दुनियाभर की एनर्जी सप्लाई के लिए सबसे अहम माने जाने वाले 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Hormuz Shipping Route) पर नियंत्रण को लेकर एक बड़ा कूटनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। ईरान और ओमान इस सामरिक जलमार्ग से शिपिंग गतिविधियों को मैनेज करने के लिए एक ऐतिहासिक समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। इस संभावित डील से तेहरान को इस बेहद महत्वपूर्ण तेल मार्ग पर पहले से कहीं अधिक नियंत्रण हासिल हो सकता है, जिससे ग्लोबल मार्केट में एक नई हलचल पैदा हो गई है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि ओमान के साथ चल रही बातचीत अपने अंतिम और बेहद सकारात्मक दौर में है, जिससे जल्द ही एक ठोस नतीजे पर पहुंचने की उम्मीद है।
अस्थायी सेफ शिपिंग रूट
इस प्रस्तावित समझौते के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों के लिए एक अस्थायी लेकिन सुरक्षित शिपिंग रूट का खाका तैयार किया जाएगा। ईरान और ओमान दोनों की भौगोलिक सीमाएं इस जलमार्ग से सटी हुई हैं, और वे इस रास्ते के ट्रैफिक को एक नई औपचारिक व्यवस्था के तहत विनियमित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इस योजना के तहत दोनों देशों द्वारा इस रूट का इस्तेमाल करने वाले कमर्शियल जहाजों से सर्विस फीस वसूलने की भी संभावना जताई जा रही है। इस पूरी व्यवस्था को आधिकारिक रूप देने के बाद इसे इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) के पास रजिस्टर्ड कराया जाएगा। जैसे ही इस संभावित समझौते की खबर बाजार में आई, तेल की कीमतों में जारी तेज उछाल पर कुछ समय के लिए ब्रेक लग गया।
शिपिंग डील से उम्मीदें बढ़ीं, तेल की कीमतों में नरमी
निवेशकों और ट्रेडर्स को उम्मीद है कि एक सुरक्षित रूट मिलने से ज्यादा टैंकर इस रास्ते से गुजर सकेंगे और हमलों का जोखिम कम होगा। लंदन में ब्रेंट क्रूड 97 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड करता नजर आया। मैक्वेरी के विश्लेषकों का अनुमान है कि मौजूदा संघर्ष के बीच होर्मुज से रोजाना लगभग 7 मिलियन बैरल क्रूड और रिफाइंड फ्यूल गुजर रहा है, जबकि युद्ध से पहले यह आंकड़ा करीब 20 मिलियन बैरल प्रतिदिन हुआ करता था।
ईरान चाहता है ज्यादा कंट्रोल
हालांकि, इस भू-राजनीतिक समीकरण में अमेरिका की भूमिका और उसकी प्रतिक्रिया एक बड़ा सवाल बनी हुई है। अमेरिका लगातार ईरान के तेल निर्यात को रोकने और ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी करने में जुटा है। अमेरिका की मंशा यह है कि होर्मुज जलमार्ग को युद्ध से पहले की तरह पूरी तरह से एक स्वतंत्र और बिना रोक-टोक वाला मार्ग बनाया जाए। फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजराइल के हमलों की शुरुआत के बाद से ईरान ने इस स्ट्रेट को व्यावहारिक रूप से बंद कर दिया था, जिसके चलते वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। हाल ही में दोनों पक्षों की ओर से टैंकरों पर हमलों की घटनाओं ने इस रूट के जोखिम को और ज्यादा बढ़ा दिया है।
महंगाई का खतरा बढ़ा
सातवें महीने में प्रवेश कर चुका यह टकराव दुनिया भर में तेल, ईंधन और प्राकृतिक गैस की कीमतें आसमान पर पहुंचा चुका है, जिससे ग्लोबल लेवल पर महंगाई का एक नया संकट खड़ा हो गया है। इस लंबी खींचतान के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन पर भी कूटनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। ईंधन की बढ़ती कीमतें अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा बोझ बन चुकी हैं, जो आगामी चुनावों के मद्देनजर एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है। कूटनीतिक स्तर पर इस तनाव को सुलझाने की अब तक की तमाम कोशिशें भले ही नाकाम साबित हुई हों, लेकिन ओमान और ईरान की यह नई शिपिंग डील आने वाले दिनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में बेहद अहम साबित हो सकती है।
