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आम आदमी पार्टी ने केजरीवाल के लिए मांगा सरकारी आवास, राघव चड्ढा ने याद दिलाया नियम

Arvind Kejriwal Residence: राघव चड्ढा ने कहा, जब किसी पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिलता है तो उसके राष्ट्रीय संयोजक को राजधानी दिल्ली में सरकारी आवास दिया जाता है। चुनाव आयोग के इस नियम के तहत हम अरविंद केजरीवाल के लिए सरकारी आवास की मांग करते हैं।

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अरविंद केजरीवाल।

Photo : Twitter

Arvind Kejriwal Residence: आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने केंद्र सरकार से अरविंद केजरीवाल के लिए सरकारी आवास की मांग की है। उन्होंने कहा, जब किसी पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिलता है तो उसे दो साधन दिए जाते हैं। पहला- राष्ट्रीय राजधानी में राष्ट्रीय कार्यालय और दूसरा- पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक को सरकारी आवास। उन्होंने कहा, इस देश में कई राजनैतिक दल राष्ट्रीय पार्टियां बनीं और उनके राष्ट्रीय अध्यक्षों को राजधानी दिल्ली में सरकारी आवास दिया गया। यह चुनाव आयोग का नियम है।

राघव चड्ढा ने कहा, हम सरकार से मांग करते हैं कि मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद अरविंद केजरीवाल को भी राजधानी दिल्ली में एक आवास दिया जाए। उन्होंने कहा, कानून में इसका प्रावधान इसलिए किया गया क्योंकि एक राष्ट्रीय पार्टी को चलाने के लिए एक तंत्र चाहिए। देशभर के लोग पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिलने आते हैं। इसके लिए इन साधनों की व्यवस्था की जाती है।

सीएम के तौर पर मिलने वाली सुविधाएं छोड़ेंगे केजरीवाल

बता दें, बीते दिनों अरविद केजरीवाल ने दिल्ली के सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद उन्हें अपना सरकारी आवास व अन्य सुविधाएं छोड़नी होंगी। आम आमदी पार्टी ने कहा था कि अरविंद केजरीवाल 15 दिनों में अपना आधिकारिक आवास छोड़कर आम नागरिक की तरह रहने लगेंगे। आम आदमी पार्टी (आप) ने यह बात उनके इस्तीफा देने के एक दिन बाद बुधवार को कही। पार्टी के वरिष्ठ नेता और आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने यहां एक पत्रकार वार्ता में कहा कि इस्तीफा देने के बाद केजरीवाल ने सबसे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास छोड़ने का फैसला लिया। सिंह ने कहा था कि केजरीवाल एक सप्ताह में 6-फ्लैगस्टाफ रोड स्थित बंगला खाली कर देंगे, जबकि आप ने बाद में स्पष्ट किया कि निवर्तमान मुख्यमंत्री और उनका परिवार 15 दिनों में ऐसा करेगा। सिंह ने कहा था कि अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के लिए उपयुक्त आवास की तलाश जारी है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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