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रात में मुंह ढककर सोना क्यों है गलत, कैसे बन रहा सेहत के लिए खतरा, वैज्ञानिकों ने बताया बड़ा कारण

Why Should Not Sleep With Covered Face: रात में मुंह या सिर ढककर सोना बहुत लोगों की आदत होती है, खासकर सर्दियों में। लेकिन वैज्ञानिकों की मानें तो यह आदत सेहत के लिए धीरे-धीरे बड़ा खतरा बन सकती है। इससे ऑक्सीजन कम मिलती है, कार्बन डाइऑक्साइड ज्यादा अंदर जाती है और नींद की गुणवत्ता पर भी बुरा असर पड़ता है। जानिए डॉक्टरों और वैज्ञानिकों के मुताबिक, मुंह ढककर सोने से शरीर पर क्या-क्या नुकसान होते हैं।

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मुंह ढककर सोना क्यों खतरनाक

Why Should Not Sleep With Covered Face: अक्सर लोग सर्दी, ठंड या रोशनी से बचने के लिए कंबल या चादर से मुंह ढककर सोते हैं। कई लोगों को तो यह आदत इतनी पड़ जाती है कि बिना सिर ढके नींद ही नहीं आती। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह छोटी-सी लगने वाली आदत धीरे-धीरे आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है? वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने साफ चेतावनी दी है कि मुंह ढककर सोना शरीर में ऑक्सीजन की कमी और कई हेल्थ इश्यू पैदा कर सकता है।

मुंह ढकने से हवा का फ्लो कम हो जाता है

एक्सपर्ट्स की मानें तो जब हम चादर या कंबल से मुंह ढक लेते हैं तो आसपास की ताज़ा हवा शरीर तक ठीक से नहीं पहुंच पाती। इससे ऑक्सीजन का लेवल कम हो जाता है और कार्बन डाइऑक्साइड ज्यादा जमा होने लगती है। नींद के दौरान बॉडी को लगातार फ्रेश एयर की जरूरत होती है, लेकिन ढका हुआ चेहरा इसे रोक देता है, जिससे नींद की गुणवत्ता खराब होती है और सुस्ती बढ़ जाती है।

कार्बन डाइऑक्साइड जमा होकर बनाती है खतरा

वैज्ञानिकों का कहना है कि मुंह ढककर सोने से हम बार-बार वही हवा अंदर लेते हैं जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा ज्यादा होती है। यह सांस लेने की क्षमता को कमजोर कर सकती है और दिमाग तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन भी कम कर देती है। लंबे समय तक ऐसा करने से सिर दर्द, चक्कर और थकान महसूस होती है।

ब्रेन पर पड़ता है सीधा असर

रिपोर्ट बताती है कि जब ऑक्सीजन कम और CO₂ ज्यादा हो जाती है, तो दिमाग को अपनी फंक्शनिंग कम करनी पड़ती है। इससे सुबह उठकर भारीपन, चिड़चिड़ापन और फोकस की कमी महसूस होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि दिमाग को रात में पर्याप्त ऑक्सीजन मिले तभी वह खुद को रीचार्ज कर पाता है, अन्यथा पूरी बॉडी पर असर पड़ता है।

बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा खतरनाक

बता दें कि बच्चों, बुजुर्गों और सांस की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए मुंह ढककर सोना और भी ज्यादा रिस्की है। उनके फेफड़े ताजी हवा की कमी को जल्दी पकड़ लेते हैं जिससे सांस रुकने, बेचैनी या अचानक नींद टूटने की परेशानी बढ़ सकती है।

शरीर का टेंपरेचर बढ़ने लगता है

जब चेहरा ढका होता है तो बॉडी हीट बाहर नहीं निकल पाती। इससे शरीर जरूरत से ज्यादा गर्म हो जाता है। यही वजह है कि कई लोग उठते ही थकान, गर्मी या डिहाइड्रेशन जैसा महसूस करते हैं। वैज्ञानिक बताते हैं कि नींद के दौरान शरीर को कूल रखना बहुत जरूरी है, जिससे नींद गहरी और रिलैक्सिंग हो सके।

स्लीप क्वालिटी पर सीधा असर

मुंह ढककर सोने से बार-बार नींद टूटना, खर्राटे बढ़ना और सांस लेने में हल्का-सा दबाव महसूस होना आम है। नींद खराब होने से अगले दिन ऊर्जा कम रहती है और मूड भी प्रभावित होता है। इसलिए विशेषज्ञों की सलाह है कि सोते समय कमरा वेंटिलेटेड रखें और चेहरा खुला छोड़ें।

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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