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World Sickle Cell Awareness Day 2023: जानिए सिकल सेल डिसऑर्डर क्या है,क्या हैं इसके लक्षण और उपचार

  • Authored by: Ritu raj
  • Updated Jun 19, 2023, 07:47 AM IST

World Sickle Cell Awareness Day 2023: आज कल की इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में लोग स्वास्थ्य से जुड़ी तमाम तरह की समस्याओं से जुझ रहे है। लोगों की लाइफस्टाइल काफी बिगड़ गई है।

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World Sickle Cell Awareness Day 2023

Photo : iStock

World Sickle Cell Awareness Day 2023: आज कल की इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में लोग स्वास्थ्य से जुड़ी तमाम तरह की समस्याओं से जुझ रहे है। लोगों की लाइफस्टाइल काफी बिगड़ गई है। खराब लाइफस्टाइल और गलत खान पान की वजह से भारी संख्या में लोग कई तरह बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। खराब लाइफस्टाइल की वजह से ही लोगों के शरीर में खून की कमी भी देखने को मिल रही है। सिकल सेल डिजीज भी एक ऐसी बीमारी है जो खून से जुड़ी है। यह रेड ब्लड सेल डिसऑर्डर से संबंधित एक जेनेटिक बीमारी है, जिसमें व्यक्ति के शरीर में रेड ब्लड सेल की कमी होती है। ऐसे में इसके प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 19 जून को विश्व सिकल सेल जागरूकता दिवस मनाया जाता है। यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली ने साल 2008 में सिकल सेल डिसऑर्डर को पब्लिक हेल्थ से जुड़ी समस्या के तौर पर पहचानते हुए इसके प्रति जागरूकता फैलाने के लिए इस दिन की शुरुआत की थी।

क्या है सिकल सेल डिजीज

सिकल सेल डिजीज रेड ब्लड सेल डिसऑर्डर से संबंधित एक जेनेटिक बीमारी है, जिसमें व्यक्ति के शरीर में रेड ब्लड सेल की कमी होती है। इस बीमारी में शरीर में रेड ब्लड सेल्स की कमी हो जाती है। वहीं नसों में खून का फ्लो भी रूक जाता है। सिकल सेल रोग वाले व्यक्तियों में इस सेल्स का आकारा अर्धचन्द्राकार या "सिकल" का हो जाता है।

सिकल सेल डिजीज के लक्षण क्या है?

अंगों का क्षति

संक्रमण

शरीर के विभिन्न हिस्सों में तेज दर्द

खून का कमी या एनीमिया

हाथ और पैरों का सूजन

ग्रोथ और प्यूबर्टी में देरी होना

दृष्टि संबंधी समस्याएं

थकान महसूस होना

सिकल सेल डिजीज का इलाज

सिकल सेल बीमारी का अभी तक कोई इलाज उपलब्ध नहीं है। इसका इलाज मरीज के लक्षणों के आधार पर किया जाता है। इस बीमारी से पीड़ित मरीज को खून चढ़ाने की जरूरत होती है। इसके अलावा कई बार बोन मैरो या स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के जरिए भी मरीज का इलाज किया जाता है। इस बीमारी से छुटकारा पाने का एक मात्र इलाज बोन मैरो ट्रांसप्लांट ही है।

भारत में सिकल सेल डिसऑर्डर का पहला मामला

भारत में सिकल सेल डिसऑर्डर का पहला मामला साल 1952 में सामने आया था। अब इस मामले के कई मामले सामने देखने को मिलते हैं।

रितु राज
Ritu rajauthor

<p>ऋतु राज टाइम्स नाऊ नवभारत डिजिटल में लाइफस्टाइल डेस्क में बतौर चीफ कॉफी एडिटर कार्यरत हैं। उनकी हेल्थ और लाइफस्टाइल की खबरों पर अच्छी पकड़ है। यहां वो एक्सप्लेनर और लाइफस्टाइल की ट्रेंडिंग खबरों को लोगों के लिए परोसने का काम करते हैं। उनकी फूड, पैरेंटिंग, ब्यूटी पर अच्छी पकड़ है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की। वो बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से ताल्लुक रखते हैं। ऋतु राज ने पिछले 6 सालों में एनडीटीवी, जनसत्ता जैसे बड़े संस्थानों में अलग अलग बीट्स पर काम किया है। हालांकि उनकी खास रूची न्यूज, लाइफस्टाइल और एंटरटेनमेंट में रही है। ऋतु राज एक वॉयस ओवर आर्टिस्ट भी रहे हैं। उन्होंने एनडीटीवी में वॉयस ओवर आर्टिस्ट के तौर पर भी काम किया है। यहां उन्होंने लोकसभा चुनाव 2019 को भी कवर किया और खबरों को धार देना सीखा। साल 2021 में एनडीटीवी से इस्तीफा देने के बाद ऋतुराज ने जनसत्ता के साथ जुड़े और यहां वेब स्टोरीज पर अपनी रफ्तार बनाई और अलग अलग एंगल से खबरों को बनाना सीखा।</p>

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