अस्थमा श्वसन तंत्र से जुड़ी एक गंभीर समस्या है, जिससे आज लाखों लोग परेशान दिखाई देते हैं। इस रोग की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए ही हर साल मई माह के पहले मंगलवार को विश्व अस्थमा दिवस (World Asthma Day) के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना और इससे बचाव के नए उपायों को लोगों के बीच सहज बनाना है। अस्थमा के मरीजों को अपनी सेहत का ख्याल थोड़ा अधिक रखने की जरूरत होती है, क्योंकि इससे आपकी सेहत पर काफी बुरा असर देखने को मिलता है। आज इस विषय को लेकर हमने बात की अमृता अस्पताल, फरीदाबाद के वरिष्ठ परामर्शदाता, पल्मोनोलॉजी, डॉ. अर्जुन खन्ना से। उन्होंने अस्थमा के मामले बढ़ने के 5 कारण बताए।
डॉ. अर्जुन खन्ना के मुताबिक अस्थमा के मरीजों का सांस लेना न केवल सर्दियों में मुश्किल हो रहा है, बल्कि ये समस्या अब साल भर लोगों को परेशान करने लगी है। वहीं दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोगों को सांस से जुड़ी समस्याओं से ज्यादा परेशान होना पड़ता है। आइए जानते हैं ऐसे 5 कारण जो हमारे फेफड़ों पर दबाव बढ़ा रहे हैं।
1. जहरीली हवा
देश के अधिकतर शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) नॉर्मल से काफी ऊपर है। प्रदूषित हवा में मौजूद डस्ट पार्टिकल, डीजल का धुआं, निर्माण कार्यों से निकलने वाली धूल और इंडस्ट्रियल फ्यूम्स सीधे हमारे फेफड़ों तक पहुंचकर सांस लेना मुश्किल कर रहे हैं। इससे लंग्स में सूजन पैदा हो जाती है। वहीं लंबे समय तक इस तरह की प्रदूषित हवा में सांस लेने से फेफड़ों की कार्यक्षमता घटती है और अस्थमा जैसी बीमारी की शुरुआत हो सकती है।
2. अनहेल्दी खानपान
पैकेज्ड फूड्स, कोल्ड ड्रिंक्स, इंस्टेंट फूड्स और आर्टिफिशियल कलर वाले स्नैक्स इन सभी में प्रिजर्वेटिव्स मौजूद होते हैं, जो शरीर में एलर्जी की समस्या को बढ़ा सकते हैं। डॉ. खन्ना बताते हैं कि हर पांच में से एक अस्थमा का मरीज इस तरह का खाना खाने से एलर्जी का शिकार होता है। खासकर छोटे बच्चों और किशोरों में संक्रमण का ये सबसे बड़ा कारण उभर रहा है।
3. लगातार बढ़ता तनाव
जब हम तनाव में होते हैं, तब शरीर में कोर्टिसोल और एड्रिनेलिन जैसे हार्मोन का स्तर बढ़ने लगता है, जिससे हमारी सांसें तेज होती हैं और चेस्ट में जकड़न महसूस होती है। ये कंडीशन अस्थमा के अटैक को ट्रिगर कर सकती है। कोरोना जैसी महामारी के बाद मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं बढ़ी हैं, जिससे अस्थमा के मामले भी काफी बढ़े हैं।
4. कम फिजिकल एक्टिविटी
हमारी लाइफस्टाइल में फिजिकल एक्टिविटी की कमी जैसे टहलना, दौड़ना, खेलना और एक्सरसाइज ने फेफड़ों की ताकत को कम कर दिया है। घर ऑफिस और मोबाइल की दुनिया में व्यस्त लोग अपने शरीर का ध्यान नहीं रख पा रहे हैं, जिससे अस्थमा के लक्षण तेजी से उभर रहे हैं।
5. जांच में देरी
अस्थमा के लक्षण जैसे सूखी खांसी, सीने में जकड़न, या हल्का सांस फूलना इस तरह के लक्षणों को अक्सर लोग सामान्य समझकर नजरअंदाज करते रहते हैं। वहीं कुछ लोग इन लक्षणों का इलाज घरेलू नुस्खों या बिना डॉक्टर की सलाह के करने लगते हैं, जो उनकी स्थिति को और बिगाड़ सकता है।
निष्कर्ष - डॉ. अर्जुन खन्ना की मानें तो यदि आपको खांसी तीन हफ्तों से ज्यादा समय तक बनी हुई है, रात में सांस फूलती है और सुबह उठते ही छाती में भारीपन महसूस होता है। तो यह अस्थमा जैसी गंभीर बीमारी की चेतावनी है। इस तरह के लक्षण दिखते ही बिना देर किए पल्मोनोलॉजिस्ट से मिलें और इलाज में किसी तरह की देर न करें।
अस्थमा कोई लाइलाज बीमारी नहीं है, हां इसे समय रहते पहचान कर इनहेलर, एलर्जी जांच और लाइफस्टाइल में सुधार से पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। आज विश्व अस्थमा दिवस के मौके पर आपको यह समझना जरूरी है कि अस्थमा सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि ये एक संकेत है कि हमें अपने पर्यावरण और जीवन शैली की ओर और भी ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
