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Chabahar-Zahedan Rail Link : युद्ध के बीच नया रास्ता तैयार, क्या है भारत के फायदे की बात?

अमेरिकी से चल रह युद्ध के बीच ईरान ने चाबहार-जहेदान रेल लिंक बनाकर तैयार कर लिया है। यह जितनी बड़ी उपलब्धि ईरान के लिए है। उतनी ही अहम भारत के लिए भी है, क्योंकि फायदा भारत को भी मिलेगा।

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ईरान में बना रास्ता भारत की राह हुई आसान

Chabahar-Zahedan rail linkrail link : ईरान ने 730 किलोमीटर लंबे चाबहार-जहेदान रेल लिंक को पूरा करने का ऐलान किया है। अमेरिका से युद्ध के बीच इस काम को पूरा करना ईरान की बड़ी उपलब्धि है। क्योंकि, यह सिर्फ ईरान ही नहीं, भारत और रूस के लिए भी बेहद अहम है। खासतौर पर भारत के लिए यह पूर्वी रूस और मध्य एशिया के लिए नए द्वार की तर है।

भारत को क्या फायदा होगा?

इस रेल मार्ग के तैयार होने से भारत को मध्य एशिया और पूर्वी रूस तक आसान पहुंच का एक नया रणनीतिक रास्ता मिलेगा। खासतौर पर भारत के लिए अफगानिस्तान तक पहुंचना आसान होगा। यह ईरान के सबसे बड़े इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स में शामिल है। कई वर्षों से इस प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। ईरान की तरफ से दावा किया गया है कि अब सिर्फ 3-4 महीने के भीतर यह रास्ता पूरी तरह ऑपरेशनल हो जाएगा। इससे भारत अफगानिस्तान के साथ ही तमाम मध्य एशियाई देशों के साथ आसानी से व्यापार कर पाएगा। इसके अलावा भारत और रूस के बीच कनेक्टिविटी का एक और रास्ता बन जाएगा।

क्या INSTC का हिस्सा है ये प्रोजेक्ट?

12 सितंबर, 2000 को रूस, भारत और ईरान ने रूस से लेकर भारत तक करीब 7200 किलोमीटर का एक मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट रूट तैयार करने पर सहमति जताई। इसे INSTC यानी इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (International North-South Transport Corridor) नाम दिया गया। इसके तहत रेल, सड़क और समुद्री रास्तों के जरिये भारत से पूर्वी रूस तक पहुंच को आसान बनाने वाले प्रोजेक्ट बनाए जा रहे हैं।

ब्रिक्स के दौरान हुई चर्चा

भारत और ईरान के बीच इस रेल मार्ग को लेकर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान चर्चा हुई। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेस्कियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत में इसका अपडेट दिया था। शुरुआत में यह प्रोजेक्ट को भारत और ईरान को मिलकर फंड करते हुए बनाना था। लेकिन, अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से भारत की तरफ से फंडिंग में देरी के चलते फिलहाल ईरान ने इस प्रोजेक्ट को अपने नेशनल डेवलपमेंट फंड से पूरा किया है।

कितना बड़ा है ये रेल प्रोजेक्ट?

इस रेल प्रोजेक्ट में 33 स्टेशन, 39 टनल और 201 पुल हैं। अफगानिस्तान और सेंट्रल एशियाई देशों में इंटरनेशनल समुद्री रास्तों के लिए सीधा और अच्छा रेल लिंक नहीं है। ईरानी अधिकारियों ने पूरे ऑपरेशन के लिए जरूरी आखिरी तैयारियां शुरू कर दी हैं और रास्ते के लिए आखिरी सेफ्टी चेक कर रहे हैं। भारत सरकार चाबहार पोर्ट को मैनेज करने के लिए एक लोकल पोर्ट अथॉरिटी के साथ एक अरेंजमेंट के लिए ईरान से बात कर रही है, यह गारंटी देते हुए कि US से बैन हटने पर यह अधिकार भारत को ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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