Bhartiya Janta Party : उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) 24 जून को अपनी नई प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा कर सकती है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, संगठन महामंत्री धर्मपाल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समन्वय से प्रदेश संगठन की यह नई टीम बनकर तैयार है। सूत्रों का कहना है कि इस नई टीम का ऐलान आज शाम तक हो सकता है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश के सभी महामंत्री और क्षेत्रीय अध्यक्ष हटाए जा रहे हैं और नए चेहरों को टीम में जगह दी जा रही है। संगठन महामंत्री ने प्रदेश अध्यक्ष के साथ मिलकर यूपी के सभी रीजन और जातिगत समीकरणों को इस टीम में साधने का प्रयास किया है।
नई टीम के गठन में संगठन महामंत्री धर्मपाल की भूमिका अहम
बताया जा रहा है कि इस नई टीम का गठन करने में संगठन महामंत्री की भूमिका काफी अहम रही है। अब प्रदेश कार्यकारिणी की यह नई टीम 2027 के विधानसभा चुनाव और फिर आगे 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए चुनावी रणनीति पर काम करेगी। संगठन महामंत्री धर्मपाल ने क्षेत्रीय एवं एवं जातिगत समीकरण को साधते हुए नई टीम का गठन किया है। धर्मपाल सिंह भी सुनील बंसल की तरह एबीवीपी बैकग्राउंड से आते हैं। वह 2017 से झारखंड में बीजेपी के संगठन महामंत्री हैं। इनका उत्तर प्रदेश में और खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ओबीसी समुदाय में अच्छा प्रभाव है। सुनील बंसल की तरह धर्मपाल की भी सांगठनिक क्षमता काफी मजबूत मानी जाती है।
पिछड़ा-दलित वर्ग को साधने पर BJP का जोर
सूत्रों का कहना है कि 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा का पूरा जोर पिछड़ा और दलित वर्ग को साधने पर है। इसे देखते हुए प्रदेश महामंत्री, प्रदेश उपाध्यक्ष, मंत्री सहित कई पदों पर नए और युवा चेहरों को जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। राज्य के सभी छह संगठनात्मक क्षेत्रों के क्षेत्रीय अध्यक्ष भी बदले जा सकते हैं। इसके अलावा टीम में महिला नेत्रियों को भी पर्याप्त जगह दी जा सकती है। चर्चा यह भी है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह को नई कार्यकारिणी में जिम्मेदारी दी जा सकती है। पंकज सिंह अभी नोएडा से विधायक और प्रदेश उपाध्यक्ष हैं।
PDA की काट के लिए हो सकते हैं अहम बदलाव
माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के PDA की काट के लिए भाजपा इस बार संगठन में पिछली बार की तुलना में ज्यादा OBC और SC समाज के चेहरों को अवसर दे सकती है। इस बार संगठन में महिलाओं की संख्या भी बढ़ाई जा सकती है। ऐसे में प्रदेश भाजपा संगठन में सवर्णों की संख्या सीमित होने का नुकसान भी पार्टी को उठाना पड़ सकता है।
