Samantha Ruth Prabhu Pregnancy: फिल्म अभिनेत्री सामंथा रुथ प्रभु की प्रेग्नेंसी की खबर ने न सिर्फ उनके फैंस को खुश किया है, बल्कि उन लाखों महिलाओं के लिए नई उम्मीद जगा दी है जो किसी न किसी ऑटोइम्यून बीमारी से जूझ रही हैं। करीब तीन सालों तक मायोसाइटिस जैसी दुर्लभ बीमारी का सामना करने के बाद मातृत्व की ओर बढ़ता उनका यह कदम इस बात का प्रमाण है कि सही इलाज, बेहतर योजना और चिकित्सकीय निगरानी के साथ ऑटोइम्यून रोगों के बावजूद हेल्दी प्रेग्नेंसी संभव है। आइए जानते हैं क्या है ये रोग (Myositis And Pregnancy) और समंथा ने कैसे पाई इससे निजात।
क्या है मायोसाइटिस रोग?
मायोसाइटिस एक ऐसी ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपनी मांसपेशियों पर हमला करने लगती है। इसके कारण मांसपेशियों में सूजन, कमजोरी और बेहद थकान जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। पहले इस तरह की बीमारियों से पीड़ित महिलाओं को कंसीव करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता था लेकिन आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने इस धारणा को काफी हद तक बदल दिया है।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: बच्चों में Vitiligo के लक्षण क्या हैं, विटिलिगो को ठीक होने में कितना समय लगता है?
ऑटोइम्यून रोग और प्रेग्नेंसी का संबंध
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार ऑटोइम्यून बीमारी से पीड़ित महिलाओं के लिए गर्भधारण का सबसे उपयुक्त समय वह होता है जब बीमारी नियंत्रण में हो या रेमिशन की स्थिति में पहुंच जाए। यदि बीमारी एक्टिव अवस्था में हो तो गर्भपात, समय से पहले प्रसव और अन्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए प्रेग्नेंसी की योजना बनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना बेहद जरूरी होता है।
डॉक्टर की सलाह जरूर लें
मायोसाइटिस जैसी ऑटोइम्यून बीमारी में प्री-प्रेग्नेंसी काउंसलिंग इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें डॉक्टर बीमारी की स्थिति का मूल्यांकन करते हैं और दवाओं की समीक्षा करते हैं। इसके अलावा इस समय आपकी पोषण संबंधी आवश्यकताओं पर ध्यान देते हैं और संभावित जोखिमों का आकलन करते हैं। इससे मां और बच्चा दोनों के लिए सेफ्टी प्लान तैयार किया जा सके।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: गर्दन की नस चढ़ जाए तो क्या करें? जानें घरेलू उपाय, तुरंत दिखेगा असर
हालांकि अधिकांश महिलाओं की गर्भावस्था सफल रहती है, फिर भी उन्हें उच्च रक्तचाप, प्रीक्लेम्पसिया, कम वजन वाले शिशु के जन्म और प्लेसेंटा से जुड़ी कुछ जटिलताओं का थोड़ा अधिक जोखिम हो सकता है। ऐसे मामलों में रूमेटोलॉजिस्ट और स्त्री रोग विशेषज्ञ की संयुक्त देखरेख बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने में मदद करती है।
सामंथा बनीं लाखों महिलाओं की उम्मीद
सामंथा रुथ प्रभु की यह हेल्थ यात्रा एक प्रेरणादायी संदेश देती है कि ऑटोइम्यून बीमारी आपकी मां बनने की राह में अंतिम बाधा नहीं है। सही समय पर प्रेग्नेंसी की योजना, एक्स्पर्ट्स की निगरानी और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ महिलाएं इस हेल्थ कंडीशन के बाद भी मातृत्व सुख का अनुभव कर सकती हैं। उनकी कहानी उन सभी महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण है जो स्वास्थ्य चुनौतियों के बावजूद अपने परिवार का सपना पूरा करना चाहती हैं।
