World Mental Health Day 2022: पहला सुख है निरोगी काया, वाकई इस बात में कोई शक नहीं है। मगर अक्सर हम अपना सारा ध्यान शारीरिक स्वास्थ्य की ओर केंद्रित कर लेते हैं। तथा मानसिक स्वास्थ्य को दरकिनार कर देते हैं। लेकिन यह समझना जरूरी है कि वैसे तो दोनों ही आवश्यक हैं। परंतु अगर आप मानसिक रूप से स्वस्थ हैं, तो आप शारीरिक रूप से अपने आप ठीक हो जाएंगे। बता दें कि आज यानी 10 अक्टूबर को वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे है। इसलिए इस मुद्दे का महत्व और बढ़ जाता है कि, कैसे इतने सालों में हमने समाज में सकारात्मक बदलाव देखें हैं। मेंटल हेल्थ को लोग अक्सर पागलपन जैसा समझते हैं। जिसकी वजह से लोग डिप्रेशन, एंजाइटी, स्ट्रेस जैसे मामलों पर खुलकर बात नहीं करते थे। हालांकि स्थिति में बहुत सुधार आया है और आने की उम्मीद है। ये हैं मेंटल हेल्थ से जुड़ी कुछ खास बातें।
क्यों और कैसे हुई थी इस दिन की शुरुआत
आज के दौर में, अच्छा मानसिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करना अत्यधिक महत्वपूर्ण है। क्योंकि भाग-दौड भरे जीवन में तनाव, डिप्रेशन, एंजाइटी की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। लेकिन क्योंकि किसी प्रकार की मानसिक दिक्कत होने पर, डॉक्टर की सहायता लेना आज भी लोगों को अनुचित लगता है। तो स्थिति में सुधार बहुत धीमी गति से आ रहा है। इसलिए मेंटल हेल्थ के मुद्दे पर रोशनी डालते रहने के लिए इस तरह के दिन को मनाना भी जरूरी है।
बता दें कि मेंटल हेल्थ की जागरुकता फैलाने का ये मकसद करीब 90 के दशक से शुरू हुआ था। इसे वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ मेंटल हेल्थ ने लॉन्च किया था। और तभी से इसे हर साल 10 अक्टूबर को मनाया जाता है।
मेंटल हेल्थ डे का उद्देश्य क्या है?
वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे को मनाने का केवल एक बहुत ही साधारण सा उद्देश्य है। वो है लोगों को इस स्थिति की गंभीरता के बारे में बताना और इससे जुड़ी अन्य सभी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करना। साथ ही इससे जूझ रहे लोगों को इस बात का भी एहसास दिलाना कि, वे अकेले नहीं हैं। तथा ये कोई एसी समस्या नहीं है, जिसका समाधान नहीं किया जा सकता है।
ये है वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे 2022 की थीम
हर साल इस दिन को और खास बनाने के लिए द वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ मेंटल हेल्थ अलग-अलग थीम के साथ मेंटल हेल्थ डे को सेलिब्रेट करता है। और इस साल की थीम है, ‘मेंटल हेल्थ इन एन अनइक्वल वर्ल्ड’। यानी कि कैसे इस भेदभाव भरी दुनिया का असर सीधा आपके मानसिक स्वास्थ्य पर भी पर रहा है। वो भेदभाव आपकी आर्थिक स्थिति को लेकर हो, या फिर आपके धर्म, जाति, रंग, लिंग के आधार पर ही क्यों न हो। और स्थिति इसलिए ज्यादा खराब है, क्योंकि इसके इलाज और इससे संबंधित अन्य देखभाल की पहुंच बहुत सीमित है। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य पर भेदभाव के असर पर बात करना अत्यधिक जरूरी है।
