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Times Network India Health Summit 2025: AI और स्वदेशी तकनीक से बदलेगा भारत का हेल्थ सिस्टम, डॉक्टरों ने बताई राह

Times Network India Health Summit 2025: आज टाइम्स नेटवर्क द्वारा 'आज टाइम्स नेटवर्क हेल्थ समिट 2025' का आयोजन किया गया। जिसमें देश के जाने-माने डॉक्टरों ने कहा कि भारत में सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए इनोवेशन और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल जरूरी है। डॉ. रणदीप गुलेरिया और डॉ. नरिंदर मेहरा ने कहा कि कम खर्च में बेहतर इलाज के लिए स्वदेशी तकनीक और रिसर्च को बढ़ावा देना ही समय की जरूरत है, ताकि हर नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पहुंच सके।

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Times Network India Health Summit 2025

Times Network India Health Summit 2025: आज टाइम्स नेटवर्क हेल्थ समिट 2025 का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर के बड़े डॉक्टर, नीति-निर्माता और हेल्थ एक्सपर्ट शामिल हुए। इस समिट में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात पर रही कि कैसे भारत में इलाज को सस्ता और सबके लिए सुलभ बनाया जा सकता है।

डॉ. रणदीप गुलेरिया और डॉ. नरिंदर मेहरा जैसे दिग्गज विशेषज्ञों ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि हम इनोवेशन यानी नवाचार और स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल करके एक ऐसा हेल्थ सिस्टम बनाएं जो हर व्यक्ति तक पहुंचे, चाहे वो शहर में हो या किसी छोटे गांव में। इस चर्चा का मकसद साफ था - 'हर भारतीय को मिले गुणवत्तापूर्ण इलाज, बिना जेब पर बोझ डाले।'

इनोवेशन से खुलेगी सस्ती हेल्थकेयर की राह

गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन और रेस्पिरेटरी मेडिसिन के चेयरमैन, AIIMS के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि भारत जैसे देश के लिए अब 'फ्रूगल इनोवेशन' यानी कम खर्च में असरदार तकनीक की जरूरत है।

उन्होंने कहा, 'देश में हेल्थकेयर की चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। हमें नीतियों को सिर्फ बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारना होगा। टेक्नोलॉजी हमारे पास है, बस सही दिशा में उसका इस्तेमाल जरूरी है।'

कम खर्च में बेहतर इलाज ही असली लक्ष्य

डॉ. गुलेरिया ने बताया कि अगर डिजिटल तकनीक, स्वदेशी उपकरण और स्मार्ट हेल्थ मॉडल अपनाए जाएं, तो इलाज की लागत घट सकती है और मरीजों तक सेवा तेजी से पहुंच सकती है। उनका कहना था, 'हर व्यक्ति को, उसकी आर्थिक स्थिति चाहे जो भी हो, अच्छी स्वास्थ्य सेवा मिलनी चाहिए। यही हमारा मिशन होना चाहिए।'

नीतियां तो हैं, पर लागू करना सबसे बड़ी चुनौती

डॉ. गुलेरिया, जो AIIMS के पूर्व निदेशक भी रह चुके हैं, ने कहा कि सरकार ने कई अच्छी योजनाएं बनाई हैं, लेकिन असली दिक्कत उन्हें लागू करने की है। उन्होंने कहा, 'नीतियां बनती हैं, लेकिन जब तक उनका असर आम लोगों की जिंदगी में नहीं दिखेगा, तब तक बदलाव अधूरा रहेगा। हर नागरिक तक हेल्थकेयर की पहुंच सुनिश्चित करना ही सबसे बड़ी जरूरत है।'

भारत में अब भी कई स्वास्थ्य योजनाएं फंड और संसाधनों की कमी से जूझ रही हैं। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में मेडिकल स्टाफ, उपकरण और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है।

ग्रामीण-शहरी अंतर मिटाने पर जोर

ICMR के एमेरिटस साइंटिस्ट और AIIMS के पूर्व डीन डॉ. नरिंदर मेहरा ने कहा कि भारत में स्वास्थ्य असमानता (Health Inequality) का बड़ा कारण है - संसाधनों का असमान बंटवारा।

उन्होंने कहा, 'हमें रिसर्च पर ज्यादा ध्यान देना होगा ताकि हम समझ सकें कि हेल्थ इक्विटी में इतनी खाई क्यों है। साथ ही, एआई (Artificial Intelligence) जैसे डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल करके हमें शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच का अंतर मिटाना होगा।'

डॉ. मेहरा ने आगे कहा, 'हमें प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं (Primary Healthcare) को प्राथमिकता देनी चाहिए। शहरों के बड़े अस्पतालों से ज्यादा ध्यान गांवों के स्वास्थ्य केंद्रों पर होना चाहिए, जहां सबसे ज्यादा जरूरत है।'

भारत की असली चुनौती है असमान स्वास्थ्य व्यवस्था

भारत में सबसे बड़ी दिक्कत है स्वास्थ्य संसाधनों का असमान बंटवारा। जहां शहरों में बड़े-बड़े अस्पताल और आधुनिक मशीनें हैं, वहीं गांवों में एक डॉक्टर तक मिलना मुश्किल होता है। कई बार लोगों को छोटे इलाज के लिए भी शहर जाना पड़ता है, जिससे खर्च और दिक्कत दोनों बढ़ जाते हैं।

नवाचार बिना सस्ती हेल्थकेयर मुमकिन नहीं

टाइम्स नेटवर्क हेल्थ समिट 2025 से यह बात साफ हुई कि भारत में सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य व्यवस्था का सपना तभी पूरा होगा जब टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और नीति - तीनों मिलकर काम करें। जरूरत है एक ऐसी सोच की, जो गांव-गांव तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाए और हर नागरिक को यह भरोसा दिलाए कि 'बीमारी चाहे जो भी हो, इलाज हर किसी का हक है।'

Vineet
विनीत author

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विष... और देखें

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