाओं का विश्वास जीतकर आर्थिक लाभ उठाना ही प्रतीत होता है।
पुलिस अब आरोपी का रिमांड लेकर यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि फर्जी दस्तावेज कहां और कैसे तैयार किए गए, इसमें और कौन-कौन लोग शामिल थे, तथा क्या किसी संगठित नेटवर्क की मदद से यह पूरा फर्जीवाड़ा चलाया जा रहा था। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि आरोपी ने कितनी महिलाओं को निशाना बनाया और उनसे कितनी रकम हासिल की।
