बचपन का ये संक्रमण बढ़ा सकता है आगे चलकर ब्लैडर कैंसर का खतरा, नई स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा
- Authored by: Vineet
- Updated Dec 6, 2025, 10:56 AM IST
हाल ही में एक नई स्टडी सेल रिपोर्ट्स मेडिसिन में दावा किया गया है कि बचपन में होने वाला एडेनोवायरस संक्रमण आगे चलकर ब्लैडर कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि यह वायरस शरीर में लंबे समय तक छिपा रहकर डीएनए में ऐसे बदलाव कर सकता है जो भविष्य में कैंसर का कारण बन सकते हैं। ये शोध यूरोप के विशेषज्ञों ने किया है, जो वायरल संक्रमण और कैंसर के बीच के रिश्ते को लेकर नए सवाल उठाता है।
एडेनोवायरस क्या है और क्यों होता है?
हम अक्सर समझते हैं कि बच्चों में होने वाले वायरस इंफेक्शन बस कुछ दिनों की परेशानी होते हैं, लेकिन सेल रिपोर्ट्स मेडिसिन में पब्लिश हुई एक नई स्टडी ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है। इस शोध में पाया गया कि बचपन में होने वाला एक आम संक्रमण एडेनोवायरस आगे चलकर ब्लैडर कैंसर का जोखिम बढ़ा सकता है। स्टडी बताती है कि यह वायरस कई सालों तक शरीर में छिपा रहकर कोशिकाओं के डीएनए को बदल सकता है, जो भविष्य में गंभीर बीमारी की शुरुआत बन सकता है।
एडेनोवायरस क्या है और क्यों होता है?
एडेनोवायरस एक आम वायरल संक्रमण है जो बच्चों में बुखार, खांसी, गले में दर्द और कभी-कभी पेट से जुड़ी दिक्कतें पैदा करता है। डॉक्टर भी इसे अक्सर सामान्य संक्रमण मानते हैं क्योंकि ज्यादातर लोग इससे ठीक हो जाते हैं। लेकिन स्टडी बताती है कि कुछ मामलों में यह वायरस शरीर में पूरी तरह खत्म नहीं होता और चुपचाप कोशिकाओं में रह जाता है।
स्टडी में वायरल डीएनए और ब्लैडर कोशिकाओं का संबंध मिला
शोधकर्ताओं ने ब्लैडर कैंसर से पीड़ित कई मरीजों के ऊतक (टिश्यू) की जांच की। हैरानी की बात ये रही कि इनमें कई मरीजों के ब्लैडर टिश्यू में एडेनोवायरस का डीएनए मौजूद मिला। इसका मतलब यह हो सकता है कि वायरस ने सालों पहले शरीर में प्रवेश किया था और धीरे-धीरे कोशिकाओं में बदलाव लाकर खतरा बढ़ाया।
वायरस कैसे बढ़ाता है भविष्य में कैंसर का जोखिम
स्टडी में कहा गया है कि एडेनोवायरस कोशिकाओं के डीएनए को प्रभावित कर सकता है। जब कोशिकाओं के जनरेट होने का प्राकृतिक सिस्टम बिगड़ता है, तो कैंसर बनने की संभावना बढ़ जाती है। यानी बचपन में हुआ संक्रमण शरीर में 'साइलेंट मोड' में रहकर आगे जाकर नुकसान पहुंचा सकता है।
किस तरह छिपकर रह सकता है यह संक्रमण
रिसर्चर्स ने बताया कि एडेनोवायरस कुछ लोगों के शरीर में सोए हुए रूप में रह सकता है। भले ही बाहरी लक्षण खत्म हो जाएं, लेकिन वायरस कोशिकाओं में अपनी कॉपी छोड़ देता है। यही डीएनए कॉपी आगे चलकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की शुरुआत का कारण बन सकती है।
इस स्टडी के बाद एक्सपर्ट्स क्या सलाह दे रहे हैं
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह स्टडी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बचपन के संक्रमण और भविष्य के कैंसर के बीच संभावित कड़ी को सामने लाती है। उनकी सलाह है कि वायरल इंफेक्शन को कभी हल्के में न लें, खासकर अगर बार-बार वायरल सिम्पटम दिखें या लंबे समय तक ठीक न हों। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखना और समय पर इलाज कराना बेहद जरूरी है।
क्या इससे माता-पिता को घबराने की जरूरत है
नहीं, लेकिन जागरूक रहने की जरूरत जरूर है। यह स्टडी सिर्फ एक संकेत है कि एडेनोवायरस जैसे संक्रमणों का शरीर पर लंबे समय में क्या असर हो सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर बच्चा जिसे एडेनोवायरस हुआ है, उसे आगे कैंसर होगा। लेकिन अब डॉक्टर और वैज्ञानिक इस दिशा में और गहराई से शोध कर रहे हैं।