Russia plague news: रूस में एक लैब कर्मचारी की मौत के बाद न्यूमोनिक प्लेग को लेकर चिंता बढ़ी है। यह फेफड़ों का गंभीर इंफेक्शन है, जो मरीज के करीबी संपर्क में आने वाले लोगों तक फैल सकता है। हालांकि, अभी रूस में प्लेग फैलने की पुष्टि नहीं हुई है। जानिए इस बीमारी के लक्षण, फैलने का तरीका और इलाज।
इन दिनों रूस में प्लेग को लेकर चर्चा हो रही है। यह चर्चा साइबेरिया के इरकुत्स्क स्थित एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक महिला कर्मचारी की मौत के बाद शुरू हुई। उन्हें गंभीर निमोनिया हुआ था। इसके बाद अस्पताल में पाबंदियां लगाई गईं और उनके संपर्क में आए लोगों की निगरानी शुरू हुई। कुछ स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में न्यूमोनिक प्लेग की आशंका जताई गई।
हालांकि 6 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी में प्लेग की पुष्टि नहीं हुई है। रूसी अधिकारियों ने मौत की वजह अज्ञात कारण वाला निमोनिया बताई है। लैब में बैक्टीरिया वाली टेस्ट ट्यूब टूटने की खबरें भी आई हैं, लेकिन अधिकारियों के मुताबिक ऐसी दुर्घटना का सबूत नहीं मिला है।
न्यूमोनिक प्लेग क्या है
न्यूमोनिक प्लेग मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है। इसकी वजह यर्सिनिया पेस्टिस (Yersinia pestis) नाम का बैक्टीरिया है। इंफेक्शन होने पर मरीज को बुखार, खांसी, सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी हो सकती है और हालत तेजी से बिगड़ सकती है।
यहां निमोनिया और न्यूमोनिक प्लेग का फर्क समझना जरूरी है। निमोनिया कई तरह के बैक्टीरिया, वायरस या दूसरे कारणों से हो सकता है। जबकि न्यूमोनिक प्लेग एक खास बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है। यानी हर गंभीर निमोनिया प्लेग नहीं होता।
चूहों से जुड़े प्लेग से कैसे अलग है
प्लेग का नाम आते ही चूहों का खयाल आता है। लेकिन अक्सर इंसान तक इंफेक्शन पहुंचाने में चूहों पर रहने वाले संक्रमित पिस्सुओं की भूमिका होती है। संक्रमित पिस्सू किसी इंसान को काट ले तो बैक्टीरिया उसके शरीर में पहुंच सकता है। इस रास्ते से आमतौर पर ब्यूबोनिक प्लेग होता है। इस प्लेग में शरीर के लिम्फ नोड्स सूज जाते हैं और दर्द करते हैं। यह सूजन बगल, गर्दन या जांघ के जोड़ के पास हो सकती है।
न्यूमोनिक प्लेग में इंफेक्शन फेफड़ों में होता है। इसका बड़ा फर्क यह है कि मरीज की खांसी से निकली संक्रमित बूंदें दूसरे व्यक्ति को भी बीमार कर सकती हैं। दोनों बीमारियों की वजह एक ही बैक्टीरिया है। इसलिए नोट करें कि यह कोई नया ‘रूसी प्लेग’ नहीं है।
ब्यूबोनिक प्लेग का इलाज न मिले तो बैक्टीरिया फेफड़ों तक पहुंचकर न्यूमोनिक प्लेग भी पैदा कर सकता है।
क्या बिना चूहों के संपर्क में आए भी यह हो सकता है
न्यूमोनिक प्लेग होने के लिए चूहे या पिस्सू के संपर्क में आना जरूरी नहीं है। अगर कोई व्यक्ति न्यूमोनिक प्लेग के मरीज के बहुत करीब हो और खांसी से निकली संक्रमित बूंदें सांस के साथ अंदर ले ले, तो उसे इंफेक्शन हो सकता है। संक्रमित जानवर से भी ऐसा हो सकता है। CDC के अनुसार, बीमार बिल्लियों के करीबी संपर्क से न्यूमोनिक प्लेग के मामले सामने आए हैं।
