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क्या IVF के बाद मां का दूध कम बनता है? डॉक्टर ने बताया पूरा सच

IVF Pregnancy: IVF के जरिए मां बनने वाली कई महिलाओं के मन में यह सवाल रहता है कि क्या इलाज का असर उनके दूध बनने की क्षमता पर पड़ सकता है।

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क्या IVF के बाद मां का दूध कम बनता है

IVF Pregnancy: मां बनना हर महिला के जीवन का बेहद खास अनुभव होता है। लेकिन जिन महिलाओं ने IVF यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन की मदद से गर्भधारण किया होता है, उनके मन में बच्चे के जन्म के बाद कई सवाल होते हैं। इन्हीं में से एक बड़ा सवाल होता है कि क्या IVF की वजह से मां का दूध कम बन सकता है या बच्चे को स्तनपान कराने में परेशानी आ सकती है?

विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ एक भ्रम है। IVF प्रक्रिया का मां के दूध बनने की क्षमता पर कोई सीधा असर नहीं पड़ता। दिल्ली के ग्रेटर कैलाश की IVF विशेषज्ञ डॉ. सुतापा सेन बताती हैं कि ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो कि IVF कराने वाली महिलाओं में दूध कम बनता है या स्तनपान प्रभावित होता है।

IVF की दवाओं का नहीं पड़ता दूध पर असर

IVF प्रक्रिया के दौरान महिलाओं को हार्मोन से जुड़ी दवाएं दी जाती हैं, ताकि अंडों के विकास और गर्भधारण की प्रक्रिया को सफल बनाया जा सके। कई महिलाओं को चिंता रहती है कि इन दवाओं का असर बच्चे के जन्म के बाद भी शरीर में रहेगा। डॉ. सुतापा सेन के अनुसार, IVF के दौरान दी जाने वाली हार्मोनल दवाएं आमतौर पर गर्भावस्था के शुरुआती चरण में ही बंद कर दी जाती हैं। बच्चे के जन्म तक इन दवाओं का असर खत्म हो जाता है। इसलिए इनका मां के दूध बनने की प्रक्रिया पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।

दूध बनने में शरीर के प्राकृतिक हार्मोन की होती है भूमिका

बच्चे के जन्म के बाद मां के शरीर में दो महत्वपूर्ण हार्मोन सक्रिय होते हैं, जिन्हें प्रोलैक्टिन और ऑक्सीटोसिन कहा जाता है। प्रोलैक्टिन हार्मोन दूध बनाने में मदद करता है, जबकि ऑक्सीटोसिन दूध को बाहर आने में सहायता करता है। जब बच्चा बार-बार मां का दूध पीता है, तो शरीर को संकेत मिलता है कि ज्यादा दूध की जरूरत है और उसी हिसाब से दूध बनना शुरू हो जाता है।

इस पूरी प्रक्रिया का IVF या सामान्य गर्भधारण से कोई संबंध नहीं होता। यानी बच्चा चाहे प्राकृतिक तरीके से पैदा हुआ हो या IVF से, मां के शरीर की स्तनपान कराने की क्षमता समान रहती है।

स्तनपान सफल बनाने के लिए इन बातों का रखें ध्यान

डॉ. सुतापा सेन के अनुसार, स्तनपान की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि बच्चे के जन्म के बाद मां और बच्चे की देखभाल किस तरह की जाती है। उन्होंने बताया कि जन्म के तुरंत बाद मां और बच्चे के बीच स्किन-टू-स्किन कॉन्टैक्ट बहुत जरूरी होता है। इससे बच्चे और मां के बीच जुड़ाव बढ़ता है और स्तनपान शुरू करने में भी मदद मिलती है। इसके अलावा बच्चे को जन्म के पहले घंटे के अंदर स्तनपान शुरू कराना बेहतर माना जाता है। शुरुआत में बच्चे को बार-बार दूध पिलाने से दूध बनने की प्रक्रिया भी बेहतर होती है।

IVF मांओं को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

डॉक्टरों के अनुसार, बच्चे को पहले छह महीने तक सिर्फ मां का दूध देना सबसे अच्छा माना जाता है। बच्चे को दिन में करीब 8 से 12 बार दूध पिलाने की जरूरत पड़ सकती है। अगर किसी महिला को शुरुआत में दूध कम आने की समस्या महसूस हो तो तुरंत घबराना नहीं चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के बच्चे को फॉर्मूला दूध शुरू नहीं करना चाहिए। अगर स्तनपान में कोई परेशानी हो रही है तो इसकी वजह IVF को मानने के बजाय डॉक्टर या लैक्टेशन एक्सपर्ट से सलाह लेनी चाहिए।

IVF के बाद किन कारणों से आ सकती है स्तनपान में परेशानी?

डॉ. सुतापा सेन बताती हैं कि अगर किसी IVF मां को स्तनपान में समस्या आती भी है तो इसकी वजह अक्सर IVF नहीं होती। इसके पीछे कई अन्य कारण हो सकते हैं, जैसे-

  • समय से पहले बच्चे का जन्म
  • सिजेरियन डिलीवरी
  • मां की कोई स्वास्थ्य समस्या
  • गर्भावस्था के दौरान आई जटिलताएं
  • तनाव या सही जानकारी का अभाव

इन कारणों को समझकर सही समय पर मदद लेने से ज्यादातर महिलाएं सफलतापूर्वक स्तनपान करा सकती हैं।

मां का दूध बच्चे के लिए क्यों जरूरी है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी सलाह देता है कि बच्चे के जन्म के पहले घंटे के अंदर स्तनपान शुरू किया जाना चाहिए और शुरुआती छह महीने तक केवल मां का दूध देना चाहिए। मां का दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। साथ ही स्तनपान मां और बच्चे के बीच भावनात्मक रिश्ता भी मजबूत करता है।

IVF से मां बनने वाली महिलाओं को नहीं होना चाहिए परेशान

IVF तकनीक ने लाखों महिलाओं को मां बनने का सपना पूरा करने में मदद की है। लेकिन इससे जुड़ी कई गलत धारणाएं आज भी मौजूद हैं। डॉ. सुतापा सेन का कहना है कि बच्चा चाहे सामान्य गर्भधारण से हुआ हो या IVF से, मां की स्तनपान कराने की क्षमता पर कोई फर्क नहीं पड़ता। सही जानकारी, धैर्य और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद से IVF मां भी अपने बच्चे को आसानी से स्तनपान करा सकती हैं।

prabhat sharma
प्रभात शर्माauthor

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–परखने की क्षमता उनकी लेखन शैली को बेहद जीवंत और पाठकों से जोड़ने वाली बनाती है। वे ऑफबीट डेस्टिनेशन, लोकल कल्चर, हेरिटेज साइट्स, रोड ट्रिप्स, फूड जर्नी और बजट ट्रैवल जैसे विषयों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। प्रभात की स्टोरीज़ सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि यात्रा के माहौल, भाव और अनुभव को भी महसूस कराती हैं। अब तक 7,000 से अधिक कंटेंट लिख चुके प्रभात अपनी सहज भाषा, प्रामाणिक जानकारी और अनुभव-आधारित दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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