हेल्थ

बच्चों की सेहत में बाधा बन रहा स्मार्टफोन, जानें कैसे डालता है सेहत पर असर और क्या हैं बचाव के उपाय

आजकल बहुत से बच्चे मोबाइल फोन से जुड़ चुके हैं। जो उनकी न केवल मेंटल बल्कि फिजिकल हेल्थ पर भी बुरा असर डाल रहा है। आमतौर पर ये सवाल आपने सुना होगा कि स्मार्टफोन लाभकारी है या हानिकारक? आज हम आपको बताएंगे कि कैसे स्मार्टफोन बच्चों की सेहत को प्रभावित कर रहा है।

Image

smart phone side effects on child health

आज बदलते समय में जब बच्चों की पढ़ाई से लेकर मनोरंजन तक सब कुछ मोबाइल में आ चुका है। तो ऐसे में इससे दूरी बनाना काफी मुश्किल काम है। बच्चे के जन्म से पहले से लेकर बड़े होने तक सारी जानकारियां मोबाइल पर उपलब्ध होती हैं। स्मार्टफोन यूज करते बच्चे भले ही आपको काफी स्मार्ट दिखते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं ये आपके बच्चों की सेहत को खोखला कर रहा है। जी हां आज हम आपको बताएंगे कि कैसे स्मार्टफोन बच्चों की सेहत को प्रभावित कर रहा है। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से...

जरूरत से ज्यादा लत

स्मार्टफोन और इंटरनेट का इस्तेमाल आज लोगों के लिए जरूरत से ज्यादा लत बन चुकी है। स्मार्टफोन एक तरफ आपके जीवन को आसान बना रहा है, तो वहीं दूसरी ओर आपके बच्चों की सेहत पर भी असर डाल रहा है। बहुत सी जरूरतों को आसान करने वाला स्मार्टफोन आज जरूरत से बढ़कर लत बन चुका है। यदि आप भी दिन भर मोबाइल में लगे रहते हैं, तो इसका असर आपके बच्चों के दिमाग पर भी पर पड़ता है।

फिजिकल हेल्थ पर असर

गैजेट्स का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों की हेल्थ पर काफी बुरा असर डाल रहा है। लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहना उनकी आंखों को खराब कर देता है। जिससे आंखों में जलन, धुंधला दिखाई देना और मायोपिया जैसे रोगों की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा, मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल से बच्चों की फिजिकल एक्टिविटी कम होती जा रही है। जिसके परिणामस्वरूप मोटापा, हड्डियों की कमजोरी और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याएं पैदा हो रही हैं। इन सभी कारणों के चलते बच्चों की इम्यूनिटी भी कमजोर हो रही है, जो उन्हें रोगों का शिकार बना देती है।

बचाव के उपाय

  1. स्क्रीन‑फ्री जोन और परिवार के साथ टाइम बिताने के लिए साथ खाना, पढ़ाई और सोने के समय फोन को दूर रखें।
  2. बच्चों की मोबाइल का लत को छुड़वाने के लिए माता‑पिता खुद स्क्रीन टाइम कम करें, ताकि वह बच्चों के सामने उदाहरण बन सकें।
  3. बच्चों को ऑनलाइन और ऑफलाइन के बीच का बैलेंस समझाएं। किताबें पढ़ना, खेलना और आपस में बातचीत जैसी गतिविधियां भी जरूरी हैं।

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

और पढ़ें
End of Article