जानें क्या है पॉपकॉर्न लंग, क्यों गंभीर है इसका मामला (Pic: iStock)
Popcorn Lung Kya Hai: पॉपकॉर्न लंग - नाम सुनकर भले ही होठों पर हल्की मुस्कान आ जाए लेकिन यह एक गंभीर फेफड़ों की बीमारी है। मेडिकल की भाषा में इसे ब्रॉन्कियोलाइटिस ऑब्लिटेरन्स (Bronchiolitis Obliterans) या ब्रॉन्कियोलाइटिस ऑब्लिटेरन्स ऑर्गनाइजिंग न्यूमोनिया (BOOP) कहा जाता है। इस बीमारी में फेफड़ों की सबसे छोटी नलिकाओं (ब्रॉन्कियोल्स) में सूजन और स्कारिंग (ऊतक का सख्त होना) हो जाती है, जिससे सांस लेने में परेशानी और खून में ऑक्सीजन का स्तर घट जाता है।
फेफड़ों के स्कैन में अगर इन पर सफेद धब्बे दिखते हैं जो पॉपकॉर्न के फूटे हुए दानों जैसे लगते हैं - तो इस बीमारी की पुष्टि होती है। वैसे इस शब्द की उत्पत्ति अमेरिका में हुई इस बीमारी के पता चलने से जुड़ी है। दरअसल देखने में आया था कि माइक्रोवेव पॉपकॉर्न फैक्ट्री के कर्मचारियों को लंबे समय तक डायएसिटाइल (Diacetyl) नामक रासायनिक पदार्थ के संपर्क में रहने से सांस की समस्या होने लगी थी। यह रसायन पॉपकॉर्न में बटर जैसी खुशबू और स्वाद देने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। बाद में पाया गया कि लंबे समय तक इसे सांस के जरिए खींचने से यह ब्रॉन्कियोलाइटिस ऑब्लिटेरन्स की वजह बन गया।
दिल्ली के सीके बिरला हॉस्पिटल से बतौर डायरेक्टर – पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. विकास मित्तल बताते हैं कि पॉपकॉर्न लंग आमतौर पर हानिकारक रसायनों या विषैले पदार्थों को साँस के ज़रिए अंदर लेने से होता है। इसके प्रमुख इस कारण हैं:
डॉ. विकास मित्तल के अनुसार, इस बीमारी के लक्षण अक्सर अस्थमा या सीओपीडी (COPD) जैसे लगते हैं, जिससे शुरुआती पहचान मुश्किल हो जाती है। यहां जानें पॉपकॉर्न लंग के कुछ कॉमन लक्षण क्या हैं -
एक्सपर्ट्स यहां चेताते हैं कि यदि इलाज में देरी होती है, तो स्थिति रेस्पिरेटरी फेल्योर यानी फेफड़ों के फेल होने तक में बदल सकती है।
पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. शारदा जोशी का कहना है कि हालांकि इस बीमारी को कोई परफेक्ट ट्रीटमेंट नहीं है। लेकिन समय पर उपचार से बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। इसमें कॉर्टिकोस्टेरॉइड दवाएं – जैसे प्रेडनिसोन, जो सूजन को कम करती हैं या इम्यून सिस्टम से जुड़ी इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं दी जाती है। सांस में कठिनाई या ऑक्सीजन स्तर कम होने पर ऑक्सीजन थेरेपी दी जाती है।
पॉपकॉर्न लंग से बचने के लिए हानिकारक तत्वों से दूरी जरूरी है। इसके लिए धूम्रपान छोड़ना, वेपिंग से परहेज करना और प्रदूषण से बचना बहुत जरूरी है। डॉ. विकास मित्तल के अनुसार, पॉपकॉर्न लंग एक ऐसी बीमारी है जिसे रोकथाम और जल्दी पहचान के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है।
अगर आपको लगातार खांसी या सांस लेने में दिक्कत हो, तो इसे एलर्जी या मौसमी संक्रमण समझकर नज़रअंदाज़ न करें। समय रहते फेफड़ों के विशेषज्ञ से परामर्श लें।