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बचपन का बढ़ता वजन क्यों है खतरनाक, भविष्य की बीमारी का कनेक्शन क्या है, नई स्टडी में हुआ खुलासा

Childhood Body Weight Linked to Future Disease Risk: हाल ही में एक नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि 10 साल की उम्र में बढ़ा हुआ BMI और 18 साल तक तेजी से वजन बढ़ना भविष्य में डायबिटीज और हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकता है। जानिए बचपन का मोटापा कैसे बन सकता है बड़ी बीमारी की वजह और क्या कहती है रिसर्च।

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बचपन के मोटापे और बीमारियों का क्या है कनेक्शन

Childhood Body Weight Linked to Future Disease Risk: आजकल बच्चों का लाइफस्टाइल पहले जैसा नहीं रहा। बाहर खेलने की जगह मोबाइल, जंक फूड और कम फिजिकल एक्टिविटी ने ले ली है। कई बार हमें लगता है कि 'अरे बच्चा है, अभी मोटा है तो क्या हुआ, बड़ा होकर ठीक हो जाएगा।' लेकिन हाल ही में आई एक नई स्टडी ने इस सोच पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यह रिसर्च University of Bristol के शोधकर्ताओं द्वारा की गई है। यह स्टडी प्रतिष्ठित जर्नल PLOS Medicine में प्रकाशित हुई है। रिसर्च बताती है कि अगर 10 साल की उम्र में बच्चे का BMI ज्यादा है और 18 साल तक उसका वजन तेजी से बढ़ता है, तो आगे चलकर डायबिटीज और हार्ट डिजीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। यानी बचपन का बढ़ता वजन सिर्फ उस समय की बात नहीं, बल्कि भविष्य की सेहत से जुड़ा बड़ा संकेत हो सकता है। आइए समझते हैं इस स्टडी में क्या सामने आया।

10 साल की उम्र में BMI क्यों है अहम संकेत

स्टडी में पाया गया कि 10 साल की उम्र में बॉडी मास इंडेक्स यानी BMI का स्तर भविष्य की बीमारियों से जुड़ा हो सकता है। जिन बच्चों का BMI इस उम्र में ज्यादा था, उनमें आगे चलकर टाइप 2 डायबिटीज और दिल की बीमारी का खतरा अधिक देखा गया। इसका मतलब यह नहीं कि हर मोटा बच्चा बीमार ही होगा, लेकिन यह जरूर है कि ज्यादा BMI एक चेतावनी संकेत हो सकता है।

10 से 18 साल के बीच तेजी से बढ़ता वजन

रिसर्च में सिर्फ 10 साल की उम्र ही नहीं, बल्कि 10 से 18 साल के बीच वजन बढ़ने की रफ्तार पर भी ध्यान दिया गया। जिन बच्चों का वजन किशोरावस्था में तेजी से बढ़ा, उनमें मेटाबॉलिक बीमारियों का रिस्क ज्यादा पाया गया। यानी सिर्फ मोटापा नहीं, बल्कि वजन बढ़ने की स्पीड भी अहम फैक्टर है।

डायबिटीज और हार्ट डिजीज का सीधा कनेक्शन

स्टडी के अनुसार, बचपन और किशोरावस्था में बढ़ा हुआ वजन शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस और ब्लड शुगर असंतुलन की शुरुआत कर सकता है। यही आगे चलकर टाइप 2 डायबिटीज का कारण बन सकता है। साथ ही, ज्यादा फैट शरीर की ब्लड वेसल्स और हार्ट पर दबाव डालता है, जिससे हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है।

क्यों जरूरी है समय रहते ध्यान देना

अक्सर माता-पिता सोचते हैं कि “बच्चा है, बढ़ती उम्र में सब ठीक हो जाएगा।” लेकिन स्टडी बताती है कि बचपन से ही हेल्दी आदतें जरूरी हैं। संतुलित खानपान, रोजाना फिजिकल एक्टिविटी और स्क्रीन टाइम पर कंट्रोल जैसे छोटे कदम आगे की बड़ी बीमारियों से बचाव कर सकते हैं।

क्या है इस स्टडी का बड़ा मैसेज

इस रिसर्च का साफ संदेश है कि बच्चों का वजन सिर्फ दिखने का मुद्दा नहीं, बल्कि भविष्य की सेहत से जुड़ा मामला है। अगर 10 साल की उम्र से ही BMI पर ध्यान दिया जाए और किशोरावस्था में वजन बढ़ने की रफ्तार को कंट्रोल किया जाए, तो डायबिटीज और दिल की बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

पेरेंट्स ध्यान रखें कि बचपन की छोटी लापरवाही, बड़े होकर भारी पड़ सकती है। इसलिए बच्चों की सेहत को “अभी छोटा है” कहकर नजरअंदाज न करें, क्योंकि यही उम्र उनकी पूरी जिंदगी की नींव तैयार करती है।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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