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सुप्रीम कोर्ट ने रिलायंस के वंतारा पर बैठाई SIT, पूर्व जज जस्टिस चेलमेश्वर होंगे अध्यक्ष

  • Agency by: Agency
  • Updated Aug 26, 2025, 08:35 AM IST

रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट वन्तारा को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी जांच बैठा दी है

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सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के जामनगर स्थित वंतारा की गतिविधियों की जांच के लिए स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम के गठन का आदेश दिया है। यह सेंटर रिलायंस फाउंडेशन द्वारा संचालित है। कोर्ट ने साफ किया कि यह जांच सिर्फ तथ्य तलाशने के लिए है।

सुप्रीम कोर्ट की SIT में कौन-कौन होंगे?

SIT की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस जे चेलमेश्वर करेंगे। टीम में शामिल अन्य सदस्य हैं:

जस्टिस राघवेंद्र चौहान (पूर्व मुख्य न्यायाधीश, उत्तराखंड और तेलंगाना हाईकोर्ट)

हेमंत नगराले, आईपीएस (पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर)

अनिश गुप्ता, आईआरएस(अतिरिक्त आयुक्त, कस्टम्स)

SIT की जांच का दायरा क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने आदेश देते हुए कहा कि SIT कई अहम पहलुओं की जांच करेगी, जिनमें शामिल हैं-

1. भारत और विदेश से जानवरों की खरीद-फरोख्त, खासकर हाथियों का वन्तारा में लाए जाने को लेकर

2. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 और चिड़ियाघरों से जुड़े नियमों का क्या पालन हो रहा है?

3. CITES (अंतरराष्ट्रीय संधि) और आयात-निर्यात कानूनों का अनुपालन की जांच।

4. पशु कल्याण, जानवरों के मेडिकल ट्रीटमेंट और उनकी देखभाल, मौतों और उनके कारणों की समीक्षा करेगी SIT

5. औद्योगिक क्षेत्र के पास सेंटर की मौजूदगी और जलवायु संबंधी शिकायतें।

6. यह आरोप कि कहीं यह सिर्फ निजी कलेक्शन या वैनिटी प्रोजेक्ट तो नहीं।

7. पानी और कार्बन क्रेडिट के दुरुपयोग की शिकायतें।

8. वन्यजीवों की तस्करी, कानून उल्लंघन और आर्थिक अनियमितताओं की जांच।

9. मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला से जुड़ी शिकायतों की जांच

10. याचिकाओं और मीडिया रिपोर्ट्स में उठाए गए सभी सभी मुद्दों पर जांच होगी

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश देते हुए क्या कहा?

अदालत ने कहा कि याचिका में लगाए गए आरोपों को बिना किसी सबूत के केवल आरोप मानकर खारिज भी किया जा सकता था, लेकिन जब आरोप यह हों कि कानून का पालन कराने वाली संस्थाएं या अदालतें अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं कर रही हैं, तब स्वतंत्र जांच जरूरी हो जाती है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश किसी भी संस्था या वंतारा की गतिविधियों पर संदेह जताने के लिए नहीं है। यह सिर्फ एक फैक्ट-फाइंडिंग एक्सरसाइज होगी। SIT को केंद्र सरकार, गुजरात सरकार, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण और पर्यावरण मंत्रालय से पूरा सहयोग मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने SIT को 12 सितंबर तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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