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किस चीज में होता है सबसे ज्यादा फाइबर, Food Pharmer ने दिखाया सच, जानें गट हेल्थ के लिए क्या खाएं ज्यादा

High Fiber Foods: Food Pharmer ने 10 फाइबर फूड्स को सबसे खराब से बेहतर तक रैंक किया है। जानें भिंडी, दाल, चना, अमरूद और अलसी में कौन है बेस्ट। क्या खाने से बनेगी बेहतर गट हेल्थ।

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किस चीज में होता है सबसे ज्यादा फाइबर, गट हेल्थ के लिए Food Pharmer ने जुटाए ये फैक्ट्स

High Fiber Foods: कब्ज हो, पेट बार-बार फूलता हो या खाना खाने के कुछ समय बाद फिर भूख लगने लगे- ऐसी परेशानियों में अक्सर फाइबर बढ़ाने की सलाह दी जाती है। लेकिन फाइबर का नाम आते ही लोग महंगे सप्लीमेंट, एवोकाडो या इम्पोर्टेड सीड्स खोजने लगते हैं। जबकि हमारी रसोई में मौजूद दाल, राजमा, चना और अमरूद जैसे साधारण खाद्य पदार्थ भी रोज की जरूरत पूरी करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

फूड फार्मर के एक वीडियो में 10 लोकप्रिय फाइबर फूड्स को उनकी फाइबर मात्रा, कीमत और आसानी से उपलब्ध होने जैसे पैमानों पर रैंक किया गया है। इस सूची में भिंडी से लेकर अलसी के बीज तक शामिल हैं। उनके इस वीडियो का सबसे उपयोगी संदेश यही है कि किसी भोजन को केवल उसकी लोकप्रियता या पैकेट पर लिखे दावे से सेहतमंद नहीं मान लेना चाहिए। उसकी मात्रा, कीमत और खाने का तरीका भी उतना ही मायने रखता है।

फाइबर फूड्स की रैंकिंग

रैंकखाद्य पदार्थखास बात
10भिंडीपौष्टिक सब्जी, लेकिन अकेले इससे रोज की फाइबर जरूरत पूरी करना कठिन
9दालफाइबर के साथ प्लांट प्रोटीन भी, रोजमर्रा के भोजन में आसानी से शामिल
8राजमाफाइबर और प्रोटीन से भरपूर, लेकिन सही तरह भिगोना और पकाना जरूरी
7आटा मैगीसामान्य नूडल्स से बेहतर विकल्प हो सकता है, फिर भी प्रोसेस्ड फूड
6एवोकाडोअच्छा फाइबर और हेल्दी फैट, लेकिन महंगा और हर जगह उपलब्ध नहीं
5एडामेमेफाइबर व प्रोटीन का अच्छा मेल, पर भारतीय घरों में अभी कम प्रचलित
4चनासस्ता, पेट भरने वाला और कई तरीकों से खाया जा सकता है
3छोलेफाइबर से भरपूर, पर तेल-मसाले और मात्रा का ध्यान रखना जरूरी
2अमरूदआसानी से मिलने वाला, किफायती और फाइबर से भरपूर फल
1अलसी के बीजथोड़ी मात्रा में काफी फाइबर, लेकिन इन्हें सही तरीके से खाना जरूरी

क्या भिंडी में फाइबर कम होता है

भिंडी एक स्वस्थ सब्जी है। इसमें फाइबर के अलावा कई जरूरी विटामिन और मिनरल भी मिलते हैं। लेकिन जब किसी एक खाद्य पदार्थ को रोज की कुल फाइबर जरूरत के पैमाने पर देखा जाता है, तो केवल एक कटोरी भिंडी काफी नहीं होती।

इसका अर्थ यह नहीं कि भिंडी खराब विकल्प है। असली बात यह है कि फाइबर के लिए पूरी प्लेट का संतुलन देखना चाहिए। भिंडी के साथ दाल, सलाद और साबुत अनाज की रोटी जोड़ने पर भोजन की कुल फाइबर मात्रा बेहतर हो जाती है।

दाल और राजमा क्यों हैं उपयोगी

दाल भारतीय भोजन का सबसे व्यावहारिक फाइबर स्रोत है। यह घर में आसानी से बन जाती है और फाइबर के साथ प्लांट प्रोटीन भी देती है। अलग-अलग दालें बदलकर खाने से भोजन में विविधता बनी रहती है।

राजमा में भी अच्छी मात्रा में फाइबर होता है। यह देर तक पेट भरा रखने में मदद कर सकता है। हालांकि, कुछ लोगों को राजमा खाने के बाद गैस या पेट फूलने की शिकायत होती है। इसे रातभर भिगोकर, पानी बदलकर और अच्छी तरह पकाकर खाने से पाचन आसान हो सकता है। शुरुआत में इसकी मात्रा कम रखना भी बेहतर रहता है।

क्या आटा मैगी को हेल्दी समझना सही है

पैकेट पर 'आटा' लिखा देखकर किसी नूडल्स को रोज खाने लायक हेल्दी फूड मान लेना ठीक नहीं है। उसमें कुछ फाइबर हो सकता है, लेकिन वह फिर भी प्रोसेस्ड फूड है। उसमें नमक, मसाला और दूसरे प्रोसेस्ड तत्व भी हो सकते हैं।

