World Sickle Cell Awareness Day (सिकल सेल रोग क्या है): भारत के आदिवासी इलाकों में सिकल सेल रोग एक बहुत बड़ी समस्या है जिसमें बचपन में ही बच्चों मे लक्षण दिखने लगते हैं। सिकल सेल रोग एचबीबी जीन में होने वाला आनुवंशिक उत्परिवर्तन है। यह जीन हीमोग्लोबिन के एक बड़े हिस्से को बनाने के लिए जिम्मेदार है। बता दें कि माता-पिता से कुछ बच्चों को आनुवांशिक रूप से यह रोग मिल सकता है। सिकल सेल रोग के लक्षण 5 से 6 महीने की उम्र में ही बच्चों में दिखने लगते हैं। हर साल 19 जून को वर्ल्ड सिकल सेल डे के रूप में मनाया जाता है। बता दें कि ये रेड ब्लड सेल डिसऑर्डर से जुड़ी बीमारी है।
सिकल सेल रोग होने के मुख्य कारण
- सिकल सेल एनीमिया असामान्य हीमोग्लोबिन (लाल रक्त कोशिकाओं के भीतर ऑक्सीजन ले जाने वाले प्रोटीन) के कारण होने वाली रक्त की एक आनुवंशिक विकार है।
- असामान्य हीमोग्लोबिन के वजह से लाल रक्त कोशिकाएं सिकल के आकार की हो जाती हैं।
- यह उनकी ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता और रक्त प्रवाह की मात्रा को कम करता है।
- एक व्यक्ति जिसे माता और पिता, दोनों से दोषपूर्ण जीन प्राप्त हुआ है, वह सिकल सेल से पीड़ित हो सकता है।
क्या सिकल सेल से बचाव संभव है ?
- सिकल रोग ग्रस्त बच्चे में खून की कमी होती है, ऐसे बच्चों का टीकाकरण व अन्य जरूरी दवाएं देकर उन्हें दीर्घायु बनाया जा सकता है।
- सिकल रोग के कारण होने वाले प्रभाव व विकारों का उचित इलाज से सिकल रोगी को लंबा जीवन मिल सकता है।
- शादी से पहले सिकल कुंडली मिला ली जाये तो इस रोग को कंट्रोल किया जा सकता है। इसके लिए शादी से पहले लड़का व लड़की दोनों का रक्त जांच कर यह देख लेना चाहिए कि इनमें सिकल सेल के जीन तो नहीं है।
सिकल सेल जागरूकता को लेकर हो रहे हैं प्रयास
वर्ल्ड सिकल सेल डे के मौके पर AIIMS नई दिल्ली में आज डायरेक्टर एम श्रीनिवासन की देखरेख में वर्ल्ड सिकल सेल दिवस मनाया गया। इस मौके पर मंत्री Jual Oram कैबिनेट मिनिस्टर ट्राइबल अफेयर्स और MOS DD uikey ने शिरकत की और इस बीमारी से ग्रस्त लोगों के परिवारों से मुलाकात भी की। Tribal Affairs Minister Jual Oram ने बताया कि मलेरिया की तर्ज पर ही सरकार सिकल सेल समस्या का उन्मूलन करना चाहती है और इस पर जागरूकता फैलाने के लिए 340 जिलों और 18 राज्यों में स्पेशल ड्राइव चलाने की भी तैयारी है।
