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Raghav Chadha Return: आखिरकार भारत वापस लौटे राघव चड्ढा, सुबह-सुबह पहुंचे अरविंद केजरीवाल के घर

Raghav Chadha Return: आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद व वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा भारत वापस लौट आए हैं। वह शनिवार सुबह अरविंद केजरीवाल से मिलने उनके घर पहुंचे। वह ऐसे समय पर लौटे हैं, जब कुछ दिन बाद ही दिल्ली में लोकसभा चुनाव होने हैं। 25 मई को मतदान से पहले राघव चड्ढा चुनाव प्रचार में जुट सकते हैं।

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भारत वापस लौटे राघव चड्ढा

Raghav Chadha Return: आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद व वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा भारत वापस लौट आए हैं। वह शनिवार सुबह अरविंद केजरीवाल से मिलने उनके घर पहुंचे। बता दें, राघव चड्ढा बीते कई महीनों से विदेश में थे। जानकारी के मुताबिक, वह यूके में अपनी आंखों का इलाज करा रहे थे। लोकसभा चुनाव और अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद आप नेता राघव चड्ढा की गैरमौजूदगी पर कई सवाल भी खड़े हो रहे थे। हालांकि, आम आदमी पार्टी इस मसले पर चुप रही।

राघव चड्ढा की चुनाव के बीच अनुपस्थिति को लेकर उठ रहे सवालों पर आप नेता सौरभ भारद्वाज की ओर से जानकारी दी गई थी कि राघव चड्ढा आंखों की जटिल समस्या से जूझ रहे हैं, जिसके इलाज के लिए वह ब्रिटेन में हैं और इलाज करा रहे हैं। उनकी ओर से कहा गया था कि राघव चड्ढा की बीमारी इतनी गंभीर है कि वह आंखों की रोशनी भी खो सकते हैं। कहा गया था कि वह जल्द ही इलाज कराकर भारत वापस लौटेंगे और चुनाव प्रचार करेंगे।

दिल्ली चुनाव से ठीक पहले पहुंचे इंडिया

राघव चड्ढा की भारत वापसी से आम आदमी पार्टी को बड़ी उम्मीदें हैं। दरअसल, वह ऐसे समय पर लौटे हैं, जब कुछ दिन बाद ही दिल्ली में लोकसभा चुनाव होने हैं। 25 मई को मतदान से पहले राघव चड्ढा चुनाव प्रचार में जुट सकते हैं, जिससे आम आदमी पार्टी को दिल्ली की सातों सीटों पर भाजपा के मुकाबले लीड मिल सकती है।

आप के तेजतर्रार नेता माने जाते हैं राघव चड्ढा

राघव चड्ढा की गिनती आम आदमी पार्टी के उन नेताओं में होती है, जो केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ तीखे हमले करते हैं। राघव चड्ढा की भाषण शैली और उनकी तथ्यात्मक बातों को भी पार्टी के अंदर काफी पसंद किया जाता है। इसीलिए आम आदमी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा था। कहा जा रहा था कि लोकसभा चुनाव 2024 के कैंपेन में राघव चड्ढा की अनुपस्थिति तो उनके विरोधियों को भी खटक रही है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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