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रीढ़ की यह छिपी हुई समस्या किशोरों को बना सकती है उम्रभर का मरीज, माता-पिता की ये 5 लापरवाहियां पड़ सकती हैं भारी

Scoliosis in Teenagers: ज्यादातर पेरेंट्स नहीं जानते हैं कि किशोरावस्था में होने वाली स्कोलियोसिस नाम की रीढ़ की समस्या अक्सर बिना दर्द के बच्चों में बढ़ती रहती है। जानिए माता-पिता की कौन-सी लापरवाहियां इस समस्या को बढ़ा सकती हैं।

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बच्चों में रीढ़ की इस समस्या को पेरेंट्स समझते हैं नॉर्मल

Scoliosis in Teenagers: बच्चों की टीनएज यानी किशोरावस्था में शरीर तेजी से बदलता है। कभी अचानक बच्चों की लंबाई बढ़ जाती है, तो कभी उनके चलने-फिरने का तरीका बदल जाता है। ऐसे में माता-पिता भी इन बदलावों को बढ़ती उम्र का हिस्सा मान लेते हैं। लेकिन कई बार इन्हीं सामान्य दिखने वाले बदलावों के पीछे एक ऐसी समस्या छिपी होती है, जो समय रहते पकड़ में न आए तो आगे चलकर बड़ी परेशानी बन सकती है।

ऐसी ही एक समस्या है बच्चों में रीढ़ की हड्डी का धीरे-धीरे टेढ़ा होना, जिसे मेडिकल भाषा में स्कोलियोसिस (Scoliosis In Children) कहते हैं। अमृता अस्पताल, फरीदाबाद के ऑर्थोपेडिक्स एवं ऑर्थो स्पाइन सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. तरुण सूरी बताते हैं कि यह समस्या अक्सर 10 से 15 साल की उम्र के बीच शुरू होती है। शुरुआत में दर्द नहीं होता, इसलिए बच्चे और माता-पिता दोनों इसे नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर समय रहते पहचान न हो, तो रीढ़ का झुकाव बढ़ सकता है और भविष्य में इलाज भी मुश्किल हो सकता है।

कंधे और कमर में बदलाव को मामूली समझना

कई बार बच्चे का एक कंधा दूसरे से थोड़ा ऊंचा दिखने लगता है। कुछ बच्चों की कमर एक तरफ ज्यादा उभरी हुई नजर आती है या कपड़े पहले की तरह बराबर फिट नहीं होते। माता-पिता अक्सर सोचते हैं कि यह बैठने-उठने की आदत या बढ़ती उम्र का असर है। लेकिन डॉ. तरुण सूरी कहते हैं कि यह रीढ़ की समस्या का शुरुआती संकेत भी हो सकता है।

हर चीज का दोष मोबाइल और गलत बैठने को देना

आजकल जब भी बच्चों में कोई शारीरिक बदलाव दिखता है तो सबसे पहले मोबाइल, लैपटॉप या गलत पोस्चर को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है। लेकिन रीढ़ के टेढ़े होने की यह समस्या केवल गलत बैठने से नहीं होती। इसलिए अगर शरीर में लगातार बदलाव दिख रहे हैं, तो उन्हें नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है।

पहले किसी को समस्या रही हो तो रहें ज्यादा सतर्क

विशेषज्ञों का मानना है कि कई मामलों में यह समस्या परिवार के अन्य सदस्यों में भी देखी गई है। अगर माता-पिता, भाई या बहन में कभी रीढ़ से जुड़ी ऐसी परेशानी रही हो, तो बच्चों पर थोड़ा ज्यादा ध्यान देना चाहिए। छोटी-सी असमानता भी समय रहते पकड़ में आ जाए तो आगे की परेशानी से बचा जा सकता है।

बढ़ती उम्र में बच्चों पर नजर रखना जरूरी

10 से 15 साल की उम्र वह समय होता है जब बच्चों का शरीर सबसे तेजी से बढ़ता है। इसी दौरान यह समस्या भी तेजी से बढ़ सकती है। खासकर लड़कियों में इसका खतरा थोड़ा ज्यादा देखा जाता है। इसलिए माता-पिता को समय-समय पर बच्चों के कंधों, कमर और खड़े होने के तरीके पर ध्यान देना चाहिए।

जांच में देरी करना पड़ सकता है महंगा

भारत में अभी भी बहुत से लोगों को इस बीमारी के बारे में जानकारी नहीं है। यही वजह है कि कई बच्चे तब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं, जब रीढ़ का झुकाव साफ दिखाई देने लगता है। जबकि शुरुआती चरण में पहचान होने पर नियमित निगरानी, खास एक्सरसाइज और फिजियोथेरेपी की मदद से समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है। ज्यादातर मामलों में सर्जरी की जरूरत भी नहीं पड़ती।

समय रहते पहचान ही सबसे बड़ा बचाव

डॉ. तरुण सूरी कहते हैं कि माता-पिता को डॉक्टर बनने की जरूरत नहीं है, लेकिन बच्चों के शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। अगर कंधे बराबर न दिखें, कमर टेढ़ी लगे या कपड़े अचानक असमान फिट होने लगें, तो इसे सिर्फ बढ़ती उम्र का बदलाव मानकर छोड़ना सही नहीं है। कई बार शरीर हमें पहले ही संकेत दे देता है, जरूरत सिर्फ उन्हें समझने और समय पर कदम उठाने की होती है।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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