सीपीआई (एम) की पश्चिम बंगाल इकाई के सचिव मोहम्मद सलीम ने नवगठित जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर से मुलाकात की, जिससे आगामी विधानसभा चुनावों से पहले दोनों पार्टियों के बीच संभावित गठबंधन की अटकलें तेज हो गईं। सलीम ने कहा कि आगामी चुनावों में सीटों के बंटवारे के प्रस्ताव पर सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे में चर्चा की जाएगी। बुधवार को न्यू टाउन के एक होटल में कबीर के साथ उनकी एक घंटे लंबी बैठक हुई। कबीर तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक हैं और हाल ही में मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद की नींव रखने के मामले में विवादों में घिरे थे।
मुस्लिम नेताओं के इर्द-गिर्द सीपीआई (एम) की सियासी रणनीति
सलीम ने कहा, हम वाम मोर्चे में इस प्रस्ताव पर चर्चा करेंगे और उसके बाद मोर्चे से बाहर की वामपंथी पार्टियों से, फिर आईएसएफ से बात करेंगे। सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे ने 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव इंडियन सेकुलर फ्रंट (आईएसएफ) के साथ गठबंधन में लड़ा था, लेकिन वह चुनाव में अपना खाता भी नहीं खोल सका। आईएसएफ नेता नौशाद सिद्दीकी भाजपा के अलावा एकमात्र विपक्षी विधायक बने। कबीर से अपनी मुलाकात को लेकर सीपीआई (एम) नेता ने कहा कि कई पार्टियां ऐसी हैं जिन्होंने विधानसभा चुनावों के लिए सीट बंटवारे की व्यवस्था पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है।
कबीर की पार्टी से गठबंधन पर चर्चा
किसी भी गठबंधन पर चर्चा होने से इनकार करते हुए सलीम ने कहा, मैं उनसे जानना चाहता था कि वे क्या करना चाहते हैं और उनका उद्देश्य क्या है।
टीएमसी द्वारा निलंबित कबीर ने इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया, लेकिन कहा कि विधानसभा चुनावों के लिए संभावित गठबंधन पर चर्चा हुई। अपने बेबाक बयानों के कारण अक्सर विवादों में घिरे रहने वाले कबीर ने कहा, मैंने सलीम साहब से आग्रह किया है कि वे 15 फरवरी तक गठबंधन गठन की प्रक्रिया पूरी कर लें। चर्चा को फलदायी बताते हुए कबीर ने कहा कि उन्होंने सलीम से आईएसएफ नेतृत्व से गठबंधन के बारे में बात करने का अनुरोध किया है।
एआईएमआईएम से गठबंधन पर बातचीत करने की संभावना
कबीर ने यह भी कहा कि आगामी चुनावों के लिए उनकी पार्टी द्वारा एआईएमआईएम से गठबंधन पर बातचीत करने की संभावना है। उन्होंने कहा, हमारा लक्ष्य भ्रष्ट सरकार को हराना और राज्य की जनता को एक पारदर्शी सरकार देना है। तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि न तो सीपीआई (एम) और न ही नवगठित पार्टी को जनता का समर्थन हासिल है। उन्होंने कहा, सीपीआई(एम) राजनीतिक रूप से दिवालिया हो चुकी है। घोष ने दावा किया कि सीपीआई(एम), जिसने बंगाल में 34 वर्षों तक वाम मोर्चा सरकार का नेतृत्व किया, अब चुनाव पूर्व गठबंधन के लिए भीख का कटोरा लेकर घूम रही है।