अगर कभी-कभार खा रहे हैं तो उसमें गाजर, मटर, शिमला मिर्च और बीन्स जैसी सब्जियां मिलाकर उसकी पौष्टिकता बढ़ाई जा सकती है। लेकिन इसे दाल, चना, फल या साबुत अनाज का विकल्प नहीं बनाया जाना चाहिए।

एवोकाडो और एडामेमे: अच्छे लेकिन हर घर के लिए जरूरी नहीं

एवोकाडो फाइबर और हेल्दी फैट का अच्छा स्रोत माना जाता है। समस्या इसकी कीमत और उपलब्धता है। केवल सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होने की वजह से इसे खरीदना जरूरी नहीं। अमरूद, चना और दाल जैसे भारतीय विकल्प कम खर्च में फाइबर दे सकते हैं।

इसी तरह एडामेमे यानी कच्ची सोयाबीन में फाइबर और प्रोटीन दोनों पाए जाते हैं। यह सलाद या हल्के स्नैक के रूप में लिया जा सकता है। फिर भी इसे फाइबर पाने की अनिवार्य शर्त मानने की जरूरत नहीं है।

चना और छोले क्यों हैं बजट फ्रेंडली विकल्प

भुना चना उन लोगों के लिए सुविधाजनक स्नैक है जिन्हें शाम को बिस्कुट, नमकीन या तला हुआ खाना खाने की आदत है। यह पेट को देर तक भरा रखने में मदद करता है। उबले चने को प्याज, टमाटर, खीरा और नींबू के साथ चाट की तरह भी खाया जा सकता है।

छोले भी फाइबर का अच्छा स्रोत हैं। लेकिन रेस्टोरेंट स्टाइल अधिक तेल वाले छोले और घर में कम तेल-मसाले से बने छोले के स्वास्थ्य प्रभाव एक जैसे नहीं होंगे। फाइबर के नाम पर बहुत अधिक तेल और मैदे की भटूरे वाली प्लेट खाना उद्देश्य को कमजोर कर सकता है।

अमरूद: महंगे फलों पर भारी देसी विकल्प

अमरूद इस सूची का सबसे व्यावहारिक फल नजर आता है। यह किफायती है, आसानी से मिलता है और इसे काटकर या साबुत खाया जा सकता है। इसका गूदा और खाने योग्य छिलका दोनों फाइबर देते हैं।

फाइबर के लिए फल का जूस पीने के बजाय पूरा फल खाना बेहतर है। जूस बनाते समय फल का काफी रेशा अलग हो सकता है और उसे तेजी से पी लेने के कारण पेट भरने का अनुभव भी कम होता है।

अलसी के बीज कैसे खाएं

अलसी के बीज कम मात्रा में अच्छा फाइबर देते हैं। इनमें हेल्दी फैट भी पाया जाता है। लेकिन साबुत अलसी कई बार बिना ठीक से पचे शरीर से बाहर निकल सकती है। इसे हल्का भूनकर दरदरा पीसना और दही, आटा, दलिया या सलाद में सीमित मात्रा में मिलाना अधिक व्यावहारिक तरीका है।

एकदम ज्यादा अलसी खाना सही नहीं है। फाइबर अचानक बढ़ाने से गैस, पेट फूलना या ऐंठन हो सकती है। साथ में पर्याप्त पानी पीना जरूरी है। किसी को आंतों की बीमारी, निगलने में परेशानी या लगातार पेट संबंधी समस्या हो तो डॉक्टर अथवा डाइटीशियन से सलाह लेकर ही डाइट में बड़ा बदलाव करना चाहिए।

रोज की डाइट में फाइबर कैसे बढ़ाएं

फाइबर बढ़ाने के लिए पूरी डाइट बदलने की जरूरत नहीं। छोटे बदलाव अधिक टिकाऊ होते हैं।

  • नाश्ते में मैदे की जगह दलिया, ओट्स या बेसन का विकल्प चुनें।
  • दोपहर और रात के भोजन में कम से कम एक कटोरी सब्जी रखें।
  • दाल, राजमा, चना और छोले को सप्ताह में बदल-बदलकर खाएं।
  • फलों का जूस बनाने के बजाय पूरा फल खाएं।
  • बिस्कुट या नमकीन की जगह भुना चना लिया जा सकता है।
  • फाइबर की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाएं और पर्याप्त पानी पिएं।

वीडियो की रैंकिंग से यह समझ आता है कि सबसे अच्छा फाइबर फूड केवल वही नहीं होता जिसमें प्रति 100 ग्राम सबसे ज्यादा फाइबर हो। कीमत, उपलब्धता, खाने की सामान्य मात्रा और उसे लंबे समय तक डाइट में बनाए रखने की सुविधा भी महत्वपूर्ण है। महंगे सुपरफूड के पीछे भागने के बजाय अमरूद, चना, दाल, राजमा और थोड़ी अलसी का संतुलित मेल अधिक व्यावहारिक रास्ता हो सकता है।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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