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ED दफ्तर घेरने जा रहे विपक्षी नेताओं को पुलिस ने रोका, अडानी मामले पर संसद से सड़क तक जोरदार हंगामा

  • Written by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 15, 2023, 02:19 PM IST

विपक्षी नेताओं ने संसद से ईडी दफ्तर तक के लिए मार्च निकाला। हालांकि, पुलिस ने उन्हें विजय चौक पर ही रोक दिया, जिसके बाद विपक्षी सांसदों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।

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प्रदर्शन के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे

Photo : ANI

Adani Issue: बजट सत्र के तीसरे दिन भी लोकसभा व राज्यसभा में विपक्षी नेताओं का हंगामा जारी रहा। विपक्ष लगातार अडानी मामले में संयुक्त संसदीय समिति की गठन की मांग कर रहा है। इस बीच बुधवार को सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद विपक्षी सांसदों ने ईडी दफ्तर के लिए मार्च निकाला और दफ्तर का घेराव करने की कोशिश की। हालांकि, पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया, जिसके बाद विपक्षी सांसद वापस संसद भवन लौट गए।

अडानी मामले को लेकर हंगामा

संसद में अडानी मामले पर जेपीसी के गठन की मांग करे विपक्ष ने बुधवार को मामले को ईडी के सामने उठाने की मांग की। विपक्षी सांसद ईडी निदेशालय को इस मामले में जांच शुरू करने के लिए ज्ञापन सौंपने के लिए निकले, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें विजय चौक के पास रोक दिया। इस बीच कुछ सांसदों ने आरोप लगाया कि सरकार अडानी मामले को ईडी के सामने उठाने से हमें रोक रही है।

खड़गे ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

इस बीच कांग्रेस अध्यक्षमल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, पुलिस और सरकार हमें मार्च करने और अडानी मामले को ईडी के सामने उठाने से रोक रही है। उन्होंने कहा, हमें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है। उन्होंने बताया, पुलिस ने कहा कि विपक्षी सांसद आगे नहीं बढ़ सकते क्योंकि इलाके में सीआरपीसी की धारा 144 लागू है। खड़गे ने कहा, करीब 18 दलों के विपक्षी सांसद इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय को एक ज्ञापन सौंपना चाहते हैं।

वहीं संजय राउत ने कहा, हमें आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता, हम आगे बढ़ना जारी रखेंगे।

टीएमसी व एनसीपी ने प्रदर्शन से बनाई दूरी

संसद के बजट सत्र के दौरान विपक्षी एकता की कलई भी खुलने लगी है। दअरसल, बुधवार को विपक्ष द्वारा निकाले गए विरोध मार्च में टीएमसी और एनसीपी जैसे दलों ने हिस्सा नहीं लिया, दोनों ही दल इससे दूर रहे। इससे पहले मंगलवार को भी तीन विपक्षी दलों ने अलग- अलग प्रदर्शन किया था।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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