Type 5 Diabetes Symptoms Causes Prevention And treatment
Type 5 Diabetes Symptoms Causes Prevention And treatment: जब डायबिटीज की बात होती है, तो ज्यादातर लोग टाइप 1 या टाइप 2 डायबिटीज को ही जानते हैं। टाइप 1 ज्यादातर बच्चों में होता है और टाइप 2 वयस्कों में, जो मोटापे या खराब जीवनशैली के कारण होता है। लेकिन हाल ही में एक और प्रकार की डायबिटीज पर ध्यान दिया गया है, जिसका नाम है टाइप 5 डायबिटीज। यह उन लोगों को होता है जो दुबले-पतले होते हैं और जिनका शरीर पोषण की कमी से जूझ रहा होता है। यानी दिखने में फिट लगने वाले लोग भी इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं।
टाइप 5 डायबिटीज़ को पहले MODY (Maturity Onset Diabetes of the Young) या कुपोषण से जुड़ी डायबिटीज कहा जाता था। यह बीमारी तब होती है जब शरीर को लंबे समय तक सही पोषण नहीं मिल पाता और अग्न्याशय (pancreas) इंसुलिन सही मात्रा में बनाना बंद कर देता है। यह टाइप 1 की तरह ऑटोइम्यून नहीं होती और टाइप 2 की तरह इंसुलिन रेजिस्टेंस से भी जुड़ी नहीं होती।
इस बीमारी का खतरा खासकर उन लोगों को होता है जो लंबे समय तक कुपोषण का शिकार रहे हों। जिनका बीएमआई सामान्य से कम हो, यानी जो बहुत दुबले-पतले हैं, और जिनकी डाइट में लंबे समय तक जरूरी पोषक तत्वों की कमी रही हो, उनके शरीर में अग्न्याशय कमजोर हो जाता है और इंसुलिन बनना कम हो जाता है।
टाइप 5 डायबिटीज के लक्षण आम डायबिटीज जैसे ही हो सकते हैं, जैसे लगातार थकान, भूख लगना, बार-बार पेशाब आना, प्यास बढ़ना और वजन का अचानक कम होना। लेकिन यह लक्षण अक्सर गलत समझे जाते हैं और कई बार मरीज को टाइप 1 डायबिटीज मानकर इंसुलिन देना शुरू कर दिया जाता है, जो टाइप 5 के लिए हमेशा सही नहीं होता।
टाइप 1 डायबिटीज़ ऑटोइम्यून होती है और इसमें शरीर खुद इंसुलिन बनानी वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। टाइप 2 में शरीर इंसुलिन के प्रति रेसिस्टेंट हो जाता है और यह अधिकतर मोटे लोगों में होता है। जबकि टाइप 5 में शरीर इंसुलिन बनाना कम कर देता है और यह दुबले-पतले, कुपोषण से पीड़ित लोगों में होता है।
इस बीमारी का इलाज इंसुलिन थेरेपी से नहीं, बल्कि पोषण सुधारने से किया जाता है। मरीजों को प्रोटीन और जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर डाइट दी जाती है। समय रहते पहचान कर ली जाए तो इस बीमारी को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।