टीएमसी से नेताओं और सांसदों के पलायन के बीच अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने अपील की है कि तृणमूल कांग्रेस के किसी भी कथित अलग समूह/गुट को कोई मान्यता, दर्जा या सुविधा न दें। लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में अभिषेक बनर्जी ने यह भी कहा है कि इस संबंध में किसी भी निर्णय से पहले तृणमूल कांग्रेस को अपनी बात रखने का मौका दें। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब पार्टी के बागी सांसद स्पीकर से मुलाकात करने पहुंचे हैं। दावा है कि वे यहां खुद को अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता देने की मांग करने वाले हैं।
ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस को सदन में माना जाए एक ही दल
अभिषेक बनर्जी ने अपने पत्र में कहा कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) को सदन में एक ही राजनीतिक दल के रूप में माना जाए,जिसका प्रतिनिधित्व केवल पार्टी के अधिकृत नेता और व्हिप के माध्यम से होता है। उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि यदि बागी सांसदों की ओर से कोई दावा या आवेदन प्राप्त होता है, तो उस पर निर्णय लेने से पहले पार्टी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।
दल-बदल कानून का दिया हवाला
उन्होंने पत्र में स्पष्ट किया कि दल-बदल कानून के तहत किसी भी विलय के दावे को वैध मानने के लिए दो शर्तें पूरी होना आवश्यक हैं- इनमें पहली है कि मूल राजनीतिक दल का विलय और दूसरी, कम-से-कम दो-तिहाई विधायकों या सांसदों का समर्थन। केवल एक शर्त पूरी होने से कानूनी मान्यता नहीं मिल सकती।
अभिषेक बनर्जी ने अपने पत्र में यह भी कहा कि यदि कोई सांसद संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) का उल्लंघन करता है, तो तृणमूल कांग्रेस उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखती है।
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बागी खेमे का है ये दावा
वहीं, दूसरी ओर, बागी खेमे का दावा है कि उसके पास लोकसभा में पार्टी के अधिकांश सांसदों का समर्थन है। बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कोलकाता में हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जल्द ही दो और सांसद उनके साथ जुड़ सकते हैं, जिससे उनके गुट की संख्या 22 हो जाएगी।
गौरतलब है कि हालिया पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद टीएमसी में असंतोष बढ़ गया है। हाल ही में पार्टी के 80 में से 64 विधायकों ने अलग होकर विधानसभा अध्यक्ष से पृथक विधायी समूह के रूप में मान्यता प्राप्त कर ली थी। इस फैसले को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है। वहीं, ऐसा ही कुछ पश्चिम बंगाल विधानसभा के बाद अब संसद में देखा जा रहा है। यहां भी टीएमसी के 20 से ज्यादा सांसदों ने बागी रुख अख्तियार कर लिया है।
