हेल्थ

30 के बाद भारतीयों पर मंडरा रहा किडनी डिजीज का खतरा, क्यों जरूरी है समय-समय पर टेस्ट, बता रहे हैं डॉक्टर

Why indians need early kidney screening: भारत में क्रॉनिक किडनी डिजीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और हैरानी की बात यह है कि अब 30-40 साल की उम्र के लोगों में भी इसका खतरा बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी से जुड़ी बीमारियां अक्सर बिना लक्षण के बढ़ती हैं। ऐसे में समय-समय पर किडनी की जांच कराना बेहद जरूरी हो जाता है। जानिए डॉक्टर क्यों 30 की उम्र के बाद नियमित स्क्रीनिंग की सलाह दे रहे हैं।

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30 के बाद किडनी की जांच क्यों है जरूरी (PC- AI)

Why indians need early kidney screening: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर अपनी सेहत को लेकर लापरवाह हो जाते हैं। खासकर किडनी जैसी महत्वपूर्ण अंग की सेहत पर तब तक ध्यान नहीं दिया जाता जब तक कोई बड़ी समस्या सामने न आ जाए। डॉक्टरों के मुताबिक किडनी से जुड़ी बीमारियां अक्सर चुपचाप बढ़ती रहती हैं और शुरुआती समय में इनके लक्षण साफ दिखाई नहीं देते।

यही वजह है कि कई बार जब सूजन, थकान या पेशाब से जुड़ी समस्याएं महसूस होती हैं, तब तक किडनी को काफी नुकसान हो चुका होता है। यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद के कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. सशी किरण के अनुसार भारत में 30 साल की उम्र के बाद लोगों को किडनी हेल्थ को लेकर ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। समय-समय पर किडनी की जांच कराने से बीमारी को शुरुआती चरण में ही पकड़ा जा सकता है और गंभीर स्थिति से बचाव संभव हो सकता है।

भारत में तेजी से बढ़ रही है किडनी की बीमारी

भारत में क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) अब एक बड़ी पब्लिक हेल्थ समस्या बनती जा रही है। हाल के वर्षों में इसके मामलों में काफी बढ़ोतरी देखी गई है। आंकड़ों के अनुसार 2011 से 2017 के बीच भारत में करीब 11 प्रतिशत लोगों में CKD की समस्या थी, लेकिन 2018 से 2023 के बीच यह आंकड़ा बढ़कर 16 प्रतिशत से ज्यादा हो गया है।

डॉ. सशी किरण ए बताते हैं कि इस बढ़ते खतरे के पीछे कई कारण हैं। तेजी से बदलती लाइफस्टाइल, शारीरिक गतिविधि की कमी, अनहेल्दी खानपान और मोटापे के बढ़ते मामले किडनी हेल्थ को प्रभावित कर रहे हैं।

30-40 की उम्र में भी बढ़ रहे हैं किडनी के मामले

पहले माना जाता था कि किडनी की बीमारी ज्यादातर उम्रदराज लोगों में होती है। लेकिन अब डॉक्टरों को 30 और 40 साल के लोगों में भी ऐसे मामले देखने को मिल रहे हैं।

इसके पीछे मुख्य कारण डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर हैं। अगर इन बीमारियों को लंबे समय तक कंट्रोल में न रखा जाए तो ये धीरे-धीरे किडनी की नाजुक रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगती हैं। इससे किडनी की शरीर से गंदे तत्वों को फिल्टर करने की क्षमता कम होने लगती है।

30 के बाद किडनी जांच क्यों जरूरी

किडनी डिजीज की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती चरण में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। ऐसे में नियमित जांच ही इसका सबसे अच्छा बचाव है।

डॉक्टरों के मुताबिक कुछ साधारण टेस्ट जैसे सीरम क्रिएटिनिन, ईजीएफआर (eGFR) और यूरिन एल्बुमिन टेस्ट किडनी की स्थिति का सही अंदाजा दे सकते हैं। इन जांचों की मदद से किडनी में शुरुआती गड़बड़ी को जल्दी पहचानना संभव हो जाता है।

समय रहते पहचान होने से बच सकता है बड़ा नुकसान

अगर किडनी से जुड़ी समस्या शुरुआती चरण में पता चल जाए तो उसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

डॉ. सशी किरण ए के अनुसार सही समय पर इलाज शुरू करने से बीमारी की रफ्तार को धीमा किया जा सकता है। इसके लिए जीवनशैली में सुधार, दवाइयों का सही उपयोग और डायबिटीज व ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी होता है। ऐसा करने से डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट जैसी गंभीर स्थिति से बचाव संभव हो सकता है।

किडनी को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये आदतें

किडनी को स्वस्थ रखने के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतों पर ध्यान देना जरूरी है। सबसे पहले ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखना चाहिए। साथ ही शरीर का वजन संतुलित रखना भी महत्वपूर्ण है।

डॉक्टर सलाह देते हैं कि नमक का सेवन सीमित रखें, पर्याप्त पानी पिएं और बिना जरूरत के दर्द निवारक दवाओं का ज्यादा इस्तेमाल न करें। इसके अलावा 30 साल की उम्र के बाद नियमित हेल्थ चेकअप और किडनी स्क्रीनिंग कराना किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रखने का एक प्रभावी तरीका हो सकता है।

किडनी की बीमारियां धीरे-धीरे बढ़ती हैं, लेकिन अगर सही समय पर जांच और सावधानी बरती जाए तो इनके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

Vineet
विनीत author

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विष... और देखें

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