क्या यह हवा से बहुत तेजी से फैलता है
यह कहना कि प्लेग ‘हवा में फैल गया है’- कायदे से सही नहीं है। न्यूमोनिक प्लेग का व्यक्ति से व्यक्ति में फैलना आमतौर पर मरीज के साथ सीधे और करीबी संपर्क से जुड़ा होता है। मरीज की खांसी से निकली बैक्टीरिया वाली बूंदें संक्रमण का रास्ता बनती हैं। इसलिए अस्पताल में संदिग्ध मरीज को अलग रखा जाता है। उसकी देखभाल करने वाले स्टाफ के लिए मास्क और जरूरी सुरक्षा उपाय अपनाए जाते हैं। एक संदिग्ध केस मिलने का मतलब पूरे शहर के लोगों का संक्रमित होना नहीं है।
न्यूमोनिक प्लेग के लक्षण क्या हैं
इसके शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू या दूसरे इंफेक्शन जैसे लग सकते हैं। फर्क यह है कि सांस से जुड़ी परेशानी तेजी से बढ़ सकती है।
इन संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है-
- बुखार और सिरदर्द।
- बहुत ज्यादा कमजोरी।
- खांसी के साथ सीने में दर्द।
- सांस फूलना या सांस लेने में तकलीफ।
- कभी पानी जैसा या खून मिला बलगम।
संक्रमित बूंदें सांस के साथ अंदर जाने के बाद कुछ मामलों में लगभग एक दिन में भी लक्षण शुरू हो सकते हैं। लेकिन केवल खांसी या बुखार से प्लेग का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। डॉक्टर के लिए यह जानना भी जरूरी है कि मरीज किसी संभावित संक्रमित व्यक्ति या जानवर के संपर्क में आया था या नहीं।
कितना खतरनाक है, क्या इलाज मौजूद है
न्यूमोनिक प्लेग गंभीर बीमारी है। बिना इलाज के यह जानलेवा हो सकती है। इसलिए संदिग्ध केस में जल्दी पहचान और इलाज सबसे जरूरी हैं।
इसका इलाज एंटीबायोटिक से किया जाता है। WHO के मुताबिक, लक्षण शुरू होने के शुरुआती 24 घंटे में बीमारी की पहचान और इलाज मिलने पर ठीक होने की संभावना अच्छी रहती है।
लेकिन इसका मतलब 24 घंटे तक घर पर इंतजार करना नहीं है। संभावित संक्रमित व्यक्ति के संपर्क के बाद बुखार, खांसी या सांस की परेशानी हो तो तुरंत मेडिकल मदद लें। डॉक्टर को संपर्क और हाल की यात्रा की पूरी जानकारी दें।
रूस में क्वारंटीन किए गए लोग क्या संक्रमित हैं
क्वारंटीन में होना और प्लेग का मरीज होना अलग बातें हैं। किसी गंभीर इंफेक्शन की आशंका में संपर्क में आए लोगों को एहतियात के तौर पर निगरानी में रखा जाता है। उनमें से कई लोगों को कोई लक्षण भी नहीं होते।
रॉयटर्स ने रूसी मीडिया के हवाले से करीब 200 लोगों को क्वारंटीन किए जाने की जानकारी दी है। इसे 200 प्लेग मरीज मिलने की खबर समझना गलत होगा। WHO ने उपलब्ध जानकारी के आधार पर आम लोगों के लिए स्वास्थ्य जोखिम कम बताया है। आगे की जांच में नई जानकारी मिलने पर यह आकलन बदल सकता है।
भारत के लोगों को कितना चिंतित होना चाहिए
रूस की इस खबर से भारत में प्लेग फैलने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। अभी वहां संबंधित कर्मचारी की बीमारी की वजह भी साफ होनी बाकी है। आगे खतरे का आकलन इस बात से होगा कि जांच में प्लेग की पुष्टि होती है या नहीं। अगर होती है, तो क्या संपर्क में आए दूसरे लोग भी संक्रमित मिले हैं और क्या संक्रमण उनसे आगे पहुंचा है।
