Pancreatic Cancer: कैंसर की दुनिया में कुछ बीमारियां ऐसी हैं जो धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती हैं, लेकिन लंबे समय तक अपने होने का कोई साफ संकेत नहीं देतीं हैं। पैंक्रियाटिक कैंसर यानी अग्न्याशय का कैंसर ऐसी ही एक बीमारी है, जिसे आमतौर पर 'साइलेंट किलर' के नाम से भी जाना जाता है। इसे साइलेंट किलर कहने के पीछे कारण है कि कि ज्यादातर मामलों में इसका पता तब चलता है जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है और इलाज के विकल्प बहुत सीमित हो जाते हैं।
हर साल दुनिया भर में लाखों लोग पैंक्रियाटिक कैंसर से पीड़ित होते हैं। नई दिल्ली, होप ऑन्कोलॉजी के निदेशक डॉ. अमीश वोरा के अनुसार, पैंक्रियाटिक कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती इसकी देर से पहचान (pancreas cancer awareness) है। शुरुआती चरण में इसके लक्षण या तो दिखाई नहीं देते या इतने साधारण दिखाई देते हैं कि लोग उन्हें सामान्य स्वास्थ्य समस्याएं समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं इसके बारे में विस्तार से...
क्या है पैंक्रियाटिक कैंसर
अग्न्याशय (पैंक्रियास) पेट के पीछे स्थित एक महत्वपूर्ण अंग है जो पाचन और ब्लड शुगर के लेवल को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाता है। यह शरीर के लिए जरूरी इंसुलिन और अन्य हार्मोन बनाता है तथा भोजन को पचाने वाले एंजाइम भी तैयार करता है। डॉ. अमीश वोरा के अनुसार, जब अग्नाशय (पैंक्रियाज) की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं, तब पैंक्रियाटिक कैंसर विकसित होता है। यह कैंसर तेजी से फैलने की क्षमता रखता है और अक्सर आसपास के अंगों को भी प्रभावित कर सकता है।
क्यों 'साइलेंट किलर' कहा जाता है पैंक्रियाटिक कैंसर
पैंक्रियाटिक कैंसर को साइलेंट किलर कहने के पीछे कई कारण हैं। जिसमें सबसे पहला है इसका शुरुआती स्टेज में न पता चलना। डॉ. अमीश वोरा की मानें तो, इस कैंसर के मरीजों में बीमारी के शुरुआती चरण में कोई खास लक्षण नहीं दिखाई देता है। जब तक लक्षण उभरते हैं, तब तक कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों तक फैल चुका होता है।
इसके अलावा अग्न्याशय पेट के अंदर गहराई में स्थित होता है। इसलिए सामान्य शारीरिक जांच में इसकी असामान्यताओं का पता लगाना आसान नहीं होता है। जो इस कैंसर को एक गंभीर बीमारी बनने का बड़ा कारण है।
इसके साथ ही पैंक्रियाटिक कैंसर की जांच के लिए कोई प्रभावी स्क्रीनिंग टेस्ट मौजूद नहीं है। स्तन, सर्वाइकल या कोलन कैंसर और पैंक्रियाटिक कैंसर के लिए अभी व्यापक स्तर पर कोई नियमित स्क्रीनिंग टेस्ट उपलब्ध नहीं है, जिससे शुरुआती चरण में बीमारी पकड़ा जा सके।
पैंक्रियाटिक कैंसर की शुरुआत में दिखाई देने वाले लक्षण
पैंक्रियाटिक कैंसर की शुरुआत में किसी भी तरह के लक्षण को पहचाना काफी मुश्किल होता है, लेकिन कुछ शुरुआती संकेतों को ध्यान में रखना जरूरी है। इन लक्षणों को देखकर आप इस रोग की गंभीरता को कंट्रोल कर सकते हैं।
पीलिया (जॉन्डिस)
पैंक्रियाटिक कैंसर का एक प्रमुख संकेत पीलिया हो सकता है। जब अग्न्याशय में विकसित ट्यूमर पित्त नली को दबाने लगता है, तो शरीर में बिलिरुबीन बढ़ जाता है। इसके कारण आंखें और त्वचा पीली दिखाई देने लगती हैं। इस लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
अचानक वजन घटना
यदि बिना किसी डाइट, एक्सरसाइज या जीवनशैली में बदलाव के आपका वजन तेजी से कम होने लगे, तो यह चिंता का विषय हो सकता है। पैंक्रियाटिक कैंसर शरीर की ऊर्जा और पोषक तत्वों के उपयोग को प्रभावित करता है, जिससे अनचाहा वजन घटने लगता है।
लगातार पेट या पीठ में दर्द
ऊपरी पेट में लगातार रहने वाला दर्द, जो धीरे-धीरे पीठ तक फैलने लगे, पैंक्रियाटिक कैंसर का संकेत हो सकता है। यह दर्द अक्सर कैंसर के बढ़ने और आसपास की नसों या ऊतकों पर दबाव पड़ने के कारण महसूस होता है।
भूख कम लगना
पैंक्रियाटिक कैंसर से पीड़ित कई लोगों में भूख कम लगने की समस्या देखी जाती है। थोड़ी मात्रा में भोजन करने पर ही पेट भरा हुआ महसूस होना, खाने में रुचि कम होना और लगातार कमजोरी महसूस करना इसके शुरुआती संकेतों में शामिल हो सकते हैं।
पाचन संबंधी समस्याएं
लगातार गैस बनना, अपच, मतली, उल्टी या तैलीय मल जैसी समस्याएं पाचन तंत्र में गड़बड़ी का संकेत हो सकती हैं। अग्न्याशय भोजन पचाने वाले एंजाइम बनाता है, इसलिए इसकी कार्यक्षमता प्रभावित होने पर ऐसी परेशानियां लंबे समय तक बनी रह सकती हैं।
नए डायबिटीज की शुरुआत
कुछ मामलों में अचानक डायबिटीज का विकसित होना या पहले से मौजूद डायबिटीज का तेजी से बिगड़ना पैंक्रियाटिक कैंसर से जुड़ा हो सकता है। अग्न्याशय इंसुलिन बनाने का काम करता है, इसलिए इसमें होने वाले बदलाव ब्लड शुगर के स्तर को प्रभावित कर सकते हैं।
किन लोगों में ज्यादा होता है खतरा
हालांकि ये कैंसर किसे होगा इस बात को लेकर किसी तरह की रिसर्च सामने नहीं आई है। लेकिन हम आपको कुछ कारक बताने जा रहे हैं, जो इस कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
- धूम्रपान
- बढ़ती उम्र
- मोटापा
- पारिवारिक इतिहास
- क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस
- अनियंत्रित डायबिटीज
पैंक्रियाटिक कैंसर को 'साइलेंट किलर' इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह लंबे समय तक बिना साफ लक्षणों के शरीर में फैलता जाता है। इसकी इसकी सबसे बड़ी चुनौती देर से पहचान है, जो इसके उपचार को और जटिल बना देती है। हालांकि जागरूकता, हेल्दी लाइफस्टाइल और समय रहते डॉक्टर की सलाह लेने से इसके जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसलिए लेख में बताए गए लक्षणों को गंभीरता से लेना रोग के निदान में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
