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महिलाओं के लिए राहत! अब गर्भाशय के कैंसर समझना होगा आसान, DNA की नई खोज में सामने आए 5 रिस्क फैक्टर्स

DNA Risk Factors Related To Ovarian Cancer In Hindi: गर्भाशय कैंसर को लेकर नई रिसर्च ने महिलाओं के लिए राहत की खबर दी है। वैज्ञानिकों ने DNA से जुड़े पांच नए रिस्क फैक्टर्स खोजे हैं, जिससे इस बीमारी को पहले ही समझना आसान होगा। जानिए क्या है NAV3 जीन और कैसे यह खोज कैंसर की रोकथाम और उपचार में नई उम्मीद जगाती है।

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DNA Risk Factors Related To Ovarian Cancer In Hindi

DNA Risk Factors Related To Ovarian Cancer In Hindi: गर्भाशय कैंसर यानी एंडोमेट्रियल कैंसर महिलाओं में तेजी से बढ़ने वाली बीमारियों में गिना जाता है। कई बार इसकी पहचान देर से होती है, जिससे इलाज मुश्किल हो जाता है। लेकिन हाल ही में एक बड़ी रिसर्च ने महिलाओं के लिए राहत भरी खबर दी है। वैज्ञानिकों ने DNA से जुड़े पांच नए रिस्क फैक्टर्स खोजे हैं। इस खोज से अब गर्भाशय कैंसर को समझना आसान होगा और इसके खतरे को पहले से पहचान पाना भी संभव हो सकेगा। खास बात यह है कि इसमें एक NAV3 नामक जीन पर भी खास रोशनी डाली गई है, जो कैंसर रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है।

अंतरराष्ट्रीय रिसर्च से मिली नई जानकारी

हैनोवर मेडिकल स्कूल सहित कई देशों के वैज्ञानिकों ने लगभग 17 हजार मरीजों और करीब 2.9 लाख स्वस्थ महिलाओं के DNA का तुलनात्मक अध्ययन किया। इस अध्ययन से पता चला कि DNA में पांच ऐसे नए लोसी (स्थान) हैं जो एंडोमेट्रियल कैंसर के जोखिम को बढ़ाते हैं।

सिर्फ 5% तक सीमित नहीं रहा खतरा

पहले तक यह माना जाता था कि गर्भाशय कैंसर का संबंध ज्यादातर Lynch या Cowden सिंड्रोम जैसी स्थितियों से होता है, जो कुल मामलों का केवल 5% हिस्सा है। लेकिन अब यह रिसर्च बताती है कि DNA के ये नए फैक्टर्स भी बीमारी को ट्रिगर कर सकते हैं।

NAV3 जीन की अहमियत

इस स्टडी में NAV3 नामक जीन भी सामने आया, जिसे ट्यूमर रोकने वाला जीन माना जा रहा है। अगर यह निष्क्रिय हो जाए तो कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं, जबकि ज्यादा सक्रिय होने पर सेल की मौत हो जाती है। यह खोज भविष्य में नए इलाज की दिशा दिखा सकती है।

जोखिम पहचान में नई उम्मीद

इन पांच नए DNA फैक्टर्स के जुड़ने से गर्भाशय कैंसर से जुड़े कुल जेनेटिक संकेतक अब 21 हो गए हैं। इसका मतलब है कि महिलाओं के व्यक्तिगत जोखिम की पहचान पहले से ज्यादा आसान और सटीक हो सकेगी।

भविष्य के इलाज की दिशा

जैसे-जैसे इन जीनों की भूमिका और स्पष्ट होगी, वैसे-वैसे डॉक्टर और शोधकर्ता कैंसर की रोकथाम और लक्षित इलाज (Targeted Therapy) की दिशा में आगे बढ़ पाएंगे। NAV3 इस मामले में सबसे बड़ा उम्मीद का केंद्र बन रहा है।

गर्भाशय कैंसर को लेकर DNA से जुड़ी यह नई खोज महिलाओं के लिए राहत की खबर है। पांच नए रिस्क फैक्टर्स और NAV3 जैसे जीन के महत्व ने बीमारी की पहचान और रोकथाम की राह आसान कर दी है। आने वाले समय में यह रिसर्च कैंसर के शुरुआती पता लगाने और बेहतर इलाज में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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