Independence Day 2026: भारत के अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी के बीच लगभग एक सदी पुराना पत्र एक अलग भारत की झलक पेश करता है, जिससे पता चलता है कि तब स्कूली बच्चों के बटन पर क्रांतिकारी भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त की तस्वीरें होती थीं, और कक्षाओं के अंदर भी राजनीतिक तस्वीरें लगी होती थीं।
समाचार एजेंसी 'पीटीआई-भाषा' को मिले इस पत्र को पांच नवंबर, 1930 को दिल्ली के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (CID), ने दिल्ली के उपायुक्त जे.एन.जी. जॉनसन को एम बी हाई स्कूल की गतिविधियों के बारे में लिखा था।
पत्र में कहा गया था कि नयी दिल्ली के स्कूल के अधिकारी छात्रों की गतिविधियों को लेकर ढिलाई बरत रहे हैं और संभावना जताई कि वे शायद उन्हें बढ़ावा भी दे रहे हैं। इसमें कक्षा नौ के उन लड़कों की ओर ध्यान दिलाया गया, जिनकी कमीज के बटन पर क्रांतिकारियों की तस्वीरें छपी थीं।
पत्र के अनुसार, कक्षाओं में राजनीतिक और क्रांतिकारी नेताओं की तस्वीरें भी लगाई गई थीं। पुलिस अधिकारी ने पत्र में कहा था कि इसके लिए मुख्य रूप से प्रधान अध्यापक और दूसरे शिक्षक डोला राम जिम्मेदार हैं, हालांकि प्रधान अध्यापक ने तीन नवंबर को तस्वीरें हटाने का आदेश दिया था।
यह पत्र दिखाता है कि औपनिवेशिक प्रशासन स्कूलों तक में भी राजनीतिक भावनाओं के प्रकटीकरण पर कितनी बारीकी से नजर रखता था। जो चीजें आज आम बैज या तस्वीरें लग सकती हैं, वे उन दिनों इतनी महत्वपूर्ण थीं कि सीआईडी को दिल्ली के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को उनकी रिपोर्ट देनी पड़ी।
भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त उन क्रांतिकारियों में शामिल थे जिनके कामों ने लोगों का ध्यान खींचा। आठ अप्रैल, 1929 को उन्होंने औपनिवेशिक नीतियों का विरोध और मुकदमे का इस्तेमाल अपना संदेश फैलाने के लिए करते हुए दिल्ली में केंद्रीय विधानसभा में बम फेंके थे।
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इस घटना ने इन दोनों लोगों को चर्चा में ला दिया, जबकि सिंह की लेखनी, मुकदमे और 1931 में हुई फांसी ने उन्हें भारत की आजादी की लड़ाई का एक स्थायी प्रतीक बना दिया। दत्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और वे कई सालों तक जेल में रहे।
उस दौर के स्कूली बच्चों के लिए, ऐसी हस्तियों के प्रति सम्मान जीवन का हिस्सा हुआ करती थी। पत्र से पता चलता है कि आजादी का आंदोलन सिर्फ राजनीतिक संगठनों या जनसभाओं तक सीमित नहीं था, इसका असर छात्रों के रूझानों और कक्षाओं में भी दिखाई देता था।
